फर्जी डिग्री को लेकर UGC सख्त, छात्रों को किया आगाह, अहम नोटिस जारी
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने फर्जी डिग्री को लेकर महत्वपूर्ण नोटिस जारी किया है। विद्यार्थियों, अभिभावकों और आम जनता को ऐसे संस्थानों में एडमिशन लेने से मना किया है, जो नियमों का उल्लंघन करते हुए डिग्री प्रदान करते हैं। नोटिस में आयोग ने स्पष्ट किया है कि इन संस्थाओं द्वारा दी गई डिग्री न तो मान्यता प्राप्त होगी, न ही उच्च शिक्षा या रोजगार के उद्देश्य के लिए वैध माना जाएगा।
यूजीसी अधिनियम 1956 के तहत संस्थानों को डिग्री या कोर्स ऑफर करने की अनुमति होती है। लेकिन आयोग के संज्ञान में आया है कि ऐसे कई तो संस्थान है, जो बिना मान्यता डिग्री प्रदान कर रहे हैं। उच्च शिक्षा के लिए ऐसे किसी भी संस्थान में एडमिशन लेना करियर पर बुरा प्रभाव डाल सकता है। इसलिए आयोग ने सभी छात्रों को किसी भी यूनिवर्सिटी में दाखिला लेने से पहले आधिकारिक वेबसाइट http://www.ugc.gov.in/ पर उपलब्ध फर्जी विश्वविद्यालय की लिस्ट देखने की सलाह दी है।
छात्रों को यूजीसी ने दी ये सलाह
यदि कोई विश्वविद्यालय संस्थान यूजीसी अधिनियम का उल्लंघन करते हुए कोई भी एकेडमी प्रोग्राम ऑफर करता है, तो इसकी जानकारी यूजीसी को देने की सलाह दी गई है। ईमेल mailto:ugcampc@gmail.com स्टूडेंट्स ऐसे संस्थानों की शिकायत कर सकते हैँ। ताकि आयोग इन संस्थाओं के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जा सके।
भारत में 30 से अधिक यूनिवर्सिटी फर्जी
अब तक यूजीसी देशभर के 32 विश्वविद्यालयों को फर्जी घोषित कर चुका है। इस सूची में दिल्ली के 12 संस्थान शामिल हैँ। चार यूनिवर्सिटी के साथ उत्तर प्रदेश दूसरे नंबर पर है। आंध्र प्रदेश, केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल में दो-दो विश्वविद्यालयों को फर्जी घोषित किया गया है। वहीं अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, झारखंड और राजस्थान में फेक यूनिवर्सिटी की संख्या केवल एक है।
यहाँ देखें फेक यूनिवर्सिटी की पूरी लिस्ट
6579445_Public-Notice-Fake-University Sun, 12 Apr 2026 17:34:40 GMTकेंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने मल्लिकार्जुन खरगे को लिखा पत्र, महिला आरक्षण बिल पर आम सहमति बनाने और जल्दी पास कराने में मांगा सहयोग, पढ़ें पूरी खबर
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखा है। इसमें सरकार ने उनसे महिला आरक्षण बिल को पास करने और इसे जल्दी लागू करने में मदद मांगी है। सरकार ने साफ तौर पर कहा है कि अगर इस प्रक्रिया में कोई भी देरी होती है, तो यह 2029 के आम चुनावों से पहले महिला आरक्षण कानून के लागू होने पर सीधा असर डालेगी।
रिजिजू ने अपने पत्र में इस बात पर जोर दिया कि साल 2023 में संसद द्वारा सर्वसम्मति से पारित किया गया नारी शक्ति वंदन अधिनियम, देश की महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए एक लंबे समय से चली आ रही राष्ट्रीय इच्छा और सभी राजनीतिक दलों की सामूहिक प्रतिबद्धता को दिखाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अधिनियम सभी राजनीतिक दलों की सच्ची मिली-जुली कोशिश और राष्ट्रीय इच्छा का नतीजा था, जो पूरे देश में हमारी नारी शक्ति के लिए हमारे सामूहिक वादे का प्रतीक है।
संसद का एक विशेष सत्र 16 अप्रैल से 18 अप्रैल, 2026 तक निर्धारित है। इस महत्वपूर्ण सत्र के दौरान, महिला आरक्षण अधिनियम और उससे जुड़े जरूरी बदलावों पर विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है। इसका प्राथमिक उद्देश्य राजनीतिक पार्टियों के बीच आम सहमति बनाना है, ताकि इस ऐतिहासिक कानून को जल्द से जल्द प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।
रिजिजू ने बिल को जल्दी लागू करने पर दिया जोर
रिजिजू ने अपने पत्र में बिल को जल्दी लागू करने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि देरी से इसके अगले आम चुनावों से पहले लागू होने की संभावना पर गंभीर असर पड़ सकता है। रिजिजू ने लिखा, “तब भी, ज्यादातर पार्टियों और स्टेकहोल्डर्स का यही मानना था कि इसे जल्द से जल्द लागू किया जाना चाहिए। आज, हम 2026 में हैं और अगर हम अभी कार्रवाई नहीं करते हैं, तो हो सकता है कि 2029 के चुनावों तक महिला आरक्षण लागू न हो पाए।”
