Donald Trump को बड़ा झटका! अमेरिकी संसद में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने का प्रस्ताव पास, अपनों ने ही बदला पाला
पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ गया है। अमेरिकी संसद के निचले सदन 'प्रतिनिधि सभा' (House of Representatives) ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की युद्ध शक्तियों पर लगाम लगाने वाले एक ऐतिहासिक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को रोकना है। इस मतदान की सबसे खास बात यह रही कि राष्ट्रपति ट्रंप की अपनी ही रिपब्लिकन पार्टी के कई सांसदों ने पाला बदलते हुए विपक्षी डेमोक्रेट्स का साथ दिया और अपनी ही सरकार के रुख का कड़ा विरोध किया। युद्ध ने देश-विदेश की राजनीति को प्रभावित किया है। सदन के अध्यक्ष माइक जॉनसन ने दो सप्ताह पहले सदन की कार्यवाही अचानक स्थगित कर दी थी और इस प्रस्ताव को पारित होने से रोकने की कोशिश की थी जिसे उस समय मंजूरी मिलने की संभावना बन रही थी।
हालांकि, जैसे-जैसे संघर्ष लंबा खिंचता गया और राष्ट्रपति ट्रंप त्वरित समाधान निकालने के लिए जूझते दिखायी दिखे, तो युद्ध के प्रति असंतोष बढ़ता गया। बुधवार को मतदान में प्रस्ताव के पक्ष में 215 और विरोध में 208 वोट पड़े। परिणाम घोषित होते ही सांसदों ने खुशियां मनायीं। न्यूयॉर्क से डेमोक्रेटिक नेता हकीम जेफ्रीज ने कहा, ‘‘यह बिना सोचा-समझा और महंगा युद्ध आज ही समाप्त होना चाहिए। हमें केवल कुछ रिपब्लिकन सांसदों के समर्थन की जरूरत है। यह युद्ध अमेरिकी करदाताओं पर 100 अरब डॉलर से अधिक का बोझ डाल चुका है और इसने अमेरिका की स्थिति को कमजोर किया है।’’ ईरान के खिलाफ अमेरिकी युद्ध की रोकथाम की दिशा में प्रतिनिधि सभा में यह चौथा प्रयास था और पहली बार यह प्रस्ताव पारित हुआ है।
पिछले महीने सीनेट ने भी इसी तरह के एक प्रस्ताव को आगे बढ़ाया था, जब कुछ रिपब्लिकन सीनेटरों ने अपनी पार्टी के राष्ट्रपति के खिलाफ जाकर उसका समर्थन किया था। हर बार जब डेमोक्रेट्स यह प्रस्ताव लेकर आए तो समर्थन बढ़ता गया। ट्रंप ने चुनाव प्रचार के दौरान अमेरिका को विदेशी संघर्षों से दूर रखने और घरेलू मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने का वादा किया था, लेकिन इस युद्ध ने फिर से पश्चिम एशिया को अमेरिकी राजनीति के केंद्र में ला दिया है। हालांकि, जॉनसन ने कहा कि ट्रंप खासकर मध्यावधि चुनावों को देखते हुए अब भी घरेलू मुद्दों पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। ये चुनाव इस बात का फैसला करेंगे कि संसद में किस पार्टी का नियंत्रण होगा।
उन्होंने बताया कि ट्रंप अपने सहयोगी देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य को वाणिज्यिक गतिविधियों, विशेष रूप से तेल आपूर्ति के लिए फिर से पूरी तरह खोलने में सहयोग की अपील कर रहे हैं। अमेरिका द्वारा इजराइल के साथ मिलकर 28 फरवरी को ईरान पर हमले शुरू करने के बाद से अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे महंगाई का दबाव और बढ़ गया है। हालांकि, अप्रैल में युद्धविराम की घोषणा की गई थी, लेकिन स्थिति अब भी अस्थिर और अनिश्चित बनी हुई है। स्थायी शांति के लिए बातचीत लंबी खिंच रही है।
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इस बीच, ईरान समर्थित हिजबुल्ला के साथ इजराइल के संघर्ष ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। वहीं अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य हमले समय-समय पर जारी हैं। प्रतिनिधि सभा द्वारा पारित यह प्रस्ताव युद्ध को तुरंत नहीं रोकेगा, लेकिन इसे आगे की सैन्य कार्रवाई के खिलाफ एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और प्रतीकात्मक कदम माना जा रहा है। अब यह प्रस्ताव सीनेट में जाएगा। पिछले महीने चार रिपब्लिकन सीनेटरों ने डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर इसी तरह के प्रस्ताव का समर्थन किया था। हालांकि सीनेट ने अभी तक इस पर अंतिम फैसला नहीं किया है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बुधवार को प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति के समक्ष कहा कि यदि कांग्रेस यह प्रस्ताव पारित करती है तो ईरान यह समझेगा कि प्रशासन के ‘‘हाथ बंध गए हैं।’’ उन्होंने कहा कि वे सोचेंगे कि ‘‘हम उनके खिलाफ कुछ नहीं कर पाएंगे, तो फिर समझौता क्यों करें?’’ ईरान से जुड़े युद्ध के अलावा कांग्रेस (संसद) राष्ट्रीय सुरक्षा के अन्य मुद्दों पर भी सक्रिय है।
