Health Insurance: हेल्थ पॉलिसी पोर्ट कराने पर कम मिलेगा कमीशन, आईआरडीए ने रखा नया प्रस्ताव
हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी को एक कंपनी से दूसरी कंपनी में पोर्ट कराने वाले ग्राहकों के लिए बड़ा बदलाव हो सकता है। इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI चाहता है कि एजेंट या डिस्ट्रीब्यूटर ज्यादा कमीशन के लालच में ग्राहकों को कंपनी बदलने के लिए न कहें। इसके लिए पोर्ट की जाने वाली हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी पर कमीशन कम रखने का प्रस्ताव दिया गया है। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो नई हेल्थ पॉलिसी बेचने और पुरानी पॉलिसी को पोर्ट कराने पर मिलने वाले कमीशन में बड़ा अंतर होगा।
क्यों बदलाव करना चाहता है IRDAI?
हेल्थ इंश्योरेंस पोर्टेबिलिटी में ग्राहक अपनी मौजूदा पॉलिसी को एक इंश्योरेंस कंपनी से दूसरी कंपनी में ले जा सकता है। इस दौरान पॉलिसी की निरंतरता बनी रहती है। लेकिन IRDAI चाहता है कि ग्राहक किसी बेहतर जरूरत, सर्विस या अपनी पसंद के आधार पर कंपनी बदले। सिर्फ इसलिए पॉलिसी पोर्ट न कराई जाए कि एजेंट या डिस्ट्रीब्यूटर को दूसरी कंपनी से ज्यादा कमीशन मिल रहा है।
डिस्ट्रीब्यूशन रिफॉर्म्स को लेकर जारी कंसल्टेशन पेपर में IRDAI ने हेल्थ और मोटर इंश्योरेंस में कमीशन के कारण होने वाली पोर्टेबिलिटी को हतोत्साहित करने का प्रस्ताव रखा है।
नई पॉलिसी और पोर्टेबिलिटी पर अलग कमीशन
IRDAI के प्रस्ताव में नई हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी बेचने, पॉलिसी रिन्यू कराने और उसे पोर्ट कराने के लिए अलग-अलग कमीशन लिमिट रखने की बात कही गई है। इंडिविजुअल हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में डिस्ट्रीब्यूशन एंटिटी को पहली बार पॉलिसी बेचने पर अधिकतम 15% कमीशन देने का प्रस्ताव है। वहीं पॉलिसी रिन्यू होने पर अधिकतम 5% और पोर्टेबिलिटी पर भी 5% कमीशन का प्रस्ताव है।
एजेंट और एसोसिएट्स के लिए पहली बार पॉलिसी बेचने पर अधिकतम कमीशन 20% रखने का प्रस्ताव है। रिन्यूअल और पोर्टेबिलिटी दोनों पर इसे अधिकतम 10% रखने की बात कही गई है।
रिन्यूअल पर भी कम कमीशन का प्रस्ताव
IRDAI का मानना है कि नई पॉलिसी बेचने और पहले से मौजूद ग्राहक की पॉलिसी रिन्यू कराने में लगने वाली मेहनत एक जैसी नहीं होती। हेल्थ इंश्योरेंस जैसे प्रोडक्ट के बारे में ग्राहकों में पहले से काफी जानकारी होती है। ऐसे में हर साल पॉलिसी रिन्यू कराने के लिए उतनी बिक्री प्रक्रिया की जरूरत नहीं होती, जितनी पहली बार ग्राहक को पॉलिसी बेचते समय पड़ सकती है।
इसी वजह से रेगुलेटर ने ज्यादा मांग और ग्राहकों के बीच ज्यादा जानकारी वाले इंश्योरेंस प्रोडक्ट के रिन्यूअल पर पहली बिक्री के मुकाबले काफी कम कमीशन रखने का प्रस्ताव दिया है।
ग्राहक के लिए क्यों जरूरी है यह बदलाव?
हेल्थ इंश्योरेंस पोर्ट करना केवल कंपनी बदलना नहीं है। दूसरी कंपनी में जाने पर पॉलिसी की कीमत, मिलने वाली सुविधाएं और कवरेज जैसी चीजें ग्राहक के लिए मायने रखती हैं। इसलिए IRDAI चाहता है कि पोर्टेबिलिटी का फैसला ग्राहक की जरूरत के हिसाब से हो। एजेंट या डिस्ट्रीब्यूटर को मिलने वाला कमीशन इसका मुख्य कारण नहीं बने।
कम कमीशन का मकसद ऐसी स्थिति को कम करना है, जिसमें ग्राहक को ज्यादा कमीशन वाली दूसरी कंपनी की पॉलिसी लेने के लिए प्रभावित किया जाए।
टैक्स छूट वाले प्रोडक्ट पर भी कम कमीशन की बात
कंसल्टेशन पेपर में केवल हेल्थ और मोटर इंश्योरेंस पोर्टेबिलिटी की बात नहीं की गई है। IRDAI ने सिंगल प्रीमियम वाले इंश्योरेंस प्रोडक्ट और टैक्स इंसेंटिव वाले प्रोडक्ट पर भी कम कमीशन रखने का प्रस्ताव दिया है। इसके पीछे भी यही सोच है कि कमीशन उस मेहनत और सर्विस के हिसाब से तय हो, जो पॉलिसी बेचने या उसे आगे जारी रखने में लगती है।
फिलहाल ये बदलाव प्रस्ताव के स्तर पर हैं। यानी कमीशन की बताई गई नई लिमिट अभी लागू नियम नहीं है। कंसल्टेशन की प्रक्रिया पूरी होने और अंतिम नियम जारी होने के बाद ही साफ होगा कि इनमें से कौन से बदलाव लागू किए जाते हैं।
(प्रियंका कुमारी)
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