Responsive Scrollable Menu

Delhi में विरोध प्रदर्शन के लिए Ramlila Maidan की बुकिंग हुई महंगी, साल के अंत तक बची सिर्फ तीन तारीखें

(वरूण भंडारी) नयी दिल्ली, 12 अक्टूबर दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन के लिए तय किये गए तीन नये स्थानों में से एक, रामलीला मैदान में प्रदर्शन करना दूर की कौड़ी और खर्चीला साबित हो सकता है, क्योंकि अगले ढाई महीने तक यह जगह उपलब्ध नहीं है और उसके बाद बुकिंग के लिए एक लाख रुपये से ज्यादा अदा करना पड़ सकता है। अधिकारियों ने बताया कि 12 एकड़ में फैले इस मैदान को, जिसमें 50,000 लोग एकत्र हो सकते हैं, अब इस साल सिर्फ 29, 30 और 31 दिसंबर के लिए ही बुक किया जा सकता है। एक अधिकारी ने बताया, ‘‘मैदान की बुकिंग की दर 50,000 रुपये प्रति दिन है, साथ ही 55,000 रुपये की जमानत राशि भी देनी होती है जो बाद में वापस मिल जाती है।

कर सहित एक दिन की बुकिंग का शुरुआती खर्च 1.21 लाख रुपये आता है।’’ नगर निकाय के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मैदान का एक छोटा सा हिस्सा विरोध-प्रदर्शन और सभाओं के लिए निशुल्क उपलब्ध है, लेकिन वहां सिर्फ 150 लोग ही एकत्र हो सकते हैं। इस मैदान को दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के बागवानी विभाग के जरिए बुक किया जाता है, जो इसकी मंजूरी देता है। नगर निकाय द्वारा आवेदन को मंजूरी देने से पहले दिल्ली पुलिस से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेना जरूरी है।

दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार के 11 अक्टूबर के स्थायी आदेश के तहत जंतर-मंतर पर अब प्रदर्शन नहीं किया जा सकेगा। वहीं, रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली स्थित सीबीडी (सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट) मैदान विरोध-प्रदर्शन के लिए नये स्थान होंगे। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, किसी संगठन या निवासियों के समूह को प्रदर्शन करने के लिए रामलीला मैदान में बहुत अधिक प्रवेश शुल्क देना पड़ता है।

जंतर-मंतर पर ऐसा कोई शुल्क नहीं देना पड़ता था। एक अधिकारी ने कहा, ‘‘अगर बिना किसी शुल्क के वहां प्रदर्शन करने दिया जाता है, तो नगर निकाय को हर दिन कम से कम 50,000 रुपये या उससे अधिक का नुकसान होगा।’’ एमसीडी के अधिकारियों ने यह भी बताया कि आगामी कुछ हफ़्तों में दशहरा और दिवाली जैसे बड़े त्योहार आने वाले हैं, इसलिए रामलीला मैदान को कई तरह के कार्यक्रमों और उत्सवों के लिए पहले ही बुक किया जा चुका है। अधिकारियों के अनुसार, यह मैदान एक व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्र में स्थित है, जिसके आस-पास तीन अस्पताल और नगर निकायों के मुख्यालय हैं।

ब्रिटिश शासन काल में, यह अजमेरी गेट से आगे तक फैला हुआ था, और वर्तमान कमला मार्केट इसी क्षेत्र का हिस्सा हुआ करता था। अधिकारियों के अनुसार, 1930 तक यह मैदान एक तालाब हुआ करता था, जिसे भरकर समतल कर दिया गया ताकि वहां रामलीला का मंचन किया जा सके। यह परंपरा 1932 में शुरू हुई और आज भी जारी है, जिससे इस मैदान को इसका यह नाम मिला।

आजादी के बाद, 1951 में, पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को आजीविका उपलब्ध कराने के लिए इस इलाके का विकास किया गया। यह मैदान दशकों की अपनी यात्रा में, देश की राजनीति का मंच बन गया। 1952 में, भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जम्मू कश्मीर के भारत में एकीकरण की मांग को लेकर अपना सत्याग्रह शुरू किया था।

प्रधानमंत्री के तौर पर जवाहरलाल नेहरू ने 1956 और 1957 में रामलीला मैदान में विशाल जनसभाओं को संबोधित किया। वहीं, 1962 में भारत की यात्रा पर आईं महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के सम्मान में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के लिए वहां एक स्थायी मंच बनाया गया था। वर्ष 1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर मिली जीत के बाद इंदिरा गांधी ने यहां एक रैली को संबोधित किया था और 26 नवंबर 1974 को तत्कालीन सोवियत संघ के नेता लियोनिद ब्रेझनेव के सम्मान में एक जनसभा आयोजित की गई थी।

इसके कुछ साल बाद, 25 जून 1975 को, जिस दिन आपातकाल की घोषणा की गई थी, जयप्रकाश नारायण और अटल बिहारी वाजपेयी ने इसी मैदान में एक रैली को संबोधित किया था। अरविंद केजरीवाल ने 2013 में इसी जगह मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।

Continue reading on the app

Supreme Court में केंद्र बोली, कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन 30% तय होने से बचेंगे ₹2500 करोड़

