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Kishore Kumar की पुण्यतिथि आज, जानें 13 अक्टूबर का ऐतिहासिक महत्व

रुपहले पर्दे पर चमकने वाले सितारों की बात करें, तो इनमें किशोर कुमार की पहचान सबसे चमकदार सितारों में से एक के तौर पर होती है। शानदार अभिनेता, सुरीले गायक, उम्दा निर्माता-निर्देशक, कुशल पटकथा लेखक और बेहतरीन संगीतकार के तौर पर किशोर को एक संपूर्ण कलाकार कहा जा सकता है। चाहे दर्द भरे गीत हों या रूमानियत से भरे प्रेमगीत, हुल्लड़ वाले जोशीले नगमे हों या संजीदा गाने, उनकी आवाज ने हर तरह के गीतों को यादगार बना दिया।

उन्होंने हिंदी के अलावा और भी बहुत सी भाषाओं में गीत गाए। उनके अभिनय और निर्देशन को भी काफी सराहना मिली। हास्य अभिनय में किशोर कुमार अनूठे और बेजोड़ थे।

इस महान कलाकार ने 13 अक्टूबर 1987 को इस दुनिया को अलविदा कहा था। देश-दुनिया के इतिहास में 13 अक्टूबर की तारीख में दर्ज महत्वपूर्ण घटनाओं का सिलसिलेवार ब्योरा इस प्रकार है:- 1792 : व्हाइट हाउस की नींव रखी गई। निर्माण पूरा होने के बाद यह इमारत एक नवंबर 1800 से अमेरिका के राष्ट्रपति का आधिकारिक आवास है।

1911 : स्वामी विवेकानंद की शिष्या मार्गेरेट एलिजाबेथ नोबेल का मात्र 43 वर्ष की आयु में निधन। उन्हें उनके गुरु ने सिस्टर निवेदिता का नाम दिया था। उन्होंने भारत में स्वामी विवेकानंद के विचारों के प्रसार के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था।

1943 : इटली ने जर्मनी के खिलाफ युद्ध की घोषणा की। 1976 : बोलिविया के दक्षिण में एक ‘बोइंग 707’ के दुर्घटनाग्रस्त होकर रिहाइशी इलाके में गिरने से कई लोगों की मौत। 1987: रुपहले पर्दे के सबसे चमकदार सितारों में शुमार किशोर कुमार का निधन।

1999 : अटल बिहारी वाजपेयी तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने। 2010 : चिली के अटाकामा रेगिस्तान में धंसी खान में फंसे 69 श्रमिकों को काफी मशक्कत के बाद सकुशल बाहर निकाला गया। 2013 : मध्यप्रदेश के दतिया जिले में एक पुल पर भगदड़ मचने से 109 लोगों की मौत।

2016 : अमेरिका के गायक एवं गीतकर बॉब डिलन को साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार दिया गया। 2022: सीरिया में सैन्य बस में बम विस्फोट के बाद 18 सैनिकों की मौत हुई जबकि 27 अन्य घायल हुए। 2025: हमास ने सभी जीवित बंधकों को मुक्त किया, इजराइल ने गाजा समझौते के तहत कैदियों को रिहा किया।

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Delhi में विरोध प्रदर्शन के लिए Ramlila Maidan की बुकिंग हुई महंगी, साल के अंत तक बची सिर्फ तीन तारीखें

(वरूण भंडारी) नयी दिल्ली, 12 अक्टूबर दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन के लिए तय किये गए तीन नये स्थानों में से एक, रामलीला मैदान में प्रदर्शन करना दूर की कौड़ी और खर्चीला साबित हो सकता है, क्योंकि अगले ढाई महीने तक यह जगह उपलब्ध नहीं है और उसके बाद बुकिंग के लिए एक लाख रुपये से ज्यादा अदा करना पड़ सकता है। अधिकारियों ने बताया कि 12 एकड़ में फैले इस मैदान को, जिसमें 50,000 लोग एकत्र हो सकते हैं, अब इस साल सिर्फ 29, 30 और 31 दिसंबर के लिए ही बुक किया जा सकता है। एक अधिकारी ने बताया, ‘‘मैदान की बुकिंग की दर 50,000 रुपये प्रति दिन है, साथ ही 55,000 रुपये की जमानत राशि भी देनी होती है जो बाद में वापस मिल जाती है।

