'मैंने पापा को कुत्ते की चेन से मारा...', इस एक्टर ने किया शॉकिंग खुलासा, शारीरिक शोषण का भी हुए शिकार
Actor Sidharth Bhardwaj Shocking Revealed: रियलिटी शो एमटीवी स्प्लिट्सविला सीजन 2 जीतकर पहचान बनाने वाले एक्टर सिद्धार्थ भारद्वाज ने हाल ही में अपने जीवन के उस कड़वे सच को साझा किया है, जिसने उनके बचपन को गहराई से एफेक्ट किया. लंबे समय तक पर्दे से दूर रहने के बाद, 2019 में लॉस एंजिल्स शिफ्ट हुए सिद्धार्थ अब रियलिटी शो द 50 के जरिए भारतीय टेलीविजन पर वापसी की है. इसी बीच एक एक इंटरव्यू में सिद्धार्थ कानन से बातचीत के दौरान सिद्धार्थ ने अपने बचपन की दर्दनाक यादों को साझा करते हुए बताया कि उनका शुरुआती जीवन हिंसा, डर और संघर्ष से भरा रहा. उन्होंने क्या कुछ कहा चलिए आपको बताते हैं.
गैंगस्टर माहौल में हुआ जन्म
सिद्धार्थ ने बताया कि उनका जन्म दिल्ली के चंदेरवाल गांव में हुआ था, जो 80 के दशक में अपराध और गैंगस्टर गतिविधियों के लिए कुख्यात माना जाता था. उन्होंने खुलासा किया, “उस समय दिल्ली के कई बड़े गैंगस्टर उसी इलाके से थे. मेरे पिता, जिन्हें लोग ‘बिल्लू बॉक्सर’ के नाम से जानते थे, उन गैंगस्टर्स के लिए हिटमैन का काम करते थे. वो एक बॉक्सर थे और उसी वजह से इस दुनिया से जुड़े हुए थे.”
हालांकि, सिद्धार्थ के जन्म के बाद उनकी मां ने इस माहौल से बाहर निकलने का फैसला लिया. उन्होंने अपने पति से साफ कहा कि वो अपने बच्चे को ऐसे खतरनाक माहौल में नहीं पाल सकतीं. सिद्धार्थ ने बताया कि उनकी मां के कहने पर उनके पिता ने अपराध की दुनिया को छोड़ने का फैसला किया, ताकि उनका बेटा एक बेहतर जिंदगी जी सके.
एक हादसे ने बदल दी जिंदगी
लेकिन किस्मत ने जल्द ही एक और कठिन परीक्षा ले ली. जब सिद्धार्थ करीब 9 साल के थे, तब उनके पिता के साथ एक भयावह घटना हुई. सिद्धार्थ ने बताया, “किसी ने मेरे पिता को रोहिणी में छठी मंजिल से नीचे फेंक दिया. वो बुरी तरह घायल हो गए और करीब पांच साल तक बिस्तर पर ही रहे. उनके शरीर में जगह-जगह रॉड लगी हुई थीं,” इस मुश्किल दौर में उनके परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनकी मां ने संभाली.
उन्होंने अपनी मां के संघर्ष को याद करते हुए कहा, “मेरी मां सुबह 5-6 बजे उठती थीं, पापा को बाथरूम ले जातीं, उन्हें नहलातीं, फिर हमारे लिए खाना बनातीं, हमें स्कूल भेजतीं और उसके बाद काम पर जाती थीं, जो 9 किलोमीटर दूर था. वह रिक्शा न लेकर पैसे बचातीं ताकि मेरे पिता के लिए मटन बोन सूप बना सकें. मुझे याद है कि मैंने उनसे 7 रुपये का गुलेल मांगा था, और वह कहती थीं- आज नहीं, मेरे पास पैसे नहीं हैं. मैं इसी माहौल में पला-बढ़ा. वो अकेले सब कुछ संभाल रही थीं.”
हिंसा और घरेलू संघर्ष
हालांकि, जब उनके पिता धीरे-धीरे ठीक हुए, तो हालात और खराब हो गए. सिद्धार्थ के अनुसार, उनके पिता इस बदलाव को स्वीकार नहीं कर पाए कि अब उनकी पत्नी घर की जिम्मेदारी उठा रही हैं और उनसे ज्यादा कमा रही हैं. इस कारण वह मानसिक रूप से अस्थिर और हिंसक होते गए. उन्होंने बताया, “मेरे पिता ने मेरी मां को मुक्के मारे और मेरी मां को बुरी तरह पीटा. मेरी आंखों के सामने उन्होंने उनके सारे दांत तोड़ दिए. हर दिन एक डर और संघर्ष जैसा होता था.” सिद्धार्थ ने ये भी बताया कि हिंसा उनके घर में रोजमर्रा की बात बन चुकी थी.
