Places To Visit In May In India: शिलॉन्ग-डलहौजी से लेकर पहलगाम तक, मई के महीने में घूम आएं ये 5 जगहें
Places To Visit In May In India: भारत महज एक देश नहीं, बल्कि मिजाजों, मंजरों और कहानियों का एक ऐसा संग्रह है जिसे वक्त ने बड़े करीने से पिरोया है. अगर आप ऐसी जगहों की तलाश में हैं जो अपनी खूबसूरती में आपको हैरान कर दे, आपको खुद के पास ठहरने की वजह दे. तो यहां कई ऐसी जगहें हैं जो किसी नज्म की तरह जेहन में उतर जाते हैं. आइए इस ट्रैवल गाइड में ऐसी ही 5 जगहों का सफर करते हैं. ये सभी टूरिस्ट प्लेसेस भारत के जादू का एक अलग रंग समेटे हुए हैं.
Kerala Trip Guide: परफेक्ट वेकेशन प्लान बनाने के लिए इन 5 खूबसूरत जगहों पर करें विजिट
शिलॉन्ग (पूरब का स्कॉटलैंड)
मेघालय की लहराती पहाड़ियों में बसा शिलॉन्ग किसी धीमी धुन की तरह है जो खयालों के पीछे बजती रहती है. चीड़ के जंगलों पर बिछी हुई धुंध की चादर, चट्टानों से गिरते झरने और हवाओं में घुली मिट्टी और बारिश की खुशबू. यही है शिलॉन्ग की असली खूबसूरती. केवल सुंदरता ही नहीं, यहां की जिदगी में एक अलग-सा सुकून भी है. कैफे में हल्की-हल्की संगीत की गूंज रहती है, और हर मोड़ यहां थोड़ा और रुकने को कहता है.
डलहौजी (पहाड़ों में औपनिवेशिक विरासत)
डलहौजी वो जगह है जहां इतिहास और सुकून का मिलन होता है. पुराने जमाने की इमारतें, शांत गलियां और बर्फ से ढकी चोटियों के नजारे. इन सभी चीजों को देखकर ऐसा लगता है मानो किसी और दौर में पहुंच गए हों. यह शहर आपको जल्दी में नहीं डालता, बल्कि धीरे से इशारा करता है कि लंबी सैर करें, गरम चाय की चुस्कियां लें और उन पहाड़ों को निहारें जो आसमान में दूर तक फैले दिखते हैं.
पहलगाम (चरवाहों की घाटी)
पहलगाम महज एक मंजिल नहीं, एक एहसास है. हरे-भरे मैदानों और लिद्दर नदी के किनारे बसी यह जगह सुकून और रोमांच का अनोखा संगम है. चाहे हरी-भरी घाटियों में ट्रेकिंग करनी हो या नदी किनारे बैठकर बस वक्त को बहते देखना हो. पहलगाम में वो सभी अनुभव मिलेंगे जिनकी आप उम्मीद करते हैं. इस जगह में एक अजीब कशिश है जो वक्त को धीमा और ज्यादा मायनेदार बना देती है.
ये भी पढ़ें- कुर्ग से दार्जिलिंग तक... सीनियर सिटीजन्स के लिए बेस्ट हैं ये 5 Vacation Destinations
गुलमर्ग (बर्फ का घर)
अगर बर्फ का भारत में कोई पसंदीदा ठिकाना है, तो वो गुलमर्ग है. अपनी मुलायम ढलानों और दिल थाम लेने वाले नजारों के लिए मशहूर यह जगह सर्दियों में एक ख्वाब की तरह लगती है. यहां स्कीइंग करना बादलों पर फिसलने जैसा है, जबकि मशहूर गंडोला राइड आपको एक ऐसी दुनिया का नजारा देती है जो पूरी तरह सफेद रंग में रंगी हो.
सोनमर्ग (सोने का मैदान)
सोनमर्ग वो जगह है जहां कुदरत बिना किसी लाग-लपेट के अपना सब कुछ दिखा देती है. विशाल ग्लेशियरों और अल्पाइन मैदानों से घिरा यह इलाका अनछुआ और बेलाग लगता है. यहां की जमीन पर सूरज की सुनहरी रोशनी जब पड़ती है तो समझ आता है कि इसे यह नाम क्यों मिला. यह जगह केवल खूबसूरत नहीं बल्कि अविस्मरणीय है. अगर आप एक बार भी इस जगह आते हैं, तो जीवन भर के लिए यहां की यादें संजोकर रखेंगे.
बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप: चार बच्चों ने तोड़ा दम, मृतकों की संख्या बढ़कर 280
ढाका, 2 मई (आईएएनएस)। बांग्लादेश में खसरे के लक्षण वाले चार और बच्चों की मौत हो गई, जिससे 15 मार्च से अब तक मृतकों की संख्या बढ़कर 280 हो गई है। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) ने इसकी जानकारी दी।
डीजीएचएस के डेटा का हवाला देते हुए, स्थानीय मीडिया ने बताया कि 24 घंटों (गुरुवार से शुक्रवार तक) के दौरान खसरे के 170 नए संदिग्ध मामले सामने आए, जिससे संदिग्ध मामलों की कुल संख्या बढ़कर 38,301 हो गई।
इसी अवधि में 115 नए पुष्ट मामले दर्ज किए गए, जिसके साथ कुल पुष्ट संक्रमणों की संख्या 5,146 तक पहुंच गई। 15 मार्च से अब तक कुल मौतों में 49 की पुष्टि खसरे से हुई है, जबकि 231 मौतें संदिग्ध मामलों में दर्ज की गई हैं।
स्थानीय मीडिया के अनुसार, नए पहचाने गए मामलों में से 942 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि 893 मरीजों को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई।
पिछले महीने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बांग्लादेश में फैल रहे खसरे के प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए तत्काल कदम उठाने की अपील की थी। संगठन ने चेतावनी दी थी कि यदि निगरानी, त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली और टीकाकरण कवरेज में सुधार नहीं किया गया, तो संक्रमण तेजी से फैल सकता है।
डब्ल्यूएचओ ने सलाह दी है कि सभी नगर क्षेत्रों में खसरे के टीके की दोनों खुराकों का कवरेज कम से कम 95 प्रतिशत सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, सार्वजनिक और निजी स्वास्थ्य संस्थानों में संदिग्ध मामलों की शीघ्र पहचान के लिए एकीकृत निगरानी प्रणाली को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।
हालिया रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि देश का स्वास्थ्य क्षेत्र, जो दशकों में विकसित हुआ था, अब कमजोर पड़ने के खतरे में है। प्रमुख अखबार द डेली स्टार के अनुसार, 2025 में राष्ट्रीय टीकाकरण कवरेज घटकर लगभग 60 प्रतिशत रह गया, जो पिछले एक दशक का सबसे निचला स्तर है। इससे पहले 2010 से 2022 के बीच यह 85 से 92 प्रतिशत के बीच बना हुआ था।
बांग्लादेश का विस्तारित टीकाकरण कार्यक्रम (ईपीआई) लंबे समय तक सार्वजनिक स्वास्थ्य की बड़ी सफलता माना जाता रहा है, जिसने टीके से रोके जा सकने वाले रोगों को काफी हद तक नियंत्रित किया था। लेकिन वर्तमान संकट इस प्रणाली में आई कमजोरी की ओर संकेत करता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि तुरंत प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो खसरे का व्यापक प्रकोप फैल सकता है। एक संक्रमित व्यक्ति औसतन 16 से 18 लोगों को संक्रमित कर सकता है, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है।
--आईएएनएस
केआर/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation















.jpg)