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जिसके तहत रूस के खिलाफ युद्ध लड़ रहे यूक्रेन को अमेरिकी समर्थन और युद्धग्रस्त देश के पुनर्निर्माण में सहायता देने का प्रावधान है। इसके अलावा इस सप्ताह लेबनान में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को रोकने संबंधी एक अन्य युद्ध शक्ति प्रस्ताव पर भी विचार किए जाने की संभावना है।
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अमेरिकी संविधान के अनुसार युद्ध घोषित करने का अधिकार संसद के पास है, लेकिन राष्ट्रपति सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर होने के नाते सैन्य कार्रवाई का आदेश दे सकते हैं। इसी वजह से युद्ध और शांति से जुड़े मामलों में अंतिम अधिकार को लेकर लंबे समय से संवैधानिक बहस जारी है। युद्ध शक्तियां अधिनियम के तहत किसी सैन्य कार्रवाई के 60 दिन के भीतर अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय व्हाइट हाउस को कांग्रेस से मंजूरी लेनी होती है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि ईरान संघर्ष में युद्धविराम घोषित हो चुका है, इसलिए अब शत्रुता समाप्त मानी जानी चाहिए।
भारत में खत्म होगा पेट्रोल-डीजल संकट! दुनिया का सबसे बड़े तेल भंडारण वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति पहुंचीं इंडिया, दिया बड़ा बयान
Delcy Rodriguez India Visit: मीडिल ईस्ट में संकट के चलते एशिया समेत के कई देशों में पेट्रोल-डीजल का संकट पैदा हो गया है। अभी तक कच्चे तेल के लिए भारत समेत तमाम देशों की निर्भरता खाड़ी देशों और रूस पर है। अब भारत की यह निर्भरता कम हो सकती है। इसकी वजह है दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वेनेजुएला। वेनेजुएला की अंतिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज (Delcy Rodriguez) 5 दिन के लिए भारत दौरे पर हैं। आज वह दिल्ली में पीएम मोदी और विदेश मंत्री जयशंकर से मुलाकात करेंगी।
विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक पोस्ट में वेनेजुएला के नेता का स्वागत किया। मंत्रालय ने कहा कि यह यात्रा दोनों देशों के लिए सहयोग को और मजबूत करने का अवसर है। साथ ही द्विपक्षीय साझेदारी को नई गति देने में भी मदद मिलेगी। अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज 3 से 7 जून तक भारत के दौरे पर हैं। डेल्सी रोड्रिगेज के दौरे से कई अहम समझौतों की उम्मीद जताई जा रही है।
वेनेजुएला लाया ये संदेश
नई दिल्ली पहुंचने पर वेनेजुएला की नेता डेल्सी रोड्रिगेज ने खुशी जताई। उन्होंने भारत को साहसी, आध्यात्मिक और वैश्विक अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाने वाला देश बताया। डेल्सी ने कहा कि वेनेजुएला भारत के लिए शांति, मित्रता और सहयोग का संदेश लेकर आया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस दौरे की बैठकों से दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत होंगे।
सकारात्मक और परिणामदायी बैठक की उम्मीद
वेनेजुएला की नेता डेल्सी रोड्रिगेज ने कहा कि वो भारत बहुत जरूरी काम से आई हैं। उन्होंने बताया कि भारत और वेनेजुएला मिलकर उन चीजों पर बात करेंगे जिनकी वेनेजुएला के लोगों को सबसे ज्यादा जरूरत है। डेल्सी को भरोसा है कि अगले कुछ दिनों में जो मीटिंग होगी, वो अच्छी रहेगी और उससे अच्छे नतीजे निकलेंगे।
ऊर्जा में पार्टनरशिप हो सकती है बात
वेनेजुएला के पास बहुत तेल है और वो दूसरे देशों को बेचता है। भारत दुनिया में तीसरे नंबर पर सबसे ज्यादा तेल खरीदता है।इसलिए जब वेनेजुएला के नेता भारत आए हैं, तो सबसे ज्यादा बात तेल और ऊर्जा को लेकर होगी। इसके अलावा दोनों देश व्यापार, पैसा लगाने, दवा, अस्पताल, गाड़ियों और सौर ऊर्जा जैसी चीजों पर भी साथ काम करने की बात कर सकते हैं।
भारत की वैश्विक भूमिका की हुई तारीफ
वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति नेता डेल्सी रोड्रिगेज ने भारत की बहुत तारीफ की। उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया की अर्थव्यवस्था में बहुत मजबूत देश बन गया है। पूरी दुनिया में भारत का नाम बढ़ रहा है। इस पर विशेषज्ञों का कहना है कि डेल्सी का भारत आना बहुत अच्छा है। इससे भारत और वेनेजुएला तेल, व्यापार और दूसरे मामलों में और अच्छे से साथ काम कर पाएंगे
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