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बांग्लादेश: जमात का ‘मध्यमार्गी’ मुखौटा, भीतर छिपा कट्टरपंथी एजेंडा

ढाका, 31 जनवरी (आईएएनएस)। बांग्लादेश की कट्टर इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी की स्थापना से जुड़े सिद्धांत उसके “मध्यमार्गी” होने के दावे से मेल नहीं खाते। पार्टी के संविधान में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सत्ता लोगों के पास नहीं, बल्कि ईश्वर के पास है, और उसका अंतिम लक्ष्य “इकामत-ए-दीन” यानी इस्लाम को जीवन की पूर्ण व्यवस्था के रूप में स्थापित करना है।

हांगकांग स्थित अंग्रेज़ी अखबार एशिया टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है, “जमात ने ‘दोहरा संदेश’ देने की कला में महारत हासिल कर ली है। कूटनीतिक मिशनों के वातानुकूलित कमरों में इसके वरिष्ठ नेता मधुर और आश्वस्त करने वाली बातें करते हैं। वे संवैधानिकता की बात करते हैं और शरीयत कानून को तुरंत लागू करने से इनकार करते हैं। वे दुनिया के सामने खुद को एक सौम्य, आस्था-आधारित नागरिक समाज आंदोलन के रूप में पेश करना चाहते हैं।”

रिपोर्ट में आगे कहा गया, “लेकिन जमीनी हकीकत में यह मुखौटा उतर जाता है। गांवों और कस्बों में, जहां असल में चुनाव जीते जाते हैं, वहां भाषा नागरिक कर्तव्य की नहीं, बल्कि दैवी आदेश की होती है। यहां वोट देना एक राजनीतिक विकल्प नहीं, बल्कि आस्था की परीक्षा बन जाता है। जमात को वोट देना ‘ईश्वरीय पुरस्कार’ पाने का जरिया बताया जाता है, जबकि उसके खिलाफ वोट को नैतिक पतन का रास्ता बताया जाता है।”

रिपोर्ट के अनुसार, मतपेटी को परलोक से जोड़कर पेश करने के जरिए जमात ने प्रभावी रूप से विरोधियों को हाशिये पर धकेला है। जमात से जुड़े नेताओं, जैसे शहरियार कबीर, ने पार्टी के चुनाव चिह्न ‘डारिपल्ला’ (तराजू) को वोट देने को एक “ईमानी” या आस्था आधारित कर्तव्य बताया है।

रिपोर्ट में जोर दिया गया कि यदि कोई पार्टी वास्तव में बांग्लादेश के संविधान के मूल सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध होती, तो उसकी विचारधारा भी उसी अनुरूप होती। लेकिन जमात ऐसा करने में विफल रही है।

रिपोर्ट में कहा गया, “इस वैचारिक कठोरता का सबसे स्पष्ट रूप पार्टी के महिलाओं को लेकर दृष्टिकोण में दिखता है। पार्टी प्रमुख (अमीर) शफीकुर रहमान और शीर्ष नेतृत्व पहले ही एक ऐसा सामाजिक एजेंडा सामने रख चुके हैं, जिसमें घरेलू दायरे में सीमित रहने को ‘इनाम’ देना, महिलाओं के कार्य घंटों को कम करना और उनकी आवाजाही को नियंत्रित करना शामिल है।”

रिपोर्ट के अनुसार, “ये प्रस्ताव उस सोच को दर्शाते हैं, जिसमें महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता—जो बांग्लादेश की लगभग 450 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है—को एक समस्या के रूप में देखा जाता है। ऐसे देश में, जहां महिलाएं औपचारिक कार्यबल का लगभग 35 प्रतिशत हिस्सा हैं और परिधान उद्योग में उनकी संख्या भारी है, ये नीतियां राष्ट्रीय पिछड़ेपन की रूपरेखा जैसी हैं।”