उन्होंने आगे कहा, “इसलिए, हमारे विचार से, जरूरी बदलावों के साथ आगे बढ़ने का यह सबसे सही और लॉजिकल समय है।” केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने इस आरोप को खारिज कर दिया कि सरकार ने विपक्ष से सलाह नहीं ली है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि सरकार और विपक्ष के बीच संपर्क लगातार जारी है। उन्होंने लिखा, “सलाह के मुद्दे पर, मैं इस बात से सम्मानपूर्वक असहमत हूं कि सरकार ने विपक्ष से बातचीत नहीं की है।”
रिजिजू ने अपने पत्र में जानकारी दी कि 19 मार्च, 2026 से समाजवादी पार्टी, डीएमके और दूसरी पार्टियों के साथ कई मीटिंग हो चुकी हैं। इसके साथ ही एनडीए की सहयोगी पार्टियों के साथ भी इस विषय पर बैठकें हुई हैं। मंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार आम सहमति पक्का करने के लिए विपक्ष के साथ आगे की बातचीत के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने लिखा, “हम आपके और आपके साथियों के साथ आगे की बातचीत के लिए पूरी तरह तैयार हैं, क्योंकि हमारा मकसद एक ही है नारी शक्ति वंदन अधिनियम को जल्द से जल्द लागू करना।”
उन्होंने यह भी बताया कि महिला आरक्षण का मुद्दा दशकों से भारतीय राजनीति में चर्चा का विषय रहा है। उन्होंने इस ऐतिहासिक कानून को आसानी से पूरा करने के लिए सभी के समर्थन की भावुक अपील की। रिजिजू ने अपने पत्र में लिखा, “ऊपर बताई गई बातों और पहले से बन रही भारी आम सहमति को देखते हुए, मैं इस ऐतिहासिक कानून को आसानी से पूरा करने में आपके कीमती सपोर्ट की दिल से आग्रह करता हूं, जो देश भर में करोड़ों महिलाओं को मजबूत बनाएगा।”
नारी शक्ति वंदन अधिनियम में बदलाव की जरूरत
नारी शक्ति वंदन अधिनियम को आम बोलचाल में महिला आरक्षण एक्ट के नाम से जाना जाता है। संसद का बजट सेशन बढ़ा दिया गया है, और 16 अप्रैल को सदन की तीन दिन की स्पेशल मीटिंग बुलाई गई है। इस कानून के लागू होने के बाद लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर 816 हो जाएगी, जिनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यह प्रावधान महिला प्रतिनिधित्व को मजबूत करेगा।
लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान साल 2023 में संविधान में बदलाव करके लाया गया था। हालांकि, मूल कानून के अनुसार, महिलाओं का यह कोटा 2027 की जनगणना के आधार पर डिलिमिटेशन का काम पूरा होने के बाद ही लागू होता। इसका मतलब यह था कि अगर कोई बदलाव नहीं किया जाता, तो यह रिजर्वेशन 2034 से पहले लागू नहीं हो पाता।
इसे 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने के लिए, नारी शक्ति वंदन अधिनियम में बदलाव की जरूरत है। इसी वजह से, सरकार कानून में जरूरी बदलाव पास करने के लिए एक स्पेशल सेशन बुला रही है। इस संशोधन का मकसद महिला आरक्षण को तुरंत प्रभाव से लागू करना है, ताकि महिलाएं अगले आम चुनाव से ही अपनी हिस्सेदारी सुनिश्चित कर सकें।
पीएम मोदी ने भी की थी अपील
इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा था कि यह जरूरी है कि 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव महिला आरक्षण के साथ कराए जाएं। उन्होंने सभी राजनीतिक पार्टियों से महिला आरक्षण कानून में बदलाव पास करने के लिए एक आवाज में साथ आने को कहा था, ताकि यह ऐतिहासिक कदम समय पर उठाया जा सके।
संसद की तीन दिन की स्पेशल मीटिंग से पहले, लोकसभा और राज्यसभा के फ्लोर लीडर्स को लिखे एक लेटर में पीएम मोदी ने यह भी कहा था कि कोई भी समाज तभी सही मायने में तरक्की करता है जब महिलाओं को तरक्की करने, महत्वपूर्ण फैसले लेने और सबसे जरूरी, नेतृत्व करने का पूरा मौका मिले। उनका यह बयान महिला सशक्तिकरण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री ने 11 अप्रैल को लिखे अपने पत्र में स्पष्ट रूप से कहा, “यह जरूरी है कि 2029 के लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव महिला आरक्षण के साथ कराए जाएं।” पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि 2029 में महिला आरक्षण एक्ट लागू होने से भारत के प्रजातांत्रिक संस्थानों में एक नई एनर्जी आएगी और लोगों का भरोसा मजबूत होगा। उन्होंने यह भी कहा कि इससे शासन में ज्यादा भागीदारी और प्रतिनिधित्व भी पक्का होगा, जिससे लोकतंत्र और मजबूत होगा।
Sun, 12 Apr 2026 17:36:16 GMTPromises to India’s women cannot become politics of postponement.
Today, when it is time to deliver the #NariShaktiVandan Adhiniyam, hesitation & questions are being raised. I respectfully differ.I have written to Shri @kharge ji, placing the facts on record & reiterating the… pic.twitter.com/6qvNUgdJ8a
— Kiren Rijiju (@KirenRijiju) April 12, 2026
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