जिंदा हैं नेतन्याहू: PMO की तस्वीर ने अफवाहों पर लगाया ब्रेक, कहा- 'यहीं से दिया था ईरानी अधिकारी को मारने का आदेश'
Benjamin Netanyahu Latest Photo: इजरायल और ईरान के बीच जारी भीषण तनाव के बीच सोशल मीडिया पर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मौत की खबरें तेजी से वायरल हो रही थीं। अब इन अफवाहों पर विराम लगाने के लिए इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने एक महत्वपूर्ण तस्वीर साझा की है।
'यहीं से दिया था खात्मे का आदेश'
PMO द्वारा जारी की गई फोटो में नेतन्याहू फोन पर बात करते हुए दिखाई दे रहे हैं। तस्वीर के साथ कैप्शन में लिखा गया है, "प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ईरानी शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को खत्म करने का आदेश देते हुए।"
यह पोस्ट उन दावों के बीच आई है जिसमें कहा गया था कि रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी को एयरस्ट्राइक में ढेर कर दिया है।
Photo: Prime Minister Benjamin Netanyahu ordering the elimination of senior Iranian regime officials. pic.twitter.com/av6rIqNOFt
— Prime Minister of Israel (@IsraeliPM) March 17, 2026
मौत की अफवाहों और '6 उंगलियों' का सच
दरअसल, 28 फरवरी को ईरान पर हुए बड़े हमले के बाद से ही नेतन्याहू की सेहत और मौत को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं। सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी वायरल हुआ जिसे कुछ यूजर्स ने 'AI-जनरेटेड' बताया। दावा किया गया कि वीडियो में नेतन्याहू के हाथ में 6 उंगलियां दिख रही हैं, जो एक AI ग्लिच है।
सार्वजनिक रूप से नजर आए नेतन्याहू
इन अफवाहों को खारिज करने के लिए सोमवार को नेतन्याहू ने अपना एक वीडियो भी जारी किया था, जिसमें वे एक आउटडोर कैफे में आम लोगों के साथ बातचीत करते और रिलैक्स नजर आ रहे थे। PMO की नई तस्वीर ने अब यह साफ कर दिया है कि नेतन्याहू न केवल सुरक्षित हैं, बल्कि वे सैन्य अभियानों की कमान भी खुद संभाल रहे हैं।
שומרים על ההנחיות ומנצחים ביחד >> pic.twitter.com/HC5w3PqKuV
— Benjamin Netanyahu - בנימין נתניהו (@netanyahu) March 16, 2026
गर्मियों की छुट्टी में लगेगा झटका: फ्लाइट टिकट की कीमतें छू सकती आसमान, कंपनियों ने दे दिए संकेत
High Air Fare this Summer: गर्मी की छुट्टियों में अगर आप फ्लाइट से यात्रा करने की सोच रहे हैं,तो जेब ढीली करने के लिए तैयार हो जाइए। इस बार हवाई टिकट पहले से कहीं ज्यादा महंगे हो सकते हैं। वजह है-कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें,ईरान युद्ध का असर और एयरस्पेस में लग रही पाबंदियां।
एविएशन सेक्टर इस वक्त दबाव में है। कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं,जो कुछ समय पहले 70-72 डॉलर के आसपास थीं। इसका सीधा असर एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर पड़ता है,जो एयरलाइंस के कुल खर्च का 30-40% तक होता है। ऐसे में कंपनियां अब यह बढ़ा हुआ खर्च सीधे यात्रियों से वसूलने लगी।
फ्यूल सरचार्ज लगा रहीं कंपनियां
भारतीय एयरलाइंस ने इसकी शुरुआत भी कर दी है। इंडिगो ने 14 मार्च से फ्यूल चार्ज लागू कर दिया है। वहीं एयर इंडिया ने भी चरणबद्ध तरीके से फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने का ऐलान किया है। घरेलू और सार्क रूट्स पर यह 399 रुपये से शुरू होकर लंबी दूरी की फ्लाइट्स के लिए 200 डॉलर तक जा सकता है। अकासा एयर ने भी 199 से 1300 रुपये तक का सरचार्ज लागू किया है।
एयरस्पेस पाबंदियों से भी बढ़ेगा किराया
मामला सिर्फ ईंधन तक सीमित नहीं है। एयरस्पेस पाबंदियों ने भी एयरलाइंस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। भारत से उड़ान भरने वाली फ्लाइट्स पाकिस्तान के एयरस्पेस का इस्तेमाल नहीं कर पा रहीं और पश्चिम एशिया में भी कई रूट्स प्रभावित हैं। इसका मतलब है कि अब फ्लाइट्स को लंबा रास्ता लेना पड़ रहा है। उदाहरण के तौर पर मुंबई से लंदन की फ्लाइट, जो पहले कम समय लेती थी, अब करीब 10.5 घंटे तक पहुंच रही है। इससे ईंधन की खपत बढ़ रही है और लागत भी।
इसका सीधा असर कनेक्टिविटी पर भी पड़ा है। भारत से यूरोप,अफ्रीका और नॉर्थ अमेरिका जाने वाले करीब 40% यात्री दुबई, दोहा और अबू धाबी जैसे हब के जरिए यात्रा करते हैं। लेकिन मौजूदा हालात में इन रूट्स पर सीटों की कमी हो गई है, जिससे किराए और बढ़ गए हैं। खासकर मैड्रिड और बार्सिलोना जैसे शहरों के लिए, जहां डायरेक्ट फ्लाइट नहीं है, यात्रियों को ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है।
यूरोप जाना भी महंगा हो सकता
आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर ईरान युद्ध गर्मियों तक जारी रहा, तो यूरोप की एयरलाइंस भी किराए बढ़ा सकती हैं। ऐसे में यात्रियों का रुख सिंगापुर, हांगकांग या फ्रैंकफर्ट जैसे वैकल्पिक हब की ओर हो सकता है। वहीं कोलंबो और थाईलैंड जैसे डेस्टिनेशन की डिमांड बढ़ने की संभावना है।
हालांकि, बढ़ते किरायों के बावजूद भारतीय एयरलाइंस को ज्यादा फायदा नहीं मिलने वाला। वजह यह है कि उनके पास लंबी दूरी की फ्लाइट्स के लिए सीमित संसाधन हैं और एयरस्पेस पाबंदियां भी ऑपरेशन को प्रभावित कर रही हैं। फिलहाल साफ है कि अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और जियोपॉलिटिकल तनाव जारी रहता है, तो यात्रियों को इस गर्मी महंगी और थोड़ी मुश्किल यात्रा के लिए तैयार रहना होगा।
(प्रियंका कुमारी)
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