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होली के बाद त्वचा की सिर्फ बाहरी नहीं, आतंरिक देखभाल भी जरूरी, प्राकृतिक नुस्खे देंगे प्रभावी परिणाम

नई दिल्ली, 2 मार्च (आईएएनएस)। होली रंगों और खुशियों का त्योहार है, लेकिन सावधानी न बरतने पर यह आपकी त्वचा के लिए नुकसानदेह भी हो सकता है। अक्सर रंगों में मौजूद केमिकल त्वचा की प्राकृतिक नमी छीन लेते हैं, जिससे स्किन रूखी हो जाती है या छिलने लगती है। जिनकी त्वचा संवेदनशील (सेंसिटिव) है, उन्हें लाल चकत्तों और एलर्जी का खतरा अधिक रहता है। इसलिए यह जरूरी है कि आप होली खेलते समय और उसके बाद भी अपनी त्वचा की सुरक्षा का पूरा ख्याल रखें।

आयुर्वेद में त्वचा को त्वक कहा जाता है, जो शरीर के लिए सिर्फ बाहरी आवरण नहीं, बल्कि पूरे शरीर का आईना है, जो शरीर को सुरक्षा प्रदान करने का भी काम करती है। होली के रंगों के लेपन के बाद स्किन को स्नेहन और शोधन की आवश्यकता पड़ती है। इसके लिए आयुर्वेद में कई तरीके बताए गए हैं, जिन्हें आसानी से घर पर ही किया जा सकता है।

होली का रंग निकालने के लिए चेहरे पर किसी तरह का साबुन या फेसवॉश न लगाएं। साबुन और फेसवॉश में पहले से केमिकल होते हैं और रंगों के साथ मिलकर वे दोगुनी प्रतिक्रिया करते हैं। ऐसे में साधे पानी से चेहरे को धोएं और शोधन और शुद्धिकरण के लिए मक्के का आटा या फिर दरदरे चावल के आटे से चेहरे को हल्के हाथ से रगड़ें। यह न सिर्फ चेहरे को साफ करने का काम करेगा, बल्कि गंदगी को चेहरे से निकालने में मदद करेगा।

इसके बाद चेहरे पर मुल्तानी मिट्टी और दही को मिलाकर लेप लगाएं। अक्सर रंगों को हटाने के लिए खुजली या लाल चकत्ते निकल आते हैं। ऐसे में मुल्तानी मिट्टी और दही का लेप चेहरे की जलन को साफ करेगा और चेहरे की रंगत को भी निखारने में मदद करेगा। मुल्तानी मिट्टी और दही के बाद त्वचा पर ताजा एलोवेरा जल का लेपन करें। यह त्वचा को मुलायम रखने के साथ-साथ आराम देने का भी काम करेगा।

त्वचा की देखभाल के लिए सिर्फ बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक देखभाल भी जरूरी है। ऐसे में पूरे शरीर को आराम देने के लिए रात के समय हल्का गुनगुना दूध पीए। होली के दिन ज्यादा तला-भुना खाने से भी परहेज करें।

--आईएएनएस

पीएस/एएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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Iran War: ईरान में कैसे चुना जाता है नया सुप्रीम लीडर, जानें सिलेक्शन की पूरी प्रोसेस

Iran War: ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की हत्या हो गई है. अमेरिका-इस्राइल के संयुक्त हमले के वजह से ईरान में राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है. ईरान की राजधानी तेहरान में शनिवार तड़के खामेनेई के हाई सिक्योरिटी जोन वाले आवास पर हमला हुआ, जिसमें उनके परिवार के कई सदस्यों की मौत हो गई थी. स्वास्थ्य अधिकारियों की मानें तो तेहरान सहित देश के विभिन्न शहरों में हुए हमलों में 200 से अधिक लोगों की मौत हो गई है.  

अब जानें कैसे चुनाव जाता है सर्वोच्च नेता

खामेनेई की मौत के बाद अब ईरान में नए सर्वोच्च नेता के चयन की संवैधानिक प्रक्रिया शुरू हो गई है. Supreme Leader को चुनने की प्रक्रिया पूर्ण रूप से धार्मिक और संवैधानिक ढांचों पर आधारित है. खामेनेई के निधन के बाद, असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ही नए नेता के चयन के लिए जिम्मेदार है.

असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स 88 शिया धर्मगुरुओं की एक परिषद है. परिषद के सदस्यों को हर आठ साल में जनता द्वारा सीधे मतदान से चुना जाता है. परिषद का चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की योग्यता की जांच सबसे पहले 'गार्डियन काउंसिल' करती है. 

ईरान में जब भी सर्वोच्च नेता का पद खाली होता है (मृत्यु या इस्तीफे के कारण) तो असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स तुरंत एक सत्र बुलाती है. परिषद के सदस्य संभावित उम्मीदवारों की धार्मिक विद्वता, प्रशासनिक क्षमता और राजनीतिक समझ पर चर्चा करते हैं. चर्चा के बाद, एक गुप्त मतदान होता है. ईरान का नया सर्वोच्च नेता बनने के लिए उम्मीदवार को उपस्थित सदस्यों के साधारण बहुमत (Simple Majority) की आवश्यकता होती है.

कौन संभालता है अंतरिम जिम्मेदारी

नया सुप्रीम लीडर चुने जाने तक देश का कार्यभार एक अस्थाई नेतृत्व परिषद (Provisional Leadership Council) संभालती है. परिषद में राष्ट्रपति, न्यायपालिका के प्रमुख और गार्डियन काउंसिल के एक धर्मगुरु शामिल होते हैं. वर्तमान में खामेनेई के बेटे अयातुल्ला अलीरेजा अराफी को अंतरिम जिम्मेदारी सौंपी गई है.

उम्मीदवार की योग्यता 

ईरानी संविधान (अनुच्छेद 109) के अनुसार, सर्वोच्च नेता बनने के लिए व्यक्ति में ये गुण होने चाहिए. 

  • उम्मीदवार इस्लामी न्यायशास्त्र (Jurisprudence) का उच्च स्तर का विद्वान होना चाहिए.
  • उम्मीदवार न्यायप्रिय, धर्मपरायण और विश्वसनीय होना चाहिए.
  • उम्मीदवार में पर्याप्त राजनीतिक और सामाजिक दूरदर्शिता, साहस और प्रशासनिक क्षमता होनी चाहिए.

 

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कॉन्सटेबल के बेटे की कहानी रुला देगी, कभी बैट तोड़ा तो कभी टूटे सपने, दिल्ली से खेला अंडर-13, फिर क्यों जाना पड़ा केरल

संजू सैमसन ने बहुत कम उम्र में प्रतिभा के संकेत दे दिए थे. दिल्ली की अंडर-13 टीम में जगह बनाई. जब पिता को बेटे में भविष्य दिखा, उन्होंने नौकरी से वीआरएस लिया और परिवार केरल लौट गया. वहीं से सफर ने नई दिशा पकड़ी. 2011 में केरल के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण. 17 साल की उम्र में आईपीएल. 2013 में राजस्थान रॉयल्स के साथ डेब्यू और उसी सीज़न ‘बेस्ट यंग प्लेयर ऑफ द सीज़न’ का खिताब. Mon, 2 Mar 2026 13:51:04 +0530

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