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जॉर्डन में अमेरिकी दूतावास ने जारी किया सुरक्षा अलर्ट, लोगों से न्यूज अपडेट पर करीब से नजर रखने की अपील

जॉर्डन, 17 जनवरी (आईएएनएस)। बीते दिनों अमेरिका ने सीरिया में इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन चलाया और कई ठिकानों पर बम बरसाए। अमेरिका के इस ऑपरेशन में जॉर्डन ने भी उसका साथ दिया। बाद में जॉर्डन में अमेरिकी दूतावास ने अलर्ट जारी कर दिया।

जॉर्डन में स्थित अमेरिकी दूतावास ने कहा, यूएस एंबेसी इलाके में चल रहे तनाव पर करीब से नजर रख रही है और सभी नागरिकों को अच्छी व्यक्तिगत सुरक्षा और तैयारी रखने और ब्रेकिंग डेवलपमेंट के लिए खबरों पर नजर रखने की याद दिला रही है। अमेरिकी दूतावास के ऑपरेशन और स्टाफ में कोई बदलाव नहीं हुआ है और कॉन्सुलर सर्विस नॉर्मल तरीके से जारी हैं। दूतावास इलाके के हालात पर नजर रखना और जरूरत के हिसाब से अपडेट देना जारी रखेगी।

अमेरिकी दूतावास ने आगे कहा, जॉर्डन की सरकार ने मिसाइल, ड्रोन या रॉकेट के जॉर्डन के एयरस्पेस में घुसने की स्थिति में सिविल डिफेंस अलार्म लगाए हैं। कृपया ज्यादा से ज्यादा सावधान रहें और ऐसी घटना होने पर ऊपर से छिपकर सुरक्षित जगह पर रहें। घर के अंदर रहें और गिरते मलबे के संपर्क में न आएं। अगर अलार्म बजता है और लोग सुरक्षित जगह पर जाने के लिए कहते हैं तो अमेरिकी दूतावास के लोगों को भी ऑल क्लियर सायरन बजने तक सुरक्षित जगह पर रहने का आदेश दिया जाएगा।

रिलीज में आगे कहा गया, पहले अलर्ट में रुक-रुक कर धमाके होते हैं, खतरे के होने या आने का इशारा देते हैं, ताकि लोग सुरक्षा के लिए सावधानी बरतें। आप सुरक्षित जगहों पर पनाह लें और अगर कोई चोट या नुकसान हो तो 911 पर कॉल करें। दूसरे अलर्ट में एक लगातार तेज आवाज होती है जो एक मिनट तक बजती है और खतरे के खत्म होने का इशारा देती है। पब्लिक सिक्योरिटी डायरेक्टरेट (पीएसडी) का कहना है कि सायरन के बाद आमतौर पर एक वॉइस मैसेज (अरबी में) आता है जिसमें उनके एक्टिव होने का कारण बताया जाता है।

इससे पहले अमेरिका ने मुस्लिम ब्रदरहुड की मिस्र, लेबनान और जॉर्डन ब्रांच को आतंकी संगठन घोषित किया था। इसका एक कारण यह भी बताया गया है कि वे हमास आतंकी समूह का समर्थन करते हैं। अमेरिकी वित्तीय विभाग ने मंगलवार (यूएस के स्थानीय समय) को कहा कि उसने इसे खास तौर पर ग्लोबल टेररिस्ट घोषित किया है, और उन पर इजरायल और इस इलाके में अमेरिकी साझेदारों के खिलाफ हिंसक टेरर हमलों को समर्थन करने या बढ़ावा देने का आरोप लगाया।

वित्तीय विभाग ने एक बयान में कहा, मुस्लिम ब्रदरहुड की शाखाएं खुद को जायज नागरिक संगठन बताती हैं, जबकि पर्दे के पीछे वे हमास जैसे आतंकी समूहों को साफ तौर पर जोश के साथ समर्थन करते हैं। इस कदम के नतीजे में अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमी में मुस्लिम ब्रदरहुड के किसी भी एसेट्स को ब्लॉक कर देगा और समूह या उससे जुड़े लोगों से जुड़े ट्रांजेक्शन को आपराधिक बना देगा।

--आईएएनएस

केके/डीकेपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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1961 तक कुवैत में वैध था भारत का रुपया, जानें दोनों देश के बीच कैसा है संबंध?

