फिजिकल हेल्थ- दुनिया भर में बढ़ रहे ‘गाउट’ के केस:पुरुषों को रिस्क ज्यादा, डॉक्टर से जानें इस बीमारी को कैसे पहचानें, कैसे बचें
पहले के समय में गाउट को ‘राजाओं की बीमारी’ कहा जाता था, क्योंकि इसे अमीर लोगों की डाइट और शराब पीने से जुड़ी बीमारी माना जाता था। हालांकि मेडिकल साइंस के मुताबिक, गाउट सिर्फ खानपान से होने वाली बीमारी नहीं है। यह एक तरह का इंफ्लेमेटरी अर्थराइटिस है, जिसमें ब्लड में यूरिक एसिड का लेवल बढ़ने पर उसके क्रिस्टल जोड़ों में जमा हो जाते हैं। इससे अचानक तेज दर्द के साथ गाउट का अटैक हो सकता है। ‘द लैंसेट रेह्यूमेटोलॉजी’ में पब्लिश ‘ग्लोबल बर्डन डिजीज 2021’ के मुताबिक, साल 2020 में दुनिया में 5.58 करोड़ लोग गाउट से प्रभावित थे। 1990 के मुकाबले मामलों की संख्या 150.6% बढ़ी है। 2050 तक दुनिया में गाउट के मामलों की संख्या 9.58 करोड़ पहुंचने का अनुमान है। इसलिए आज ‘फिजिकल हेल्थ’ में गाउट के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. मुजाहिद सलीम, सीनियर कंसल्टेंट, ऑर्थोपेडिक एंड जॉइंट रिप्लेसमेंट, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, जयपुर सवाल- गाउट क्या है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- गाउट और सामान्य गठिया में क्या अंतर है? जवाब- गाउट और गठिया दोनों में जोड़ों में दर्द हो सकता है। लेकिन दोनों की वजह और दर्द का पैटर्न अलग होता है। ग्राफिक में इनके बीच का अंतर देखिए- सवाल- गाउट क्यों होता है? जवाब- इसकी मूल वजह शरीर में यूरिक एसिड का संतुलन बिगड़ना है। ऐसा दो कारणों से हो सकता है। शरीर जरूरत से ज्यादा यूरिक एसिड बनाने लगे या किडनी उसे पर्याप्त मात्रा में बाहर न निकाल पाए। ग्राफिक में गाउट के सभी कारण देखिए- सवाल- जिसका भी यूरिक एसिड बढ़ा हुआ है, क्या उसे गाउट होता ही है? जवाब- नहीं, जिसका यूरिक एसिड बढ़ा हुआ है, उसे गाउट हो ही जाए, यह जरूरी नहीं है। कई लोगों का यूरिक एसिड सालों तक सामान्य से ज्यादा रह सकता है। लेकिन उनमें कभी गाउट के लक्षण नहीं दिखते। इसे ‘असिम्प्टोमैटिक हाइपरयूरिसीमिया’ कहते हैं। सवाल- यूरिक एसिड क्या है, इसका शरीर में क्या काम है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- बढ़े हुए यूरिक एसिड लेवल से गाउट कैसे होता है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- क्या गाउट एक गंभीर बीमारी है? जवाब- हां, लंबे समय तक यूरिक एसिड का स्तर बढ़ा रहने पर जोड़ों में स्थायी नुकसान, गांठें (टोफी) और किडनी से जुड़े कॉप्लिकेशंस हो सकते हैं। सवाल- गाउट के शुरुआती लक्षण क्या हैं? जवाब- गाउट का शुरुआती अटैक अक्सर अचानक शुरू होता है और ज्यादातर रात में दिखाई देता है। ग्राफिक में गाउट के सभी लक्षण देखिए- सवाल- शरीर के कौन से अंग या जॉइंट्स इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं? जवाब- पैर के अंगूठे का जोड़ गाउट अटैक की सबसे कॉमन जगह है। समय के साथ बीमारी बढ़ने पर टखने, घुटने, पैर की उंगलियों के साथ हाथों की उंगलियां, कलाई और कोहनी भी प्रभावित हो सकते हैं। इसे ग्राफिक में देखिए- सवाल- हमारी डेली लाइफ की कौन-सी आदतें गाउट का रिस्क बढ़ाती हैं? जवाब- कम फिजिकल एक्टिविटी, खराब खानपान और ज्यादा वजन जैसी चीजें धीरे-धीरे यूरिक एसिड के लेवल को प्रभावित करती हैं। इससे गाउट का रिस्क बढ़ता है। ग्राफिक में गाउट का रिस्क बढ़ाने वाली सभी आदतें देखिए- सवाल- किन लोगों में गाउट का रिस्क ज्यादा होता है? जवाब- यह महिलाओं की तुलना में पुरुषों में लगभग तीन गुना ज्यादा देखा जाता है। महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन यूरिक एसिड को शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है। इसलिए मेनोपॉज से पहले उनमें गाउट अपेक्षाकृत कम होता है। हालांकि मेनोपॉज के बाद इसका रिस्क बढ़ जाता है। किन्हें ज्यादा रिस्क है, ग्राफिक में देखिए- सवाल- कौन-से फूड आइटम्स यूरिक एसिड बढ़ा सकते हैं? जवाब- जिन फूड आइटम्स में प्यूरीन की मात्रा ज्यादा होती है, उनसे यूरिक एसिड बढ़ सकता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं- सवाल- अगर किसी को गाउट है तो उसकी डाइट कैसी होनी चाहिए ? जवाब- गाउट की डाइट का मकसद यूरिक एसिड को कंट्रोल रखना है। इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखें- सवाल- गाउट का इलाज क्या है? जवाब- इसके इलाज में दवाएं, खानपान में बदलाव और लाइफस्टाइल में सुधार शामिल हैं। सवाल- क्या हेल्दी लाइफस्टाइल से गाउट को ठीक किया जा सकता है? जवाब- हेल्दी लाइफस्टाइल गाउट को मैनेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लेकिन केवल इसके सहारे गाउट ठीक हो जाए, जरूरी नहीं है। बैलेंस्ड डाइट और वेट मैनेजमेंट से यूरिक एसिड का स्तर कम करने में मदद मिलती है। सवाल- गाउट से कैसे बचें? जवाब- इसे पॉइंटर्स में देखिए- गाउट से जुड़े कॉमन मिथ-फैक्ट्स मिथ- गाउट सिर्फ बुजुर्गों को होता है। फैक्ट- नहीं। गाउट कम उम्र में भी हो सकता है। मिथ- नींबू पानी पीने से गाउट ठीक हो जाता है। फैक्ट- नहीं। इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। मिथ- गाउट सिर्फ नॉनवेज खाने वालों को होता है। फैक्ट- नहीं। यह बात साइंटिफिक रूप से साबित नहीं हुई है। मिथ- यूरिक एसिड बढ़ने पर दाल खाना बंद कर देना चाहिए। फैक्ट- नहीं, संतुलित मात्रा में दालें खाई जा सकती हैं। ……………………….. ये खबर भी पढ़ें… फिजिकल हेल्थ- कार्डिएक अरेस्ट से नाना पाटेकर की मृत्यु:इतना ही खतरनाक ‘ब्रोकेन हार्ट सिंड्रोम’, जानें इसके लक्षण, बचाव व सावधानियां हाल ही में अभिनेता नाना पाटेकर की कार्डिएक अरेस्ट से मौत हो गई। यह एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें हार्ट अचानक ब्लड पंप करना बंद कर देता है। इससे ब्रेन और शरीर के दूसरे हिस्सों तक ब्लड और ऑक्सीजन पहुंचना रुक जाता है। पूरी खबर पढ़ें…
जरूरत की खबर- कहीं आपकी फास्टिंग कैलोरी बम तो नहीं:इस व्रत से वजन घटेगा नहीं, बढ़ेगा, वेट घटाना है तो ये 8 टिप्स याद रखें
नवरात्रि में व्रत रखने वाले कई लोगों की एक कॉमन उम्मीद होती है कि 9 दिन कम खाने से वजन भी कम हो जाएगा। लेकिन हर साल बहुत से लोगों के साथ इसका उल्टा होता है। व्रत खत्म होने तक वजन घटने की बजाय बढ़ जाता है। दरअसल समस्या व्रत में नहीं, बल्कि व्रत के दौरान की जाने वाली कुछ कॉमन गलतियों में छिपी होती है। कई लोग साबूदाना, आलू, कुट्टू, मूंगफली और व्रत स्पेशल स्नैक्स को हेल्दी मानकर जरूरत से ज्यादा खा लेते हैं। वहीं कुछ लोग दिनभर भूखे रहते हैं और शाम को एक साथ भरपेट भोजन कर लेते हैं। ऐसे में फास्टिंग वेट लॉस की बजाय अतिरिक्त कैलोरी लेने का जरिया बन सकती है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, व्रत में क्या खा रहे हैं, इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि कितना, कब और किस तरह खा रहे हैं। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में व्रत की कॉमन गलतियों की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- अमृता मिश्रा, सीनियर डाइटीशियन, दिल्ली सवाल- क्या व्रत रखने से अपने-आप वजन कम हो जाता है? जवाब- व्रत में लोग अक्सर सोचते हैं कि कम खाने से वजन अपने-आप कम हो जाएगा, लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- व्रत में वजन बढ़ने की सबसे बड़ी वजह क्या है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- व्रत में बार-बार भूख क्यों लगती है? जवाब- इसे पाॅइंटर्स से समझिए- सवाल- व्रत में प्रोटीन की कमी वजन बढ़ाने की वजह कैसे बन सकती है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- क्या व्रत में आलू खाने से वजन बढ़ सकता है? जवाब- हां, लेकिन इसकी वजह सिर्फ आलू नहीं, बल्कि उसकी कुकिंग है। इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- क्या दिनभर भूखे रहने और रात में भरपेट खाने से वजन बढ़ सकता है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- व्रत में कौन-सी 5 गलतियां वजन बढ़ा देती हैं? जवाब- व्रत के दौरान कुछ गलतियां वजन बढ़ा सकती हैं, जैसेकि- दिनभर बहुत कम पानी पीना फिजिकल एक्टिविटी पूरी तरह बंद कर देना शाम को एक बार में ज्यादा खाना नींद पूरी न लेना भोजन की मात्रा पर नजर न रखना सवाल- क्या बाजार में मिलने वाले 'व्रत स्पेशल' स्नैक्स हेल्दी होते हैं? जवाब- किसी पैकेट पर 'व्रत स्पेशल', 'फास्टिंग फ्रेंडली' या 'सेंधा नमक से बना' लिखा होना उसे हेल्दी नहीं बनाता। कई पैकेज्ड व्रत स्नैक्स में कैलोरी, फैट और नमक की मात्रा काफी ज्यादा हो सकती है। इसलिए इन्हें हेल्दी मानने से पहले न्यूट्रिशन लेबल पढ़ना जरूरी है। सवाल- क्या व्रत में फल जितना चाहें उतना खा सकते हैं? जवाब- नहीं, फल पोषक तत्वों, फाइबर और नेचुरल शुगर का अच्छा सोर्स हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इन्हें जरूरत से ज्यादा खाया जा सकता है। किसी भी फूड आइटम की तरह फलों की भी कैलोरी होती है और जरूरत से ज्यादा मात्रा में खाने पर कुल कैलोरी इनटेक बढ़ सकता है। सवाल- क्या व्रत में बार-बार चाय पीना सही है? जवाब- नहीं, इससे भी वजन बढ़ सकता है। इसे ऐसे समझिए- सवाल- व्रत में कौन-से फूड वजन बढ़ने से बचा सकते हैं? जवाब- वजन कंट्रोल रखने के लिए व्रत की थाली में ऐसे फूड आइटम्स शामिल करने चाहिए, जो सिर्फ एनर्जी नहीं, बल्कि प्रोटीन, फाइबर और फ्लूइड भी दें। इसमें क्या क्या शामिल कर सकते हैं, ग्राफिक में देखिए- सवाल- वजन घटाना चाहते हैं तो व्रत के दौरान किन बातों का ध्यान रखें? जवाब- इसके लिए कुल कैलोरी पर कंट्रोल करना जरूरी है। सभी जरूरी बातें ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या व्रत में सिर्फ फल खाकर पूरा दिन निकालना सही है? जवाब- फल व्रत का अच्छा हिस्सा हो सकते हैं। लेकिन पूरे दिन का भोजन सिर्फ फलों पर आधारित रखना हर किसी के लिए संतुलित विकल्प नहीं है। फल विटामिन, मिनरल्स और फाइबर देते हैं। लेकिन उनमें प्रोटीन और कुछ अन्य जरूरी पोषक तत्व अपेक्षाकृत कम होते हैं। सवाल- क्या व्रत में पैक्ड फ्रूट जूस और मिल्कशेक सही विकल्प हैं? जवाब- नहीं, पैक्ड फ्रूट जूस और बाजार में मिलने वाले कई मिल्कशेक हेल्दी दिखते जरूर हैं। लेकिन इनमें अतिरिक्त चीनी, फ्लेवर और कैलोरी की मात्रा ज्यादा होती है। सवाल- क्या व्रत खोलने का तरीका भी वजन पर असर डालता है? जवाब- हां, लंबे समय तक खाली पेट रहने के बाद तेजी से और ज्यादा खाने पर भोजन की मात्रा जरूरत से ज्यादा हो सकती है। ***************** ग्राफिक्स- महेंद्र वर्मा …………………. जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- व्रत का ‘पसंदीदा फलाहार’ साबूदाना कितना हेल्दी: डॉक्टर से जानें न्यूट्रिशन, फायदे-नुकसान और खाने का हेल्दी तरीका आज से नवरात्रि शुरू हो रही है। कई लोग 9 दिनों का व्रत रखते हैं। इस दौरान रसोई में एक चीज की एंट्री लगभग तय होती है, वह है साबूदाना। व्रत रखने वाले लोग कभी खिचड़ी, कभी वड़ा तो कभी खीर के रूप में इसे बड़े चाव से खाते हैं। पूरी खबर पढ़ें…
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