भारत में ऑफिस लीजिंग 2026 की पहली तिमाही में रिकॉर्ड 21.5 मिलियन सक्वायर फीट रही
नई दिल्ली, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत में ऑफिस लीजिंग 2026 की पहली तिमाही में रिकॉर्ड 21.5 मिलियन स्क्वायर फीट पर रही है। इसकी वजह लगातार ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) और फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस ऑपरेटर्स की ओर से मांग बने रहना है। यह जानकारी सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।
कमर्शियल रियल एस्टेट सर्विसेज फर्म कंपनी जेएलएल की रिपोर्ट के अनुसार, कुल लीजिंग में सालाना आधार पर 10.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिसमें जीसीसी की हिस्सेदारी 45.5 प्रतिशत और फ्लेक्स ऑपरेटरों का हिस्सेदारी 25.9 प्रतिशत है।
रिपोर्ट में बताया गया कि यह वृद्धि ग्लोबल कंपनियां द्वारा भारत का लाभ उठाने के तरीके में आए मूलभूत परिवर्तन के कारण हो रही है। जीसीसी ने अपने विस्तार को सालाना आधार पर 43 प्रतिशत बढ़ाकर 10 मिलियन वर्ग फुट तक पहुंचा दिया है और अब कुल लीजिंग गतिविधि में उनका हिस्सा 45.5 प्रतिशत है।
जेएलएल के ऑफिस लीजिंग और रिटेल सर्विसेज के प्रमुख, वरिष्ठ प्रबंध निदेशक (कर्नाटक, केरल), भारत, राहुल अरोरा ने कहा,ये पारंपरिक बैक-ऑफिस ऑपरेशन नहीं हैं, ये एआई डेवलपमेंट, डिजिटल इंजीनियरिंग और मुख्य उत्पाद विकास पर केंद्रित रणनीतिक इनोवेशन सेंटर्स हैं।
रिपोर्ट में बताया गया कि लीजिंग बाजार लगातार मजबूत हो रहा है और पूरे भारत में खाली ऑफिस की दर घटकर पांच वर्षों के निचले स्तर 14.7 प्रतिशत पर रही है। वहीं, तिमाही में नेट अब्सॉर्प्शन 13.7 मिलियन स्क्वायर फीट पर पहुंच गया है।
क्षेत्रीय स्तर पर, बेंगलुरु पहली तिमाही में लीजिंग वॉल्यूम में 24.8 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ शीर्ष पर था, इसके बाद मुंबई 19.5 प्रतिशत और हैदराबाद 16.8 प्रतिशत के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। पुणे की हिस्सेदारी 14.5 प्रतिशत रही, जबकि दिल्ली-एनसीआर की हिस्सेदारी 14.2 प्रतिशत थी।
बेंगलुरु में तिमाही सकल लीजिंग गतिविधि में जीसीसी (जीसीसी) की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत रही, जो पिछले दो वर्षों में सबसे अधिक है।
जीसीसी में टेक्नोलॉजी और बीएफएसआई (बीएफएसआई) ने लीजिंग गतिविधि में दबदबा बनाए रखा, इसके बाद मैन्युफैक्चरिंग का स्थान रहा। ग्लोबल कंपनियों ने 2026 की पहली तिमाही में भारत में ऑफिस लीजिंग मार्केट में 57 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ अपना दबदबा बनाए रखा, जो लगभग पिछले वर्ष के औसत के अनुरूप है।
--आईएएनएस
एबीएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
एससीओ के रक्षा मंत्रियों की बैठक, आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति दोहराएगा भारत
नई दिल्ली, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंच रहे हैं। वह यहां 28 अप्रैल को होने वाली शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के रक्षा मंत्रियों की बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। यह एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय बैठक है।
इस बैठक में सदस्य देशों के रक्षा मंत्री क्षेत्रीय सुरक्षा, शांति और सहयोग से जुड़े कई विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे। भारत यहां आतंकवाद के खिलाफ अपनी शून्य-सहिष्णुता टॉलरेंस की नीति को स्पष्ट रूप से सामने रखेगा। शंघाई सहयोग संगठन के सदस्यों में भारत, रूस, चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ईरान और बेलारूस शामिल हैं।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार बैठक के एजेंडे में अंतरराष्ट्रीय शांति को मजबूत करना व आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक रणनीति बनाना शामिल है। इसके अलावा सदस्य देशों के बीच रक्षा सहयोग बढ़ाना भी प्रमुख रूप से एजेंडे का हिस्सा है।
गौरतलब है कि ईरान-अमेरिका के बीच जारी तनाव के कारण मौजूदा समय में पश्चिम एशिया में संघर्ष की स्थिति बनी हुई है। इस स्थिति से पैदा हुए भू-राजनीतिक तनाव के कारण यह बैठक और भी महत्वपूर्ण हो गई है। संभावना है कि सदस्य देश इस संकट के प्रभाव को कम करने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के उपायों पर भी चर्चा करेंगे।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस मंच पर भारत की वैश्विक शांति के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराएंगे। साथ ही, वे आतंकवाद और उग्रवाद के खिलाफ भारत की ‘शून्य सहिष्णुता’ की नीति को स्पष्ट रूप से सामने रखेंगे। दरअसल भारत लगातार यह मानता रहा है कि आतंकवाद किसी भी रूप में मानवता के लिए खतरा है और इसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने चाहिए।
शंघाई सहयोग संगठन की बैठक के दौरान रक्षा मंत्री विभिन्न देशों के अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय वार्ताएं भी कर सकते हैं। इन बैठकों में रक्षा सहयोग को और मजबूत करने, सामरिक साझेदारी बढ़ाने और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है।
शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना 15 जून 2001 को चीन के शंघाई शहर में हुई थी। यह संगठन एशिया क्षेत्र के प्रमुख राजनीतिक और आर्थिक संगठनों में से एक है। इसके सदस्य देशों में भारत सहित कई प्रमुख देश शामिल हैं। भारत वर्ष 2017 में इस संगठन का पूर्ण सदस्य बना था। इसके उपरांत वर्ष 2023 में भारत ने इसकी रोटेटिंग चेयरमैनशिप भी संभाली थी। अब बिश्केक में होने वाली यह बैठक भारत के लिए अपने रणनीतिक दृष्टिकोण को प्रस्तुत करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग को और मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर मानी जा रही है।
--आईएएनएस
जीसीबी/एसके
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