कर सहित एक दिन की बुकिंग का शुरुआती खर्च 1.21 लाख रुपये आता है।’’ नगर निकाय के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मैदान का एक छोटा सा हिस्सा विरोध-प्रदर्शन और सभाओं के लिए निशुल्क उपलब्ध है, लेकिन वहां सिर्फ 150 लोग ही एकत्र हो सकते हैं। इस मैदान को दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के बागवानी विभाग के जरिए बुक किया जाता है, जो इसकी मंजूरी देता है। नगर निकाय द्वारा आवेदन को मंजूरी देने से पहले दिल्ली पुलिस से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेना जरूरी है।

दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार के 11 अक्टूबर के स्थायी आदेश के तहत जंतर-मंतर पर अब प्रदर्शन नहीं किया जा सकेगा। वहीं, रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली स्थित सीबीडी (सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट) मैदान विरोध-प्रदर्शन के लिए नये स्थान होंगे। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, किसी संगठन या निवासियों के समूह को प्रदर्शन करने के लिए रामलीला मैदान में बहुत अधिक प्रवेश शुल्क देना पड़ता है।

जंतर-मंतर पर ऐसा कोई शुल्क नहीं देना पड़ता था। एक अधिकारी ने कहा, ‘‘अगर बिना किसी शुल्क के वहां प्रदर्शन करने दिया जाता है, तो नगर निकाय को हर दिन कम से कम 50,000 रुपये या उससे अधिक का नुकसान होगा।’’ एमसीडी के अधिकारियों ने यह भी बताया कि आगामी कुछ हफ़्तों में दशहरा और दिवाली जैसे बड़े त्योहार आने वाले हैं, इसलिए रामलीला मैदान को कई तरह के कार्यक्रमों और उत्सवों के लिए पहले ही बुक किया जा चुका है। अधिकारियों के अनुसार, यह मैदान एक व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्र में स्थित है, जिसके आस-पास तीन अस्पताल और नगर निकायों के मुख्यालय हैं।

ब्रिटिश शासन काल में, यह अजमेरी गेट से आगे तक फैला हुआ था, और वर्तमान कमला मार्केट इसी क्षेत्र का हिस्सा हुआ करता था। अधिकारियों के अनुसार, 1930 तक यह मैदान एक तालाब हुआ करता था, जिसे भरकर समतल कर दिया गया ताकि वहां रामलीला का मंचन किया जा सके। यह परंपरा 1932 में शुरू हुई और आज भी जारी है, जिससे इस मैदान को इसका यह नाम मिला।

आजादी के बाद, 1951 में, पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को आजीविका उपलब्ध कराने के लिए इस इलाके का विकास किया गया। यह मैदान दशकों की अपनी यात्रा में, देश की राजनीति का मंच बन गया। 1952 में, भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जम्मू कश्मीर के भारत में एकीकरण की मांग को लेकर अपना सत्याग्रह शुरू किया था।

प्रधानमंत्री के तौर पर जवाहरलाल नेहरू ने 1956 और 1957 में रामलीला मैदान में विशाल जनसभाओं को संबोधित किया। वहीं, 1962 में भारत की यात्रा पर आईं महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के सम्मान में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के लिए वहां एक स्थायी मंच बनाया गया था। वर्ष 1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर मिली जीत के बाद इंदिरा गांधी ने यहां एक रैली को संबोधित किया था और 26 नवंबर 1974 को तत्कालीन सोवियत संघ के नेता लियोनिद ब्रेझनेव के सम्मान में एक जनसभा आयोजित की गई थी।

इसके कुछ साल बाद, 25 जून 1975 को, जिस दिन आपातकाल की घोषणा की गई थी, जयप्रकाश नारायण और अटल बिहारी वाजपेयी ने इसी मैदान में एक रैली को संबोधित किया था। अरविंद केजरीवाल ने 2013 में इसी जगह मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।

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  Sports

IND vs WI: तिलक वर्मा के ‘घर’ में मनेगी बर्थडे पार्टी! गौतम गंभीर को गिफ्ट में T20 सीरीज देने उतरेगी टीम इंडिया

गौतम गंभीर का बर्थडे है और साथ में भारत-वेस्टइंडीज के बीच चौथा T20I मैच भी. मुकाबला हैदराबाद में है, जो कि तिलक वर्मा का घर है. अब तिलक के घर में गंभीर का बर्थडे कैसा होगा, ये टीम इंडिया तय करेगी. Wed, 14 Oct 2026 10:28:07 +0530

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