भारत आज सिर्फ एक देश नहीं बल्कि एक उभरती हुई वैश्विक शक्ति बन चुका है। चाहे बात अर्थव्यवस्था की हो, टेक्नोलॉजी की हो या फिर सैन्य ताकत की। भारत हर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। खासकर रक्षा क्षेत्र में भारत अब आत्मनिर्भरता और आधुनिकता की दिशा में बड़े कदम उठा रहा है। पिछले कुछ सालों में भारत ने अपनी सेना को आधुनिक बनाने के लिए कई बड़े फैसले लिए। स्वदेशी हथियारों से लेकर अत्याधुनिक विदेशी तकनीक तक हर दिशा में संतन बनाते हुए भारत अपनी रक्षा क्षमता को मजबूत कर रहा और अब भारत की वायु शक्ति को लेकर एक बहुत बड़ा अपडेट सामने आया। भारत सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए भारतीय वायुसेना यानी इंडियन एयरफोर्स को और अधिक ताकतवर बनाने के लिए कई बड़े डिफेंस डील की तैयारी शुरू कर दी है।
वित्त वर्ष साल 2026-27 में भारत सरकार कई बड़े रक्षा सौदों को अंतिम रूप देने जा रही है। इनमें सबसे प्रमुख है 114 नए राफेल फाइटर जेट 60 मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट यानी कि एमटीए और एडवांस वॉक्स सिस्टम। बता दें रक्षा मंत्रालय ने संसद की स्थाई समिति को जानकारी देते हुए बताया कि वायु सेना की कैपिटल बजट में 37.03% की भारी बढ़ोतरी की गई है। इसका मतलब साफ है कि भारत अब सिर्फ रक्षा नहीं बल्कि सुपर डिफेंस पावर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। बता दें सबसे बड़ी और सबसे चर्चित डील है 114 नए राफेल फाइटर जेट लड़ाकू विमानों की खरीद। यह डील लगभग 3.25 लाख करोड़ की हो सकती है जो भारत के इतिहास की सबसे बड़ी एयर डील्स में से एक होगी। इन विमानों को फ्रांस की कंपनी डिसॉल्ट एिएशन भारत में ही मैन्युफैक्चरिंग करेगी एक भारतीय पार्टनर के साथ मिलकर। इसका मतलब भारत में रोजगार बढ़ेगा। टेक्नोलॉजी ट्रांसफर होगा और मेक इन इंडिया को मजबूती मिलेगी। राफेल पहले ही भारतीय वायुसेना में अपनी ताकत साबित कर चुका है। इसकी स्पीड, स्ट्रेंथ और मल्टी रोल क्षमता इसे दुनिया के सबसे खतरनाक फाइटर जेट्स में शामिल करते हैं। दूसरा बड़ा प्लान 60 मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की खरीद। यह डील करीब 1 लाख करोड़ की हो सकती है। इन विमानों का उद्देश्य है पुराने एंटोनो एन32 विमान को रिप्लेस करना। खास बात यह है कि 12 विमान सीधे विदेश से आएंगे और 48 भारत में ही बनाए जाएंगे।
इस प्रोजेक्ट के लिए दुनिया की कई बड़ी कंपनियां रेस में हैं। जैसे कि एमर सी 390 मिलेनियम लॉकिड मार्टिन एयरb 400 एम एटलस अब फायदा क्या होगा? तेज सैनिक पहुंचेंगे और सामान परिवहन भी तेज होगा। आपातकालीन स्थितियों में तेजी आएगी। लॉजिस्टिक क्षमता में बड़ा सुधार आएगा। तीसरा बड़ा प्लान एडवांस एवोक्स यानी एयरबर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम की खरीद। यह सिस्टम युद्ध के दौरान आसमान की आंख की तरह काम करता है। ये दुश्मन के मिसाइल और विमानों को पहले ही ट्रैक करता है। रियल टाइम इंटेलिजेंस देता है। युद्ध के दौरान कमांड और कंट्रोल संभालता है। आज के आधुनिक युद्ध में अवार्क सिस्टम बेहद जरूरी हो चुके हैं। बता दें रक्षा मंत्रालय ने साफ ऐलान किया है कि इंडियन एयरफोर्स के 37.03% की बढ़ोतरी की गई है। इसका मतलब है भारत युद्ध के लिए नहीं तैयारी के लिए तैयार हो रहा है। टेक्नोलॉजी और मॉडर्नाइजेशन पर फोकस कर रहा है। खैर भारत अब सिर्फ अपनी सीमाओं की रक्षा नहीं कर रहा बल्कि भविष्य के युद्धों के लिए भी खुद को तैयार कर रहा। 114 राफेल, 60 एमटीए और एडवांस अवॉक सिस्टम यह सिर्फ डील्स नहीं है। यह भारत की नई सैन्य रणनीति का हिस्सा है। यह दिखाते हैं कि भारत अब रिएक्ट नहीं करता बल्कि प्रोएक्टिव होकर आगे बढ़ता है।
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मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में सेमीकंडक्टर नीति तैयार करने, कृत्रिम मेधा (एआई) उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने, 12,000 एमएसएमई को प्रशिक्षण देने और कई अन्य उपायों की घोषणा की।
विधानसभा में बजट पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में उनकी सरकार दिल्ली में सेमीकंडक्टर विनिर्माण, अनुसंधान और विकास का एक सशक्त परिवेश विकसित करना चाहती है।
उन्होंने कहा, “हम बेहतर बुनियादी ढांचा विकसित करने और सेमीकंडक्टर विनिर्माताओं को यहां इकाइयां स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करने को सेमीकंडक्टर नीति लाएंगे।”
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस उद्देश्य के लिए बजट में एक करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने ड्रोन नीति बनाने की भी घोषणा की, जिसके लिए निवेश आकर्षित करने और स्टार्टअप व विनिर्माण क्षेत्र को सहयोग देने को एक करोड़ रुपये का वित्तपोषण आवंटित किया गया है।
इसके अलावा, बजट में दो एआई केंद्र स्थापित करने के लिए 8.20 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो एआई अनुसंधान, नवाचार, स्टार्टअप इनक्यूबेशन और क्षमता निर्माण के लिए समर्पित केंद्र के रूप में काम करेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ये केंद्र शासन और स्वास्थ्य, शिक्षा, शहरी परिवहन तथा सार्वजनिक सेवा वितरण जैसे प्रमुख क्षेत्रों के लिए एआई आधारित समाधान विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
गुप्ता ने कहा कि लघु और मझोले उद्यमों (एसएमई) की प्रतिस्पर्धात्मकता और उत्पादकता बढ़ाने के लिए साझा सुविधा केंद्र के निर्माण को 48 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारा उद्देश्य बेहतर बुनियादी ढांचे और आधुनिक सुविधाएं प्रदान कर औद्योगिक क्षेत्रों की उत्पादकता बढ़ाना है।’’
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से दिल्ली सरकार पहली बार दिल्ली में रैंप (रेजिंग एंड एक्सेलरेटिंग एमएसएमई परफॉर्मेंस) योजना लागू कर रही है।
इस योजना के तहत 32,000 सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) को प्रशिक्षण दिया जाएगा और 15,000 व्यवसायों को सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) तथा ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) जैसे डिजिटल मंचों से जोड़ा जाएगा, जिससे उन्हें राष्ट्रीय और वैश्विक बाजारों तक पहुंच मिल सकेगी।
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