पति नहीं, गोविंदा जैसा बेटा चाहिए! सुनीता आहूजा का चौंकाने वाला बयान, रिश्ते पर खुलकर बोलीं
बॉलीवुड में रिश्तों की कहानियां अक्सर चर्चा में रहती हैं, लेकिन इस बार मामला कुछ अलग है। सुनीता आहूजा का हालिया बयान हर किसी को चौंका रहा है। उन्होंने अपने पति गोविंदा को लेकर ऐसी बात कह दी, जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया।
“मुझे गोविंदा जैसा बेटा चाहिए, पति नहीं” यह एक लाइन ही काफी थी, जिसने उनके रिश्ते को फिर से सुर्खियों में ला दिया। यह सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि एक लंबे रिश्ते के अनुभव की झलक भी है।
सुनीता आहूजा का बयान
सुनीता आहूजा का बयान साफ तौर पर यह दिखाता है कि उन्होंने अपने रिश्ते को लेकर बिना किसी झिझक के बात की। उन्होंने कहा कि गोविंदा एक बेटे और पिता के तौर पर बहुत अच्छे रहे हैं, लेकिन एक पति के रूप में वे उतने अच्छे नहीं साबित हुए।
उन्होंने बताया कि उनकी जिंदगी में कुछ ऐसी चीजें थीं, जो वे अपने पति के साथ करना चाहती थीं जैसे पार्टी में जाना, डिनर करना या छुट्टियों पर जाना। लेकिन गोविंदा हमेशा अपने काम और परिवार की जिम्मेदारियों में इतने व्यस्त रहे कि उन्होंने इन पलों को कभी जी ही नहीं पाया।
‘अब छोड़ भी नहीं सकती’- 40 साल का रिश्ता
सुनीता आहूजा का बयान सिर्फ आलोचना नहीं है, बल्कि उसमें एक सच्चाई और मजबूरी भी झलकती है। उन्होंने साफ कहा कि अब उनकी शादी को 40 साल हो चुके हैं और इस रिश्ते को छोड़ने के बारे में सोचना भी गलत होगा।
गोविंदा की पर्सनैलिटी पर क्या बोलीं सुनीता
सुनीता आहूजा का बयान यह भी बताता है कि वह गोविंदा को पूरी तरह नकार नहीं रही हैं। उन्होंने कहा कि गोविंदा एक बेटे और भाई के रूप में बहुत अच्छे हैं और उन्होंने अपने परिवार की जिम्मेदारियों को हमेशा प्राथमिकता दी है। लेकिन एक पति के तौर पर वे उन उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए, जो सुनीता ने उनसे रखी थीं।
अफेयर की चर्चाओं पर भी दी प्रतिक्रिया
सुनीता आहूजा का बयान तब और चर्चा में आया, जब उन्होंने गोविंदा के कथित अफेयर्स को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि अगर आपको अपने पति पर भरोसा है, तो ऐसी बातों से फर्क नहीं पड़ता। 90 के दशक में इस तरह की खबरें आम मानी जाती थीं और उन्होंने कभी इन बातों को अपने रिश्ते पर हावी नहीं होने दिया।
सोशल मीडिया और गॉसिप पर क्या कहा
सुनीता आहूजा का बयान सोशल मीडिया और गॉसिप को लेकर भी साफ था। उन्होंने कहा कि आजकल लोग बिना वजह बातें बनाते हैं और उन्हें ज्यादा महत्व नहीं देना चाहिए। उनका मानना है कि असली जिंदगी वही है, जो घर के अंदर चल रही होती है, न कि जो बाहर लोग कह रहे हैं।
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