Asaduddin Owaisi ने BJP पर लगाया Muslim वोटरों के नाम हटवाने का आरोप
हैदराबाद, चार अक्टूबर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ता ‘फॉर्म-7’ जमा करके मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटवाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर ऐसा जारी रहा तो दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्रों के आंदोलन से भी बड़ा आंदोलन किया जाएगा। भाजपा की तेलंगाना इकाई के प्रवक्ता ने ओवैसी पर पलटवार करते हुए कहा कि एआईएमआईएम प्रमुख को निर्वाचन चुनाव आयोग के खिलाफ राजनीतिक बयानबाजी बंद करनी चाहिए और अगर उनके पास वकाई में चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी के सबूत हैं, तो उन्हें कानूनी रास्ता अपनाना चाहिए।
ओवैसी ने शनिवार रात हैदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग और तेलंगाना के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को प्रिंटेड फॉर्म-7 जमा करके मतदाताओं के नाम हटवाने की कोशिशों की जांच करनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि फॉर्म-7 जमा करने वाले व्यक्ति का नाम नहीं बताया जा रहा है। फॉर्म-7 एक मतदाता आवेदन फॉर्म है, जिसका इस्तेमाल मौजूदा मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने के प्रस्ताव पर आपत्ति जताने के लिए किया जाता है।
ओवैसी ने कहा, “भाजपा और संघ परिवार के लोग फॉर्म-7 जमा करके नाम हटवाना चाहते हैं।” उन्होंने कहा कि मतदाता पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) को हर ‘फॉर्म-7’ की जांच करनी चाहिए और पता लगाना चाहिए कि मतदाताओं के नाम हटवाने के लिए आवेदन कौन जमा कर रहा है। ओवैसी ने आरोप लगाया कि हैदराबाद के मुशीराबाद में भाजपा के एक बूथ स्तरीय एजेंट (बीएलए) ने मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटवाने के लिए फॉर्म-7 जमा किया था। उन्होंने कहा कि अगर गलत फॉर्म-7 जमा किए जाते हैं, तो निर्वाचन आयोग को कार्रवाई करनी चाहिए।
ओवैसी ने कहा, “अगर यह ड्रामा बंद नहीं हुआ, तो याद रखिए, हम हैदराबाद की सड़कों पर वह ‘मंत्र’ पढ़ेंगे, जो दिल्ली के जंतर-मंतर पर नहीं पढ़ा गया था। तब उन्हें बड़ी मुश्किल होगी। हम यह बर्दाश्त नहीं कर सकते कि फॉर्म-7 के जरिये वास्तविक मतदाताओं के नाम सिर्फ इसलिए हटवा दिए जाएं, क्योंकि वे मुसलमान हैं।” उन्होंने एआईएमआईएम कार्यकर्ताओं से अधिकारियों से यह पूछने के लिए कहा कि ‘फॉर्म-7’ किसने जमा किए।
ओवैसी ने चेतावनी दी कि हैदराबाद में दिल्ली और मुंबई में हुए विरोध-प्रदर्शनों से “दोगुना या तीन गुना” बड़े विरोध-प्रदर्शन होंगे। एआईएमआईएम प्रमुख ने दावा किया कि एसआईआर एक गलत प्रक्रिया है। हालांकि, कहा कि उच्चतम न्यायालय ने इसके पक्ष में फैसला सुनाया।
ओवैसी ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति के छह बच्चे हैं, तो इससे समस्या क्यों होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके खुद के छह बच्चे हैं। ओवैसी ने आरोप लगाया कि एसआईआर का मकसद नाम हटाना, नागरिकता पर सवाल उठाना और फिर “जब कल एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिक पंजी) लागू हो” तो लोगों को कतारों में खड़ा करवाना है।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि एनआरसी लागू की जाएगी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े सुनील आंबेकर ने इसका समर्थन किया है। ओवैसी ने इन आरोपों को खारिज किया कि एआईएमआईएम फर्जी वोटों के दम पर चुनाव जीतती है। उन्होंने कहा कि पार्टी प्यार के दम पर चुनाव जीतती है।
हैदराबाद में हत्या की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए ओवैसी ने कहा कि ऐसी वारदातों में शामिल अमीर लोग करीब दो करोड़ रुपये खर्च करके जमानत हासिल कर लेते हैं। ओवैसी ने दावा किया कि यह एक “पैकेज” की तरह है, जिसके तहत “जेल से लेकर जांच अधिकारी तक सब तय” होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि हैदराबाद की एक कारागार के अधीक्षक ने जेल के अंदर हत्यारों की बैठक होने दी।
ओवैसी के इन आरोपों का जवाब देते हुए कि भाजपा और संघ परिवार के कार्यकर्ता असली मतदाताओं के नाम हटवाने के लिए फॉर्म-7 भर रहे हैं, तेलंगाना भाजपा के मुख्य प्रवक्ता एन.वी. सुभाष ने कहा कि कानूनी पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति को पता होना चाहिए कि किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ गंभीर आरोप सिर्फ सार्वजनिक बयानों से साबित नहीं किए जा सकते। सुभाष ने कहा, “अगर ओवैसी के पास चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी के ठोस सबूत हैं, तो उन्हें उचित न्यायिक मंच पर जाने से कौन रोक रहा है? वह सार्वजनिक रूप से आरोप लगाकर क्यों रुक जाते हैं?
