देवदास से पद्मावत तक, इन फिल्मों से Sanjay Leela Bhansali बने भारतीय सिनेमा में ट्रैजेडी के मास्टर
Sanjay Leela Bhansali Movies: भारतीय सिनेमा में बहुत कम फिल्मकार ऐसे हैं जिन्होंने दर्द, प्रेम और ट्रैजेडी को उतनी आर्टिस्ट्री और सेंसिटिविटी के साथ पर्दे पर उतारा है जितना संजय लीला भंसाली ने किया है. जी हां, भव्य सेट, शानदार सिनेमैटोग्राफी, दिल को छू लेने वाला संगीत और गहरी भावनाओं से भरी कहानियां, ये सभी उनकी फिल्मों को एक अलग पहचान देते हैं. भंसाली की फिल्मों में अक्सर प्रेम बेहद गहरा होता है, किस्मत निर्दयी होती है और लास्ट में त्याग या बलिदान लगभग तय होता है.
उनका सिनेमा सिर्फ दुख या त्रासदी की कहानी नहीं कहता, बल्कि हर फ्रेम में कविता, सौंदर्य और भावनाओं का ऐसा मेल दिखाई देता है जो दर्शकों को लंबे समय तक प्रभावित करता है. यही वजह है कि उनकी फिल्मों को सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक भावनात्मक और कलात्मक अनुभव माना जाता है.
स्पेसिफिक स्टाइल में किया पेश
भंसाली ने बार-बार ये साबित किया है कि ट्रैजेडी भी बेहद खूबसूरत और प्रभावशाली हो सकती है. अधूरी प्रेम कहानियां, सामाजिक बंधनों से संघर्ष, व्यक्तिगत बलिदान और भावनात्मक टकराव- इन सभी विषयों को उन्होंने अपनी स्पेसिफिक स्टाइल में पेश किया है. उनकी कहानियां दर्शकों को ऐसी दुनिया में ले जाती हैं जहां सुंदरता और दर्द एक साथ चलते हैं. तो ऐसे में आइए नजर डालते हैं उनकी सात ऐसी फिल्मों पर, जिन्होंने यह साबित किया कि संजय लीला भंसाली को भारतीय सिनेमा में ट्रैजेडी का मास्टर क्यों कहा जाता है.
1. देवदास (2002)
अगर कोई एक फिल्म है जिसने भंसाली को ट्रैजेडी का उस्ताद साबित किया, तो वह “देवदास” है. शरत चंद्र चट्टोपाध्याय के फेमस नावेल पर आधारित यह फिल्म एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जो अपने अहंकार, सामाजिक दबाव और भावनात्मक कमजोरियों से बाहर नहीं निकल पाता. देवदास और पारो का प्रेम अधूरी मुलाकातों, गलतफहमियों और समाज की कठोर परंपराओं के बीच पनपता है. देवदास का धीरे-धीरे आत्मविनाश की ओर बढ़ना और उसकी टूटती हुई जिंदगी इस फिल्म को भारतीय सिनेमा की सबसे यादगार और दुखद प्रेम कहानियों में शामिल कर देता है. भव्य सेट, संगीत और भावनात्मक अभिनय ने इसे एक क्लासिक बना दिया.
2. हम दिल दे चुके सनम (1999)
पहली नजर में “हम दिल दे चुके सनम” एक रंगीन और रोमांटिक प्रेम कहानी लगती है, लेकिन धीरे-धीरे यह फिल्म प्रेम, त्याग और भावनात्मक परिपक्वता की गहरी कहानी बन जाती है. नंदिनी का सफर एक जुनूनी प्रेम से शुरू होता है, लेकिन शादी के बाद वह रिश्तों की जिम्मेदारी और भावनात्मक गहराई को समझती है. फिल्म का अंत पारंपरिक दुखद क्लाइमेक्स से अलग है, यह एक शांत लेकिन गहरी ट्रैजेडी को दर्शाता है, जहां कभी-कभी सच्चा प्रेम भी कर्तव्य के आगे झुक जाता है.
3. ब्लैक (2005)
“ब्लैक” में भंसाली ने ट्रैजेडी को इंसानी संघर्ष और उम्मीद के साथ जोड़ा है. यह फिल्म मिशेल नाम की एक ऐसी लड़की की कहानी है जो बचपन से ही देखने और सुनने की क्षमता से वंचित है. उसके शिक्षक उसे भाषा, अभिव्यक्ति और आत्मविश्वास सिखाते हैं. यह फिल्म सिर्फ एक लड़की के संघर्ष की कहानी नहीं है, बल्कि यह इंसानी हिम्मत, धैर्य और समय के साथ बदलती जिंदगी का भावनात्मक चित्रण है. भंसाली की संवेदनशील कहानी और गहरी भावनाओं ने इसे उनके करियर की सबसे प्रभावशाली फिल्मों में शामिल कर दिया.
4. गोलियों की रासलीला राम-लीला (2013)
शेक्सपियर की मशहूर प्रेम कहानी “रोमियो और जूलियट” से प्रेरित “राम-लीला” भंसाली की सबसे रंगीन लेकिन दुखद प्रेम कहानियों में से एक है. फिल्म में रंग, संगीत और उत्सव का भरपूर इस्तेमाल किया गया है, लेकिन इसकी मूल कहानी एक त्रासदी है. राम और लीला का प्रेम दो दुश्मन परिवारों के बीच पनपता है. नफरत और हिंसा से भरी दुनिया में उनका प्यार आखिरकार एक दर्दनाक और यादगार अंत तक पहुंचता है.
5. बाजीराव मस्तानी (2015)
“बाजीराव मस्तानी” में भंसाली ने मराठा पेशवा बाजीराव प्रथम और मस्तानी की प्रेम कहानी को भव्य हिस्टोरिकल बैकग्राउंड में पेश किया. उनका प्रेम समाज, राजनीति और परंपराओं के विरोध से घिर जाता है. बाजीराव की पहली पत्नी काशीबाई का मौन दर्द और मस्तानी का अटूट प्रेम इस कहानी को और भी भावनात्मक बना देता है. भव्य युद्ध दृश्य, शानदार संगीत और गहरी भावनाएं इसे भंसाली की सबसे यादगार फिल्मों में शामिल करते हैं.
6. पद्मावत (2018)
“पद्मावत” में भंसाली ने ट्रैजेडी को एक विशाल ऐतिहासिक स्तर पर प्रस्तुत किया. यह फिल्म रानी पद्मावती और दिल्ली सल्तनत के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी के संघर्ष को दिखाती है. फिल्म का क्लाइमेक्स जौहर का वो दृश्य है जो सम्मान, बलिदान और अत्याचार के खिलाफ प्रतिरोध का प्रतीक बन जाता है. भंसाली ने इस कहानी को भव्य सेट, शानदार संरचना और शक्तिशाली भावनाओं के साथ प्रस्तुत किया.
7. गंगूबाई काठियावाड़ी (2022)
हालांकि “गंगूबाई काठियावाड़ी” अंत में साहस और शक्ति की कहानी बन जाती है, लेकिन इसकी शुरुआत बेहद दर्दनाक ट्रैजेडी से होती है. गंगूबाई की जिंदगी तब बदल जाती है जब उसे धोखे से मुंबई के रेड-लाइट एरिया में बेच दिया जाता है. लेकिन वहीं से वह धीरे-धीरे अपने अधिकारों और सम्मान के लिए लड़ने वाली एक मजबूत महिला के रूप में उभरती है. उसका दर्द भरा अतीत ही उसकी ताकत की नींव बनता है.