केंद्र ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि उसने कैंसर-रोधी दवाओं के व्यापार ‘मार्जिन’ को नियंत्रित करने का फैसला किया है, जिसके तहत दवाओं का ‘मार्जिन’ अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) के 30 प्रतिशत तक सीमित रहेगा और इससे मरीजों को सालाना करीब 2,500 करोड़ रुपये की बचत होगी। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि इस फैसले पर आठ अक्टूबर को राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) की 151वीं बैठक में विचार किया गया। केंद्र ने 551 पन्नों के विस्तृत हलफनामे में कहा, ‘‘देश में दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए एक व्यापक वैधानिक और नीतिगत ढांचा मौजूद है।

सरकार ने जनहित में दवाओं की उपलब्धता से समझौता किए बिना व्यापार ‘मार्जिन’ में अत्यधिक वृद्धि पर अंकुश लगाने के लिए सोच-समझकर और विचार-विमर्श के बाद कदम उठाए हैं। इनमें औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश (डीपीसीओ), 2013 के पैराग्राफ 19 के तहत प्राप्त विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करना भी शामिल है।’’ हलफनामे में कहा गया, ‘‘विशेष रूप से, सरकार ने कैंसर-रोधी दवाओं पर व्यापार मार्जिन को एमआरपी के 30 प्रतिशत तक सीमित करने का फैसला किया है और इसे लागू करने की प्रक्रिया फिलहाल जारी है।’’ अदालत औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश (डीपीसीओ), 2013 के तहत दवाओं की कीमतों के नियमन, जेनेरिक दवाएं लिखने और चिकित्सा उपकरणों पर नियंत्रण से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। किशन चंद जैन की याचिका सहित दो याचिकाओं में इस बात को रेखांकित किया गया है कि अधिसूचित दवाओं की कीमतें अधिकतम सीमा के अधीन हैं, जबकि बाजार में उपलब्ध गैर-अधिसूचित दवाओं के अधिकांश फॉर्मूलेशन की कीमतें तय करने में निर्माताओं को अधिक स्वतंत्रता है।

बाजार में संख्या और मूल्य, दोनों के लिहाज से ऐसी दवाओं की हिस्सेदारी करीब 80 प्रतिशत या इससे अधिक आंकी गई है। हालांकि, इन दवाओं की कीमतों में सालाना वृद्धि 10 प्रतिशत तक सीमित है। हलफनामे में कहा गया कि केंद्र ने देश में कैंसर के इलाज के लिए मंजूर दवाओं की एक सूची जारी करने का फैसला किया है, जिससे इन दवाओं पर व्यापार ‘मार्जिन’ की तय सीमा लागू होगी।

सरकार ने कहा, ‘‘बाजार में होने वाले बदलावों और जनस्वास्थ्य से जुड़ी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस सूची में समय-समय पर कैंसर-रोधी दवाओं को शामिल कर इसे अद्यतन किया जा सकता है।’’ सरकार ने बताया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने नौ अक्टूबर को स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति गठित की। समिति को व्यापार ‘मार्जिन’ की सीमा के दायरे में आने वाली कैंसर-रोधी दवाओं की सूची तैयार करने और इसे 10 से 15 दिन के भीतर सौंपने की जिम्मेदारी दी गई है। सरकार ने कहा कि इसमें कैंसर के इलाज के लिए मंजूर सभी दवाओं को शामिल किया जाएगा, सिवाय उन दवाओं के जो कम कीमत वाली हैं।

विशेषज्ञ समिति से सूची मिलने के बाद एनपीपीए इस पर विचार-विमर्श और गैर-अधिसूचित कैंसर-रोधी दवाओं के व्यापार ‘मार्जिन’ को तर्कसंगत बनाने की प्रक्रिया लागू करने के लिए उचित निर्देश देने के वास्ते इसे प्राधिकरण के समक्ष रखेगा। इसके बाद एनपीपीए कीमतों से संबंधित अधिसूचना जारी करेगा। साथ ही, दवा निर्माताओं के लिए निर्देश और प्रक्रियाएं भी तय की जाएंगी, ताकि इस फैसले का लाभ मरीजों तक पहुंचना सुनिश्चित हो सके।

सरकार ने कहा कि प्रस्तावित व्यापार मार्जिन युक्तिकरण (टीएमआर) से कैंसर-रोधी दवाओं के एमआरपी में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है। अनुमान है कि इन दवाओं की कीमतों में करीब 20 से 70 प्रतिशत तक की कमी हो सकती है।

Continue reading on the app

  Sports

पृथ्वी शॉ-आकृति अग्रवाल की लव लाइफ में आया नया मोड़, सगाई टूटने के 1 महीने बाद हुआ पैच-अप

Prithvi Shaw-Akriti Agarwal: भारतीय क्रिकेटर पृथ्वी शॉ और एक्ट्रेस आकृति अग्रवाल ने एक बड़ा फैसला लिया है. सगाई तोड़ने के एक महीने बाद दोनों ने अपने रिश्ते को एक और मौका दिया है. Mon, 12 Oct 2026 20:44:43 +0530

  Videos
See all

CJP को पसंद है Kasab एनर्जी? । Arnab Goswami । Poochta Hai Bharat #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-12T15:47:07+00:00

बिना चुनाव के प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं Rahul Gandhi! । Arnab Goswami । Poochta Hai Bharat #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-12T15:45:59+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers