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नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव जीतने के बाद JDU को लेकर उठाया बड़ा कदम, जानें 19 मार्च को क्या करेंगे?

बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने के बाद नीतीश कुमार अब राज्यसभा पहुंच चुके हैं. हाल में हुए राज्यसभा चुनाव में नीतीश कुमार ने शानदार जीत दर्ज कर ली है.  उनकी इस नई पारी के साथ ही राज्य में सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं. हालांकि उनके राज्यसभा जाने से जेडीयू के कई नेता और समर्थक खुश नहीं हैं. इस बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे और अगर हां, तो अगला मुख्यमंत्री कौन होगा. यही नहीं इन अटकलों के बीच नीतीश कुमार ने बड़ा कदम उठाया है. 19 मार्च को लेकर जेडीयू को लेकर नीतीश कुमार कुछ करने जा रहे हैं. 

राज्यसभा पहुंचने के बाद बढ़ी सियासी हलचल

नीतीश कुमार ने खुद राज्यसभा जाने की इच्छा जताई थी और अब उनकी जीत के साथ यह तय हो गया है कि वे संसद के उच्च सदन में सक्रिय भूमिका निभाएंगे. हालांकि, उनके इस कदम के बाद बिहार की सत्ता को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं.

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अगर वे मुख्यमंत्री पद छोड़ते हैं, तो यह राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है. फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन अटकलों का दौर जारी है.

जेडीयू पर बनाए रखेंगे मजबूत पकड़

इन चर्चाओं के बीच एक बात साफ कर दी गई है कि नीतीश कुमार जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) पर अपनी पकड़ बनाए रखेंगे. वे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए फिर से नामांकन करने जा रहे हैं.

जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने स्पष्ट कहा है कि पार्टी का हर कार्यकर्ता चाहता है कि नीतीश कुमार ही राष्ट्रीय अध्यक्ष बने रहें. उनका मानना है कि नीतीश के नेतृत्व में पार्टी को मजबूती मिलती है और संगठन बेहतर तरीके से काम करता है.

19 मार्च को अध्यक्ष पद के लिए नामांकन

जानकारी के मुताबिक, नीतीश कुमार 19 मार्च को जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल करेंगे. जी हां जेडीयू में अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए नीतीश कुमार 19 मार्च को अध्यक्ष पद के लिए नामांकन भरेंगे. यह कदम इस बात का संकेत माना जा रहा है कि वे संगठन और राजनीति दोनों स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाते रहेंगे.

विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही वे मुख्यमंत्री पद से हटें या नहीं, लेकिन पार्टी पर उनका नियंत्रण बना रहेगा, जो आने वाले चुनावों में जेडीयू के लिए अहम साबित हो सकता है.

अगला मुख्यमंत्री कौन?

सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि अगर नीतीश कुमार इस्तीफा देते हैं, तो बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। इस पर अभी तक कोई स्पष्ट नाम सामने नहीं आया है, लेकिन कई नेताओं के नाम चर्चा में हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह फैसला एनडीए के अंदरूनी समीकरणों और नेतृत्व की रणनीति पर निर्भर करेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में इस पर बड़ा फैसला हो सकता है.

आगे की राजनीति पर नजर

नीतीश कुमार का राज्यसभा में जाना और साथ ही पार्टी नेतृत्व संभालना, यह दिखाता है कि वे अब राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी भूमिका बढ़ाना चाहते हैं. कुल मिलाकर, बिहार की राजनीति एक नए मोड़ पर खड़ी है। मुख्यमंत्री पद को लेकर फैसला और जेडीयू में नेतृत्व की स्थिति दोनों ही आने वाले समय में राज्य की दिशा तय करेंगे. 

यह भी पढ़ें - इस तारीख पर निशांत कुमार लेंगे डिप्टी सीएम पद की शपथ! जेडीयू विधायक ने किया खुलासा...

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ईरान की दमनकारी बासिज फोर्स के प्रमुख को आईडीएफ ने किया ढेर, शीर्ष अधिकारी लारिजानी पर भी निशाना

तेल अवीव, 17 मार्च (आईएएनएस)। इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष को लेकर इजरायली रक्षा बल (आईडीएफ) ने बड़ी सफलता हाथ लगने का दावा किया है। आईडीएफ ने दावा किया है कि ईरान में रात में हुए हमले में बासिज पैरामिलिट्री फोर्स के कमांडर घोलमरेजा सुलेमानी की मौत हो गई।

सुलेमानी को उस समय निशाना बनाया गया, जब वे हाल ही में बासिज द्वारा बनाए गए एक टेंट कैंप में थे। आईडीएफ के अनुसार, बासिज ने यह कैंप तब लगाया था, जब इजरायली सेना ने पैरामिलिट्री फोर्स के कई हेडक्वार्टर पर हमला किया था। इसके अलावा, आईडीएफ का कहना है कि हमले में बासिज के डिप्टी कमांडर और पैरामिलिट्री फोर्स के दूसरे बड़े अधिकारी भी मारे गए।

बासिज को सरकार के खिलाफ प्रदर्शनों को हिंसक तरीके से दबाने में अपनी भूमिका के लिए जाना जाता है और माना जाता है कि वह ईरानी नागरिकों की अनगिनत मौतों के लिए जिम्मेदार है।

आईडीएफ की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, बासिज पिछले छह सालों से बासिज यूनिट का कमांडर रहा है। उसने बासिज यूनिट का नेतृत्व किया और सरकार के दमन के मुख्य हथियार के तौर पर काम किया। उसने ईरान में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसक दमन में अहम भूमिका निभाई। वे ब्रिगेडियर जनरल के बराबर सर-टिप रैंक के कमांडर थे।

आईडीएफ ने इस बात की भी पुष्टि की है कि उसने रात में तेहरान में शीर्ष ईरानी अधिकारी अली लारिजानी को निशाना बनाया। हालांकि, इजरायली सेना ने फिलहाल इस बात की पुष्टि नहीं की है कि ईरान के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारिजानी की हमले में मौत हो गई या वे घायल हुए। इजरायली डिफेंस फोर्स ने कहा है कि फिलहाल इस बात की जांच की जा रही है।

इसके अलावा, हमास और हिज्बुल्लाह के खिलाफ जारी ऑपरेशन में आईडीएफ ने एक स्ट्राइक में फिलिस्तीन इस्लामिक जिहाद के नेता अकरम अल-अजौरी और आतंकी समूह के दूसरे शीर्ष अधिकारियों पर भी हमले किए। इजरायली रक्षा बल के मुताबिक, अल-अजौरी शायद स्ट्राइक में मारा गया, फिलहाल वह इसकी पुष्टि करने की कोशिश कर रहे हैं।

--आईएएनएस

केके/एबीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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