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लीबिया में राष्ट्रीय चुनाव को लेकर पीएम और यूएन दूत ने रोडमैप पर की चर्चा

त्रिपोली, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। लीबिया के प्रधानमंत्री अब्दुल-हामिद दबीबा ने संयुक्त राष्ट्र के एक दूत के साथ बातचीत की ताकि देश को लंबे समय से रुके हुए राष्ट्रीय चुनावों की ओर ले जाने और इसके राजनीतिक बंटवारे को खत्म करने के तरीकों पर विचार किया जा सके।

सरकार के हाकोमितना न्यूज प्लेटफॉर्म ने बताया कि लीबिया के लिए यूएन महासचिव की स्पेशल प्रतिनिधि हन्ना टेटेह ने दबीबा को संयुक्त राष्ट्र के समर्थन वाले रोडमैप के बारे में बताया। इस रोडमैप का मकसद सरकारी संस्थाओं को एक करना और सीधे चुनाव की तैयारी करना है।

उन्होंने कहा कि हाल ही में यूएन द्वारा स्पॉन्सर्ड मिनी-डायलॉग इस रोडमैप के पहले फेज में आता है। यह चुनावी कानूनों को फाइनल करने और हाई नेशनल इलेक्शन कमीशन का बोर्ड बनाने पर केंद्रित है।

दबीबा ने उन कोशिशों के लिए अपनी सरकार के समर्थन को फिर से सुनिश्चित किया जो सिविल स्टेट की तरफ जाने के रास्ते को बनाए रखने के लिए प्रैक्टिकल और लागू किए जा सकने वाले समाधान का सुझाव देते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे साफ रास्तों पर आगे बढ़ना जरूरी है जिससे चुनावी कानून पूरे हों और सीधे चुनाव हों, जिसका मकसद संस्थाओं में फूट को खत्म करना और वोटरों की इच्छा का सम्मान करना हो।

न्यूज एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक, टेटेह ने लीबिया की सभी पार्टियों के बीच आम सहमति बनाने और राजनीतिक प्रक्रिया की सफलता और बड़े पैमाने पर चुनाव कराने के लिए अच्छे माहौल बनाने के लिए यूएन मिशन के लगातार समर्थन को दोहराया।

यह बैठक कार्यकारी प्राधिकरण के पुनर्गठन से जुड़े एक अन्य रोडमैप की बिना पुष्टि की गई रिपोर्टों पर बढ़ती जन बहस के बीच हो रही है। मिसराता शहर के एक्टिविस्ट समूह ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है और इसे देश की स्वतंत्रता के लिए खतरा बताया है।

बता दें, लीबिया में फरवरी 2011 में मुअम्मर गद्दाफी के 42 साल की सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हुए, जो सशस्त्र संघर्ष में बदल गया। इसके बाद अगस्त 2011 में गद्दाफी की सरकार गिरा दी गई। फिर 20 अक्टूबर 2011 को मुअम्मर गद्दाफी की उनके गृहनगर सिरते में हत्या कर दी गई।

इसके बाद से लीबिया दो हिस्सों में बंटा हुआ है, एक तरफ त्रिपोली में संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त गवर्नमेंट ऑफ नेशनल यूनिटी है और दूसरी ओर कमांडर खलीफा हफ्तार के नेतृत्व में लीबियन नेशनल आर्मी के समर्थन वाला पूर्वी प्रशासन।

इससे पहले, 22 अप्रैल को, लीबिया के लिए यूएन के टॉप दूत ने कहा था कि रुकी हुई राजनीतिक तरक्की, बिगड़ती अर्थव्यवस्था और लगातार संस्थागत मतभेद देश को और ज्यादा अस्थिरता की ओर धकेल रहे हैं।

--आईएएनएस

केके/एएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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भारत में ऑफिस लीजिंग 2026 की पहली तिमाही में रिकॉर्ड 21.5 मिलियन सक्वायर फीट रही

नई दिल्ली, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत में ऑफिस लीजिंग 2026 की पहली तिमाही में रिकॉर्ड 21.5 मिलियन स्क्वायर फीट पर रही है। इसकी वजह लगातार ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) और फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस ऑपरेटर्स की ओर से मांग बने रहना है। यह जानकारी सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।

कमर्शियल रियल एस्टेट सर्विसेज फर्म कंपनी जेएलएल की रिपोर्ट के अनुसार, कुल लीजिंग में सालाना आधार पर 10.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिसमें जीसीसी की हिस्सेदारी 45.5 प्रतिशत और फ्लेक्स ऑपरेटरों का हिस्सेदारी 25.9 प्रतिशत है।

रिपोर्ट में बताया गया कि यह वृद्धि ग्लोबल कंपनियां द्वारा भारत का लाभ उठाने के तरीके में आए मूलभूत परिवर्तन के कारण हो रही है। जीसीसी ने अपने विस्तार को सालाना आधार पर 43 प्रतिशत बढ़ाकर 10 मिलियन वर्ग फुट तक पहुंचा दिया है और अब कुल लीजिंग गतिविधि में उनका हिस्सा 45.5 प्रतिशत है।

जेएलएल के ऑफिस लीजिंग और रिटेल सर्विसेज के प्रमुख, वरिष्ठ प्रबंध निदेशक (कर्नाटक, केरल), भारत, राहुल अरोरा ने कहा,ये पारंपरिक बैक-ऑफिस ऑपरेशन नहीं हैं, ये एआई डेवलपमेंट, डिजिटल इंजीनियरिंग और मुख्य उत्पाद विकास पर केंद्रित रणनीतिक इनोवेशन सेंटर्स हैं।

रिपोर्ट में बताया गया कि लीजिंग बाजार लगातार मजबूत हो रहा है और पूरे भारत में खाली ऑफिस की दर घटकर पांच वर्षों के निचले स्तर 14.7 प्रतिशत पर रही है। वहीं, तिमाही में नेट अब्सॉर्प्शन 13.7 मिलियन स्क्वायर फीट पर पहुंच गया है।

क्षेत्रीय स्तर पर, बेंगलुरु पहली तिमाही में लीजिंग वॉल्यूम में 24.8 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ शीर्ष पर था, इसके बाद मुंबई 19.5 प्रतिशत और हैदराबाद 16.8 प्रतिशत के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। पुणे की हिस्सेदारी 14.5 प्रतिशत रही, जबकि दिल्ली-एनसीआर की हिस्सेदारी 14.2 प्रतिशत थी।

बेंगलुरु में तिमाही सकल लीजिंग गतिविधि में जीसीसी (जीसीसी) की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत रही, जो पिछले दो वर्षों में सबसे अधिक है।

जीसीसी में टेक्नोलॉजी और बीएफएसआई (बीएफएसआई) ने लीजिंग गतिविधि में दबदबा बनाए रखा, इसके बाद मैन्युफैक्चरिंग का स्थान रहा। ग्लोबल कंपनियों ने 2026 की पहली तिमाही में भारत में ऑफिस लीजिंग मार्केट में 57 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ अपना दबदबा बनाए रखा, जो लगभग पिछले वर्ष के औसत के अनुरूप है।

--आईएएनएस

एबीएस/

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