भंसाली की सिनेमाई विरासत
संजय लीला भंसाली को अक्सर राज कपूर, के. आसिफ और गुरु दत्त जैसे महान फिल्मकारों की परंपरा में देखा जाता है. उन्होंने भारतीय कहानियों को भव्यता, संगीत और भावनात्मक गहराई के साथ प्रस्तुत करते हुए भारतीय सिनेमा को वैश्विक स्तर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है. आज भंसाली को एक जीवित दिग्गज के रूप में देखा जाता है. उनकी फिल्में सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर सफलता तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि वो दर्शकों के दिलों और भारतीय सिनेमा के इतिहास में अपनी खास जगह बना लेती हैं.
आने वाले समय में उनकी अगली फिल्म “लव एंड वॉर” से भी काफी उम्मीदें हैं. माना जा रहा है कि यह फिल्म उनके शानदार करियर का एक और भव्य और महत्वाकांक्षी अध्याय साबित हो सकती है. भंसाली की फिल्मों का जादू यही है कि वो दर्शकों को सिर्फ कहानी नहीं सुनाते, बल्कि उन्हें भावनाओं, संगीत और दृश्य सौंदर्य से भरी एक ऐसी दुनिया में ले जाते हैं जहां हर खुशी के पीछे एक दर्द छिपा होता है और यही दर्द उनके सिनेमा को यादगार बनाता है.
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तनाव और चिंता को कहें अलविदा, नियमित त्रिकोणासन से पाएं हेल्दी लाइफस्टाइल
नई दिल्ली, 14 मार्च (आईएएनएस)। आज के समय में सेहतमंद और अच्छे शरीर की चाह हर कोई रखता है, लेकिन व्यस्त दिनचर्या के चलते ऐसा होना कई बार लोगों के लिए मुश्किल हो जाता है। त्रिकोणासन एक ऐसा योगासन है जिसे कम समय में किया जा सकता है और जिसको करने से कई सारे लाभ भी मिलते हैं।
इस योगासन को नियमित करने से मांसपेशियां लचीली और रक्त संचार बेहतर होता है। रोजाना अभ्यास करने से शरीर को दाएं और बाएं तरफ स्ट्रेच करने की आवश्यकता होती है, जिससे पीठ, हाथों और पैरों की मांसपेशियों की सक्रियता बढ़ती है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह एक ऐसा योगासन है जो शरीर को लचीला, संतुलित और शक्तिशाली बनाता है। साथ ही, यह पाचन को बेहतर बनाता है और कमर व जांघों की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है।
इसे करने के लिए योगा मैट पर दोनों पैरों को 3 से 4 फीट की दूरी पर फैलाएं। दाएं पैर को 90 डिग्री बाहर की ओर घुमाएं और बाएं पैर को थोड़ा अंदर की ओर मोड़ें। अब दोनों हाथों के कंधों को सीधे फैलाएं और अपनी हथेलियों को नीचे की ओर रखें। धीरे-धीरे दायीं ओर झुकें और दाहिने हाथ से दाएं पैर या टखने को छूने का प्रयास करें। बायां हाथ सीधा ऊपर की ओर रखें। इस स्थिति में 20 से 30 सेकंड तक रहें। सांस सामान्य रखें। फिर धीरे से ताड़ासन में वापस आएं। इसी प्रक्रिया को बाईं ओर दोहराएं।
इसे करते समय हाथ, पैर और रीढ़ एक त्रिकोण बनाते हैं और यह तनाव कम करने में भी मददगार है, लेकिन स्लिप डिस्क या साइटिका जैसी स्थितियों में सावधानी बरतनी चाहिए।
त्रिकोणासन एक ऐसी अभ्यास क्रिया है जिसके नियमित अभ्यास से वजन नियंत्रित होता है। साथ ही, तनाव और चिंता भी कम होती है। यह साथ ही संतुलन और एकाग्रता में भी वृद्धि करता है।
त्रिकोणासन के नियमित अभ्यास से शरीर की एनर्जी बढ़ती है, हालांकि इसके अभ्यास में कई सावधानी भी बरतने की सलाह दी जाती है।
--आईएएनएस
एनएस/वीसी
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