नई दिल्ली, 17 जनवरी (आईएएनएस)। भारत और बांग्लादेश के बीच दीर्घकालिक संबंध हैं। खाड़ी क्षेत्र में कुवैत को भारत का एक अहम साझेदार माना जाता है। खास तौर से ऊर्जा सुरक्षा, प्रवासी भारतीयों और व्यापार के संदर्भ में दोनों देशों के बीच बहुआयामी संबंध हैं।

भारत और कुवैत के बीच राजनयिक संबंध 1961 में कुवैत की आजादी के तुरंत बाद स्थापित हुए थे। दोनों देश एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करते हैं। भारत खाड़ी क्षेत्र में शांति और स्थिरता का समर्थक रहा है। वहीं कुवैत ने भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कई बार भारत के रुख को समझा और समर्थन दिया। 1961 तक कुवैत में भारतीय करेंसी रुपया वैध था। वर्ल्डोमीटर के हिसाब से कुवैत की जनसंख्या 5,026,078 और क्षेत्रफल करीब 17,818 वर्ग किलोमीटर है।

दोनों देशों के बीच विदेश मंत्रालय स्तर पर लगातार संवाद, राजनीतिक परामर्श और उच्चस्तरीय यात्राएं होती रही हैं। कुवैत भारत को एक भरोसेमंद एशियाई साझेदार के रूप में देखता है, जबकि भारत के लिए कुवैत खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) में एक संतुलित और स्थिर देश है। वहीं तेल की खोज के बाद भारत के साथ कुवैत के संबंध और भी गहरे होते गए।

पीएम मोदी के नेतृत्व में दोनों देशों के संबंधों में और मजबूती आई है। इस सिलसिले में पीएम मोदी का 2024 का कुवैत दौरा खास माना जाता है। पीएम मोदी ने 21-22 दिसंबर 2024 को कुवैत का दौरा किया था। करीब 43 सालों के बाद भारत के किसी प्रधानमंत्री ने कुवैत का दौरा किया।

इससे पहले 1981 में तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी कुवैत पहुंची थीं। भारत और कुवैत के बीच तेल से पहले खजूर का व्यापार होता था। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से घोड़ों का व्यापार खत्म हो गया, लेकिन उससे पहले भारत और कुवैत के बीच इसका भी व्यापार होता था।

1962 में जब भारत और चीन के बीच युद्ध हुआ था, तो कुवैत ने भारत का साथ दिया था, लेकिन 1990 में इराक और कुवैत के युद्ध में भारत का रुझान इराक की तरफ देखने के बाद से दोनों देशों के बीच दूरी देखने को मिली।

कुवैत में लगभग 10 लाख से अधिक भारतीय रहते हैं, जो वहां की सबसे बड़ी प्रवासी आबादी है। ये भारतीय स्वास्थ्य, शिक्षा, निर्माण, इंजीनियरिंग, आईटी और घरेलू सेवा जैसे क्षेत्रों में अहम भूमिका निभाते हैं।

कुवैत से भारत कच्चा तेल, एलपीजी और पेट्रोलियम उत्पाद, रसायन (पेट्रोकेमिकल), विमान, उनके पुर्जे और सल्फर आयात करता है।

कुवैत भारत को खाद्य पदार्थ (चावल, मसाले, चाय), फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग और मशीनरी उत्पाद, कपड़ा और रेडीमेड गारमेंट्स, सूती धागा, आईटी और सर्विस सेक्टर से जुड़ी सेवाएं निर्यात करता है।

--आईएएनएस

केके/वीसी

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