रिपोर्ट में जमात के भीतर संरचनात्मक बहिष्कार पर भी प्रकाश डाला गया है। पार्टी की निर्वाचित नीति-निर्माण इकाई में एक भी महिला शामिल नहीं है। जब वरिष्ठ नेता यह कहते हैं कि महिलाओं को केवल महिलाओं के सामने ही भूमिका निभानी चाहिए, तो यह सार्वजनिक जीवन, मीडिया और शिक्षा व्यवस्था से महिलाओं की दृश्यता मिटाने के व्यापक प्रयास को दर्शाता है।

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई, “यदि जमात नैतिकता पर एकाधिकार स्थापित करने में सफल होती है, तो वह कानूनी जवाबदेही की जगह नैतिक निश्चितता को बैठा देगी, और इसका पहला शिकार वही बहुलतावाद होगा, जिसने उसे उभरने का अवसर दिया।”

--आईएएनएस

डीएससी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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फ्रांस के परिवहन मंत्री फिलिप तबरोट ने एयरबस पायलट ट्रेनिंग सेंटर का किया दौरा

नई दिल्ली, 31 जनवरी (आईएएनएस)। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हाल ही में ऐलान किया कि वह अगले महीने फरवरी में भारत का दौरा करेंगे। मैक्रों की भारत यात्रा से पहले फ्रांस के परिवहन मंत्री फिलिप तबरोट भारत पहुंचे। उन्होंने शनिवार को भारत में एयरबस पायलट ट्रेनिंग सेंटर का दौरा किया और एयरबस टीम से बातचीत भी की।

भारत में फ्रांस दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ट्रेनिंग सेंटर के दौरे की तस्वीरें साझा कर लिखा, फ्रांस के परिवहन मंत्री फिलिप तबरोट ने दिल्ली में एयरबस पायलट ट्रेनिंग सेंटर का दौरा किया और एयरबस टीम से बातचीत की। उन्होंने लेटेस्ट सिमुलेटर देखे और भारत के तेजी से बढ़ते सिविल एविएशन सेक्टर के साथ फ्रांस की पक्की साझेदारी की सराहना की।

इससे पहले उन्होंने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय मंत्री राम मोहन नायडू से मुलाकात की थी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक्स पर मुलाकात की तस्वीर साझा कर लिखा, फ्रांस के साथ मिलकर रेलवे स्टाफ की स्किल बढ़ाने के मौकों पर चर्चा हुई। भारत और फ्रांस के बीच रेलवे सेक्टर में सहयोग का लंबा इतिहास रहा है। फ्रांस के परिवहन मंत्री फिलिप तबरोट के साथ मैन्युफैक्चरिंग में मेंटेनेंस, क्लीनिंग और क्वालिटी पर अच्छी चर्चा हुई।

बता दें कि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने 9 जनवरी को ऐलान किया कि वह अगले महीने भारत आएंगे और नई दिल्ली में आयोजित होने वाले एआई इम्पैक्ट समिट में शामिल होंगे। डिप्लोमैटिक कॉर्प्स को संबोधित करते हुए फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने 2025 में फ्रेंच डिप्लोमेसी की सफलता के बारे में बात की। इसके अलावा, उन्होंने पेरिस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समिट के दौरान दुनिया के एक साथ आने और इस फ्रंट पर हुई बढ़ोतरी का जिक्र किया।

उन्होंने कहा, आइए आखिर में देखें कि हमने मिलकर क्या हासिल किया है, पिछले साल फ्रेंच डिप्लोमेसी की सफलता, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समिट। पूरी दुनिया पेरिस आई थी। हमने इस पर बढ़ोतरी हासिल की और हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ इसकी सहअध्यक्षता की और अगले महीने मैं फॉलो-अप के लिए भारत आऊंगा। भारत-एआई इम्पैक्ट समिट का आयोजन 19-20 फरवरी को नई दिल्ली में किया जाएगा।

--आईएएनएस

केके/डीकेपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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