उन्होंने कहा, “हम सो रहे होते थे और वो बूट पहनकर मेरी मां के पेट में लात मारते थे. हम दरवाजा बंद करके सोते थे, लेकिन फिर भी डर बना रहता था. हमने ये सब दुनिया से छिपाकर रखा.” उन्होंने कहा, "स्कूल में, हम दिखावा करते थे कि सब ठीक है, यह छुपाते हुए कि घर पर हमारी पिटाई हो रही थी और घर लौटने पर फिर से पिटाई होगी. एक तरह से, हम उस समय मर चुके थे. अब हमें कुछ भी महसूस नहीं होता."
बचपन में झेला शारीरिक शोषण
सिद्धार्थ ने अपने साथ हुए शारीरिक अत्याचार के बारे में भी खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि उनके पिता उन्हें और उनकी बहन को भी मारते थे, हालांकि बहन के साथ थोड़ी नरमी बरती जाती थी. उन्होंने कहा, “वह मुझे बहुत मारते थे. मेरी बहन को भी मारते थे, लेकिन उससे थोड़ा कम क्योंकि वह उससे प्यार करते थे.” इन हालातों में उनका बचपन बेहद कठिन और मानसिक रूप से थकाने वाला रहा.
उन्होंने कहा, "जब मैं 16 साल का था, तब मैंने एक बार उन्हें वापस मारा. ये असहनीय हो गया था. मैं उन्हें मेरी मां को मारते हुए नहीं देख सकता था. मेरे अंदर कुछ टूट गया. मुझे लगा कि अगर मैंने उन्हें वापस नहीं मारा, तो वो कभी नहीं रुकेंगे. इसलिए मैंने अपने कुत्ते की चेन ली और उससे अपने पिता को मारा."
परिवार की आगे की कहानी
समय के साथ, सिद्धार्थ के पिता का निधन दिल का दौरा पड़ने से हो गया. वहीं उनकी बहन जया भारद्वाज की शादी भारतीय क्रिकेटर दीपक चाहर से हो चुकी है.
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ईरान के सुप्रीम लीडर की चेतावनी, होर्मुज और खाड़ी क्षेत्र में नया अध्याय होगा शुरू, यूएस को दी सख्त हिदायत
ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका और इजराइल के साथ जारी युद्ध के बीच खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए लिए एक "नया अध्याय" शुरू हो चुका है. सरकारी टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय फारस की खाड़ी दिवस पर एक संदेश में सर्वोच्च नेता ने कहा कि अमेरिका की मौजूदगी के बिना खाड़ी क्षेत्र का "उज्ज्वल भविष्य" होगा. टीवी पर प्रसारित के संदेश में सर्वोच्च नेता ने कहा कि तेहरान खाड़ी क्षेत्र को सुरक्षित करेगा और "जलमार्ग के दुश्मन द्वारा किए जा रहे दुरुपयोग" को समाप्त करेगा.
अमेरिकियों का एकमात्र स्थान
खामेनेई ने अपने संदेश में लिखा, होर्मुज जलडमरूमध्य का नया प्रबंधन सभी खाड़ी देशों के लिए शांति, प्रगति और आर्थिक लाभ लाएगा. देश के अंदर और बाहर रहने वाले 90 मिलियन गौरवान्वित और सम्मानित ईरानी, ईरान की पहचान पर आधारित सभी आध्यात्मिक, मानवीय, वैज्ञानिक, औद्योगिक और तकनीकी क्षमताओं- नैनो तकनीक और जैव तकनीक से लेकर परमाणु और मिसाइल क्षमताओं तक को राष्ट्रीय संपत्ति मानते हैं. उनकी रक्षा उसी प्रकार करेंगे जैसे वे देश के जल, भूमि और हवाई क्षेत्र की रक्षा करते हैं. ईरानी सर्वोच्च नेता ने आगे कहा कि फारस की खाड़ी में अमेरिकियों का एकमात्र स्थान “इसके जल की गहराई में” है.
उन्होंने आगे कहा, “ईश्वर की कृपा और शक्ति से, फारस की खाड़ी क्षेत्र का उज्ज्वल भविष्य अमेरिका के बिना होगा, एक ऐसा भविष्य जो यहां के लोगों की प्रगति, आराम और समृद्धि में योगदान देगा.” अमेरिकी सेना ईरान युद्ध के लिए ट्रंप को तीन नई योजनाएं पेश कर सकती है.
होर्मुज नाकाबंदी से वैश्विक तेल आपूर्ति ठप
28 फरवरी को शुरू हुआ अमेरिका और इजरायल और ईरान का युद्ध अब गतिरोध में है. शांति वार्ता में किसी तरह की प्रगति नहीं हुई है. युद्धविराम के बाद भी अमेरिकी सेना होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी जारी रखे हुए है. इससे तेल और गैस व्यापार में व्यवधान और बढ़ गया है.
अमेरिका की नाकाबंदी के जवाब में ईरान ने एक बार फिर होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का ऐलान किया है. इससे कई जहाज एक बार फिर समुद्र में फंस गए. इस रोक के कारण, तेल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं. ब्रेंट क्रूड की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है. मार्च 2022 में यूक्रेन युद्ध के दौरान 130 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने के बाद से उच्चतम स्तर है.
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