जल जीवन मिशन 2.0 से खुलेंगे 3 लाख करोड़ के ओएंडएम अवसर: रिपोर्ट
नई दिल्ली, 24 मार्च (आईएएनएस)। जल जीवन मिशन 2.0 के तहत ऑपरेशन और मेंटेनेंस (ओएंडएम) से जुड़े करीब 3 लाख करोड़ रुपए के अवसर उत्पन्न होने की संभावना है। मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, अब यह योजना केवल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पानी की सप्लाई को लंबे समय तक सही तरीके से चलाने और बनाए रखने पर फोकस करेगी।
आईसीआरए की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस मिशन का कुल बजट बढ़कर 8.69 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो गया है। साथ ही, अब इसे सर्विस-डिलीवरी मॉडल में बदला जा रहा है, जिससे इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) सेक्टर को फायदा मिलेगा।
रिपोर्ट के अनुसार, परियोजनाओं की समयसीमा बढ़ने और बजट बढ़ने से कंपनियों को भुगतान मिलने में सुधार होगा। फिलहाल कई राज्यों में भुगतान में 6 महीने से ज्यादा की देरी हो रही है, लेकिन सितंबर 2026 तक इसे घटाकर 60 दिन से कम करने का लक्ष्य है।
सरकार ने 19.4 करोड़ ग्रामीण परिवारों तक 100 प्रतिशत नल कनेक्शन पहुंचाने की समयसीमा 2024 से बढ़ाकर अब दिसंबर 2028 कर दी है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पीवीसी और एचडीपीई पाइप बनाने वाली बड़ी और संगठित कंपनियों को इसका खास फायदा मिलेगा, क्योंकि अब गुणवत्ता, निरंतर सप्लाई और ऊर्जा दक्षता पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा।
इसके अलावा, जिन कंपनियों के पास मजबूत तकनीक और सर्विस नेटवर्क है, उन्हें इस बदलाव का ज्यादा लाभ मिलेगा।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 2025-26 के बाद बजट और वास्तविक खर्च में बड़ा अंतर देखने को मिला है, जिससे यह साफ होता है कि योजना के क्रियान्वयन में कुछ चुनौतियां हैं और अब सरकार टिकाऊ और बेहतर सेवा देने पर ज्यादा जोर दे रही है।
गौरतलब है कि जल जीवन मिशन (जेजेएम) की शुरुआत अगस्त 2019 में हुई थी, जिसका उद्देश्य हर ग्रामीण घर तक नल से साफ पानी पहुंचाना है।
इस योजना के तहत अब तक नल कनेक्शन वाले घरों की संख्या लगभग 5 गुना बढ़कर 323.6 लाख से 1,582.3 लाख हो गई है और फरवरी 2026 तक ग्रामीण कवरेज 81 प्रतिशत से ज्यादा हो चुका है।
हालांकि, इतनी बड़ी उपलब्धि के बावजूद कई जगहों पर पानी की गुणवत्ता और सप्लाई में कमी देखने को मिली, जिसके चलते अब सरकार ने इसे बेहतर सेवा देने वाले मॉडल में बदलने का फैसला किया है।
जल जीवन मिशन 2.0 के तहत अब पानी की नियमित सप्लाई, गुणवत्ता की निगरानी और डिजिटल सिस्टम (जैसे सुजलम भारत प्लेटफॉर्म) के जरिए निगरानी पर खास जोर दिया जाएगा।
साथ ही, इस योजना में ग्राम पंचायतों और स्थानीय संस्थाओं की भूमिका को भी मजबूत किया जा रहा है, ताकि ग्रामीण जल आपूर्ति को एक स्थायी सार्वजनिक सेवा के रूप में विकसित किया जा सके, न कि केवल एक बार बनने वाला प्रोजेक्ट।
--आईएएनएस
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'युद्ध से पूरे विश्व में पैदा हुए गंभीर ऊर्जा संकट', मध्य पूर्व में चल रही जंग पर राज्यसभा में बोले PM मोदी
PM Modi on Middle Ease Situation: मध्य पूर्व में हालात बेहद तनावपूर्ण हैं. पीएम मोदी ने लोकसभा के बाद मंगलवार को राज्यसभा में भी मध्य पूर्व के हालातों पर अपनी बात रखी. पीएम मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और उससे बनी परिस्थितियों पर हम सभी परिचित हैं. पीएम मोदी ने कहा कि मैं आज संसद के उच्च सदन और देशवासियों के सामने इन विकट परिस्थितियों पर सरकार का पक्ष साझा करने के लिए उपस्थित हुआ हूं. पीएम मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे इस युद्ध को तीन सप्ताह से अधिक का समय हो चुका है, इस युद्ध ने पूरे विश्व में गंभीर ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है. भारत के लिए भी ये स्थिति चिंताजनक है.
पीएम मोदी ने कहा कि इस युद्ध से हमारे व्यापार के रास्ते प्रभावित हो रहे हैं, इससे पेट्रोल-डीजल, गैस और फर्टिलाइजर जैसे जरूरी सामान की रुटीन सप्लाई प्रभावित हो रही है. गल्फ देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं. वहीं काम करते हैं उनके जीवन और आजीविका की सुरक्षा भी भारत के लिए बहुत बड़ी चिंता है. होर्मुज स्ट्रेट में दुनिया के अनेक जहाज फंसे हैं उनमें बहुत बड़ी संख्या भारतीय क्रू मेंबर्स हैं ये भी भारत के लिए बड़ी चिंता का विषय है ऐसी विकट परिस्थिति में जरूरी है कि भारत की संसद के उच्च सदन से शांति और संवाद की एकजुट आवाज पूरे विश्व में जाए.
पीएम मोदी ने राज्यसभा में कहा कि, युद्ध की शुरुआत के बाद से मैंने पश्चिम एशिया के ज्यादातर राष्ट्रों के राष्ट्राध्यक्षों से मैंने कम से कम दो राउंड बातचीत की है. हम गल्फ के सभी देशों के साथ लगातार संपर्क में हैं हम ईरान, इजरायल और अमेरिका के साथ भी संपर्क में हैं. हमारा लक्ष्य डायलोग और डिप्लोमेसी के माध्यम से क्षेत्र में शांति बहाली का है. हमने डिएस्कलेशन और होर्मुज स्ट्रेट खोले जाने पर भी उनसे बात की है. कमर्शियल जहाजों पर हमला और होर्मुज स्ट्रेट जैसे जलमार्ग में रुकावट अस्वीकार्य है.
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