उन्हें सक्षम अधिकारियों के सामने सबूत पेश करने चाहिए और उचित कानूनी कार्रवाई की मांग करनी चाहिए।” भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि लोकतंत्र में किसी संवैधानिक संस्था के कामकाज की जांच की मांग करने में कुछ भी गलत नहीं है, लेकिन बिना सबूत के चुनाव प्रक्रिया की शुचिता पर बार-बार सवाल उठाना बिल्कुल अलग बात है। सुभाष ने कहा कि हैदराबाद में मतदाता सूची से जुड़े आरोपों-जिनमें एआईएमआईएम के पारंपरिक गढ़ से जुड़े आरोप भी शामिल हैं-की भी उसी तरह जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर ओवैसी के पास सबूत हैं, तो उन्हें पेश करना चाहिए।
अगर उन्हें कोई शिकायत है, तो उन्हें कानून के तहत उपलब्ध विकल्प का सहारा लेना चाहिए। लेकिन राजनीतिक बयानबाजी सबूत की जगह नहीं ले सकती और सिर्फ बार-बार दोहराने से आरोपों को चुनावी तथ्य नहीं माना जा सकता।
अमित शाह जी, आप कहां हैं? जंतर-मंतर पर पुलिस की कथित बदसलूकी पर Rahul Gandhi का सवाल
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस कर्मियों द्वारा महिलाओं और पत्रकारों के साथ कथित बदसलूकी का मामला अब राजनीतिक मुद्दा बन गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह से पूरे मामले पर जवाब मांगा है।
राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन आती है। इसलिए उन्होंने इस कथित बदसलूकी की जिम्मेदारी गृह मंत्री से लेने की मांग की है।
राहुल गांधी ने उठाए पुलिस की कार्रवाई पर सवाल
राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में पुलिस प्रशासन और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक महिला पत्रकार ने जंतर-मंतर पर एक पुलिस अधिकारी पर बदसलूकी का आरोप लगाया है।
राहुल गांधी ने लिखा, “सैकड़ों पत्रकार सिर्फ इस मांग को लेकर घंटों से बैठे हैं कि एफआईआर दर्ज की जाए। क्या यह पुलिस का प्राथमिक कर्तव्य नहीं है? उन्होंने अब तक मामला तक दर्ज नहीं किया।”
जंतर-मंतर पर एक महिला पत्रकार ने एक पुलिस अधिकारी पर बदसलूकी का आरोप लगाया है। घंटों से सैकड़ों पत्रकार सिर्फ़ इतनी माँग लेकर बैठे हैं कि FIR दर्ज कर ली जाए। ये तो पुलिस का बुनियादी काम है न? वो भी नहीं किया। आज ही जंतर-मंतर पर सैकड़ों लोग हिरासत में लिए गए। महिला प्रदर्शनकारियों के साथ बदसलूकी के आरोप हैं। कैमरे छीने गए, पत्रकार घसीटे गए। और ये पहली बार नहीं है - इससे पहले भी हमने वीडियो सबूतों के साथ देखा है कि पुलिस के अफसर महिलाओं के साथ घिनौनी बदसलूकी करते हैं। पूरी दिल्ली की महिलाएं, छात्राएं अपनी सुरक्षा को लेकर घबराहट में हैं, सत्याग्रह कर रही हैं - मगर जिस पुलिस पर महिलाओं की हिफ़ाज़त की ज़िम्मेदारी है, वही महिलाओं पर हाथ उठा रही है। और एक महिला की शिकायत दर्ज करने से जो सरकार डरती है - वो आख़िर किसकी हिफ़ाज़त कर रही है? दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन है। अमित शाह जी, कहाँ हैं आप? जवाब आपको ही देना है।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) October 3, 2026
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सैकड़ों लोगों को हिरासत में लेने का आरोप
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि शनिवार को जंतर-मंतर से सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया। उन्होंने कहा कि इस दौरान कैमरे छीने गए, पत्रकारों को घसीटा गया और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ बदसलूकी की गई।
उन्होंने कहा कि दिल्ली में महिलाएं और छात्र अपनी सुरक्षा को लेकर डर के बीच सत्याग्रह कर रहे हैं, लेकिन जिन पर उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी है, वही पुलिस उन पर हाथ उठा रही है।
राहुल गांधी ने सवाल किया, “जो सरकार एक महिला की शिकायत दर्ज करने से भी डरती है, वह आखिर किसकी रक्षा कर रही है?”
अमित शाह जी, आप कहां हैं?
राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह से सीधे सवाल करते हुए लिखा, “अमित शाह जी, आप कहां हैं? आपको इस बदसलूकी का जवाब देना ही होगा।”
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AISA ने भी पुलिस पर लगाए आरोप
छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) ने भी दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की निंदा करते हुए बयान जारी किया है। एआईएसए का आरोप है कि प्रदर्शन स्थल पर पुरुष पुलिस अधिकारियों ने महिला प्रदर्शनकारियों, वकीलों और पत्रकारों के साथ हाथापाई की और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया।
संगठन ने कहा कि खुद को न्याय की रक्षक बताने वाली पुलिस भीड़ को संभालने के बुनियादी नियमों का भी पालन करने में नाकाम रही।
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