दिल्ली टू बिहार! हो गया 'टोपी ट्रांसफर...' इसकी टोपी, उसके सर, सिस्टम लाचार या बेहद चालाक?
दिल्ली के मालवीय नगर होटल अग्निकांड के बाद बिहार के मुजफ्फरपुर से भी दिल दहला देने वाली तस्वीरें सामने आईं हैं. अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर इस हादसे का जिम्मेदार कौन है? आग बुझ चुकी है, जांच शुरू हो चुकी है, गिरफ्तारियां भी हो रही हैं, लेकिन बहस अब सिर्फ एक होटल या अस्पताल तक सीमित नहीं रही. चर्चा दिल्ली की उन हजारों इमारतों और तंग गलियों तक पहुंच गई है जहां किसी भी दिन ऐसा हादसा दोबारा हो सकता है. मालवीय नगर में जिस होटल में आग लगी, वहां शुरुआती जांच में कई गंभीर लापरवाहियां सामने आई हैं. बताया जा रहा है कि होटल के पास फायर एनओसी नहीं थी, एंट्री और एग्जिट का उचित इंतजाम नहीं था और बेसमेंट तक में कमरे बना दिए गए थे. फायर ब्रिगेड की टीम को बेसमेंट में पहुंचने के लिए लोहे की ग्रिल काटनी पड़ी, जिसके बाद कई लोगों को धुएं से भरे कमरों से बाहर निकाला गया. कई लोगों की जान बच गई, लेकिन कई परिवारों को अपूरणीय नुकसान झेलना पड़ा. वहीं दूसरी ओर मुजफ्फरपुर के प्रसाद अस्पताल में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे बिहार को झकझोर कर रख दिया है. अस्पताल के आईसीयू में लगी आग और धुएं के कारण चार मरीजों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 20 से अधिक लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं. घायलों का इलाज अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है. कई मरीज बेड से उठकर बाहर निकलने की स्थिति में भी नहीं थे. दम घुटने के कारण कुछ मरीजों की मौके पर ही मौत हो गई.घटना के बाद सामने आई तस्वीरें हादसे की भयावहता को बयां कर रही हैं. घटना के बाद अब राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है. भाजपा, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं. कोई पिछले प्रशासन को दोषी बता रहा है तो कोई मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है. लेकिन लोगों के मन में एक ही सवाल है कि अगर इमारत में इतनी खामियां थीं तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
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