Responsive Scrollable Menu

चीन ने वेनेजुएला को लेकर अमेरिका की की, लेकिन उइगरों पर अत्याचारों को किया नजरअंदाज

बीजिंग, 31 जनवरी (आईएएनएस)। चीन ने अमेरिकी बलों द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी की निंदा करते हुए इसे “वैश्विक मानदंडों को कमजोर करने वाला वर्चस्ववादी कदम” बताया है। हालांकि, उइगरों पर चीन के अत्याचारों से परिचित लोगों के लिए बीजिंग की यह प्रतिक्रिया केवल “पाखंडी ही नहीं, बल्कि घोर अमानवीय” भी है। यह बात शनिवार को आई एक रिपोर्ट में कही गई।

ऑनलाइन पत्रिका ‘बिटर विंटर’ के लिए लिखते हुए उइगर-अमेरिकी पत्रकार शोह्रेत होशुर ने कहा, “मादुरो को पकड़ने के लिए ट्रंप प्रशासन ने सीमित संख्या में सैनिकों को हवा, ज़मीन और समुद्र के रास्ते तैनात किया। यह अभियान दो घंटे 28 मिनट में पूरा हो गया। इसके विपरीत, चीन ने तीन मिलियन से अधिक उइगरों को हिरासत में लेने के लिए दसियों हजार पुलिसकर्मियों और लाखों सरकारी कैडरों को झोंक दिया। ट्रंप के सैनिक राष्ट्रपति भवन के दरवाज़े तक पहुंचे, जबकि चीनी पुलिस ने आधी रात को आंगनों की दीवारें फांदीं, घरों में घुसी, दरवाज़े तोड़े और बिना चेतावनी घुसकर परिवारों को जानबूझकर आतंकित किया।”

उन्होंने आगे लिखा, “ट्रंप की सेना ने उन सैनिकों और सुरक्षा बलों से सुरक्षित राष्ट्रपति भवन पर धावा बोला। वहीं, चीनी सशस्त्र पुलिस ने निहत्थे आम नागरिकों—पुरुषों, महिलाओं और बुज़ुर्गों— के घरों पर धावा बोला, जिनकी सुरक्षा का एकमात्र साधन शायद आंगन में बंधा कोई कुत्ता रहा हो। मादुरो को बांधकर हेलीकॉप्टर से ले जाया गया। उइगरों को अक्सर सिर पर बोरी डालकर ले जाया गया; और जब बोरी उपलब्ध नहीं होती, तो अधिकारी अपनी ही जैकेट उनके सिर पर डालकर उन्हें घसीटते हुए ले जाते थे।”

होशुर ने बताया कि मादुरो के मामले में गिरफ्तारी के तुरंत बाद कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई। न्यूयॉर्क पहुंचने के तीन दिन के भीतर उन्हें अदालत में पेश किया गया। एक सप्ताह के भीतर उन्हें अपने बेटे से मिलने की अनुमति भी मिल गई और दुनिया को उनकी गिरफ्तारी का कारण पता था।

लेकिन उइगरों को जिन शिविरों में भेजा गया, वहां कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं थी—न वारंट, न आरोप, न सुनवाई।

उन्होंने कहा, “परिवारों को अंधेरे में रखा गया। खुद बंदी बनाए गए लोगों को भी अक्सर यह नहीं पता था कि उन्हें क्यों पकड़ा गया—सिवाय इसके कि वे उइगर थे और उस संसाधन-समृद्ध क्षेत्र के निवासी थे, जिसे ऐतिहासिक रूप से पूर्वी तुर्किस्तान कहा जाता है।”

रिपोर्ट के अनुसार, मादुरो की गिरफ्तारी के बाद ट्रंप प्रशासन ने खुले तौर पर वेनेजुएला के तेल में अपनी दिलचस्पी स्वीकार की और कहा कि इससे दोनों देशों को लाभ हो सकता है।

वहीं, रिपोर्ट में कहा गया कि चीन चुपचाप पूर्वी तुर्किस्तान के तेल, गैस और प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करता रहा है, जबकि वह यह दावा करता है कि वह केवल “शिनजियांग का आर्थिक विकास” कर रहा है। इन संसाधनों से होने वाले मुनाफे के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती।

--आईएएनएस

डीएससी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

Continue reading on the app

बांग्लादेश: जमात का ‘मध्यमार्गी’ मुखौटा, भीतर छिपा कट्टरपंथी एजेंडा

ढाका, 31 जनवरी (आईएएनएस)। बांग्लादेश की कट्टर इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी की स्थापना से जुड़े सिद्धांत उसके “मध्यमार्गी” होने के दावे से मेल नहीं खाते। पार्टी के संविधान में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सत्ता लोगों के पास नहीं, बल्कि ईश्वर के पास है, और उसका अंतिम लक्ष्य “इकामत-ए-दीन” यानी इस्लाम को जीवन की पूर्ण व्यवस्था के रूप में स्थापित करना है।

हांगकांग स्थित अंग्रेज़ी अखबार एशिया टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है, “जमात ने ‘दोहरा संदेश’ देने की कला में महारत हासिल कर ली है। कूटनीतिक मिशनों के वातानुकूलित कमरों में इसके वरिष्ठ नेता मधुर और आश्वस्त करने वाली बातें करते हैं। वे संवैधानिकता की बात करते हैं और शरीयत कानून को तुरंत लागू करने से इनकार करते हैं। वे दुनिया के सामने खुद को एक सौम्य, आस्था-आधारित नागरिक समाज आंदोलन के रूप में पेश करना चाहते हैं।”

रिपोर्ट में आगे कहा गया, “लेकिन जमीनी हकीकत में यह मुखौटा उतर जाता है। गांवों और कस्बों में, जहां असल में चुनाव जीते जाते हैं, वहां भाषा नागरिक कर्तव्य की नहीं, बल्कि दैवी आदेश की होती है। यहां वोट देना एक राजनीतिक विकल्प नहीं, बल्कि आस्था की परीक्षा बन जाता है। जमात को वोट देना ‘ईश्वरीय पुरस्कार’ पाने का जरिया बताया जाता है, जबकि उसके खिलाफ वोट को नैतिक पतन का रास्ता बताया जाता है।”

रिपोर्ट के अनुसार, मतपेटी को परलोक से जोड़कर पेश करने के जरिए जमात ने प्रभावी रूप से विरोधियों को हाशिये पर धकेला है। जमात से जुड़े नेताओं, जैसे शहरियार कबीर, ने पार्टी के चुनाव चिह्न ‘डारिपल्ला’ (तराजू) को वोट देने को एक “ईमानी” या आस्था आधारित कर्तव्य बताया है।

रिपोर्ट में जोर दिया गया कि यदि कोई पार्टी वास्तव में बांग्लादेश के संविधान के मूल सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध होती, तो उसकी विचारधारा भी उसी अनुरूप होती। लेकिन जमात ऐसा करने में विफल रही है।

रिपोर्ट में कहा गया, “इस वैचारिक कठोरता का सबसे स्पष्ट रूप पार्टी के महिलाओं को लेकर दृष्टिकोण में दिखता है। पार्टी प्रमुख (अमीर) शफीकुर रहमान और शीर्ष नेतृत्व पहले ही एक ऐसा सामाजिक एजेंडा सामने रख चुके हैं, जिसमें घरेलू दायरे में सीमित रहने को ‘इनाम’ देना, महिलाओं के कार्य घंटों को कम करना और उनकी आवाजाही को नियंत्रित करना शामिल है।”

रिपोर्ट के अनुसार, “ये प्रस्ताव उस सोच को दर्शाते हैं, जिसमें महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता—जो बांग्लादेश की लगभग 450 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है—को एक समस्या के रूप में देखा जाता है। ऐसे देश में, जहां महिलाएं औपचारिक कार्यबल का लगभग 35 प्रतिशत हिस्सा हैं और परिधान उद्योग में उनकी संख्या भारी है, ये नीतियां राष्ट्रीय पिछड़ेपन की रूपरेखा जैसी हैं।”

रिपोर्ट में जमात के भीतर संरचनात्मक बहिष्कार पर भी प्रकाश डाला गया है। पार्टी की निर्वाचित नीति-निर्माण इकाई में एक भी महिला शामिल नहीं है। जब वरिष्ठ नेता यह कहते हैं कि महिलाओं को केवल महिलाओं के सामने ही भूमिका निभानी चाहिए, तो यह सार्वजनिक जीवन, मीडिया और शिक्षा व्यवस्था से महिलाओं की दृश्यता मिटाने के व्यापक प्रयास को दर्शाता है।

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई, “यदि जमात नैतिकता पर एकाधिकार स्थापित करने में सफल होती है, तो वह कानूनी जवाबदेही की जगह नैतिक निश्चितता को बैठा देगी, और इसका पहला शिकार वही बहुलतावाद होगा, जिसने उसे उभरने का अवसर दिया।”

--आईएएनएस

डीएससी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

Continue reading on the app

  Sports

टी20 वर्ल्ड कप में नहीं होगा भारत-पाक मुकाबला, पाकिस्तान ने खेलने से किया इनकार

ICC T20 World Cup 2026 में भारत-पाकिस्तान मुकाबला नहीं होगा। 15 फरवरी को कोलंबो में होने वाले मैच से पाकिस्तान ने किनारा कर लिया है। जानिए पूरा मामला। Sun, 01 Feb 2026 20:46:40 +0530

  Videos
See all

Budget 2026: बजट में ये 10 चीजे हुई सस्ता ? | Nirmala Sitharaman | Gold-Silver | Breaking | N18G #tmktech #vivo #v29pro
2026-02-01T15:44:51+00:00

Budget को लेकर वित्त मंत्री का Rahul Gandhi पर पलटवार #shorts #budget2026 #rahulgandhi #shortsviral #tmktech #vivo #v29pro
2026-02-01T15:39:48+00:00

Union Budget 2026 पर केंद्रीय मंत्री Piyush Goyal ने कहा #shorts #budget2026 #piyushgoyal #tmktech #vivo #v29pro
2026-02-01T15:41:57+00:00

Breaking News: T20 World Cup में India के खिलाफ नहीं खेलेगा Pakistan? | PCB | Mohsin Naqwi | ICC #tmktech #vivo #v29pro
2026-02-01T15:39:57+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers