क्या होती है Digital Fasting? बच्चों से बुजुर्गों तक अलग-अलग उम्र में ये क्यों जरूरी, डॉक्टर से जानें इसके फायदे
Digital Fasting: आज के समय में स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. सुबह आंख खुलते ही मोबाइल हाथ में आ जाता है. टीवी चलता रहता है, लेकिन नजर फोन पर ही रहती है. सोशल मीडिया, वीडियो और व्लॉग्स ने हमें स्क्रीन से बांध दिया है. बच्चे हों या बुजुर्ग, हर कोई मोबाइल में व्यस्त नजर आता है. घूमने जाना भी अब सुकून के लिए नहीं, बल्कि कंटेंट बनाने के लिए होने लगा है. धीरे-धीरे हमने अपनी एक डिजिटल दुनिया बना ली है. लेकिन हर समय फोन से जुड़े रहना सेहत और रिश्तों के लिए ठीक नहीं माना जाता. ऐसे में डिजिटल फास्टिंग एक असरदार उपाय बनकर उभरी है. चलिए डॉक्टर से डिजिटल फास्टिंग के बारे में विस्तार से जानते हैं.
डिजिटल फास्टिंग क्या होती है?
डिजिटल फास्टिंग का मतलब है टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर खुद की सीमा तय करना. इसमें दिन या हफ्ते में कुछ समय के लिए फोन, टैबलेट और लैपटॉप से दूरी बनाई जाती है. इस दौरान लोग केवल जरूरत के समय ही डिजिटल डिवाइस का इस्तेमाल करते हैं. इसे डिजिटल डिटॉक्स, डोपामाइन फास्टिंग, टेक्नोलॉजी से ब्रेक या डिजिटल सब्बाथ भी कहा जाता है.
डॉक्टर से जानें डिजिटल फास्टिंग के फायदे
गुरुग्राम के न्यूरोमेट वैलनेस के न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर भुपेश कुमार मनसुखानी बताते हैं कि डिजिटल फास्टिंग अपनाने से जीवन में कई सकारात्मक बदलाव आते हैं. परिवार और दोस्तों के साथ रिश्ते बेहतर होते हैं. काम पर ध्यान बढ़ता है और उत्पादकता बढ़ती है.मानसिक तनाव कम होता है. सेहत में सुधार देखने को मिलता है. इसके अलावा खुद के लिए समय निकाल पाते हैं.
डिजिटल फास्टिंग क्यों जरूरी हो गई है?
आज स्क्रीन से जुड़ी आदत लत में बदलती जा रही है. समय के साथ स्क्रीन टाइम लगातार बढ़ा है. भारत में 2019 के मुकाबले कुछ ही सालों में मोबाइल इस्तेमाल में बड़ी बढ़ोतरी देखी गई. अब लोग रोजाना औसतन करीब 6 घंटे फोन पर बिता रहे हैं. मोबाइल स्क्रीन पर समय बिताने के मामले में भारत दुनिया के टॉप देशों में शामिल हो चुका है.
बच्चों और बुजुर्गों में बढ़ती चिंता
डिजिटल फास्टिंग से बच्चों और बुजुर्गों की स्थिति और भी गंभीर हो गई है. कई युवा रोजाना 8 घंटे तक ऑनलाइन रहते हैं. फोन और सोशल मीडिया का अधिक इस्तेमाल स्वभाव में चिड़चिड़ापन ला रहा है. मानसिक समस्याएं बढ़ रही हैं. नींद और एकाग्रता भी प्रभावित हो रही है.
डॉक्टर कब डिजिटल फास्टिंग की सलाह देते हैं?
जब फोन की लत से मानसिक और शारीरिक परेशानी बढ़ने लगती है, तब डॉक्टर डिजिटल फास्टिंग अपनाने की सलाह देते हैं. डिजिटल ब्रेक लेने से दिमाग को आराम मिलता है और जीवन में संतुलन बनता है.
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मिनेसोटा प्रकरण पर ट्रंप ने आईसीई का लिया पक्ष, मारी गई महिला निकोल गुड के व्यवहार को बताया गलत
वाशिंगटन, 12 जनवरी (आईएएनएस)। अमेरिका के मिनेसोटा के मिनियापोलिस के मामले ने काफी तूल पकड़ लिया है। सड़क से गोल्डन ग्लोबल अवॉर्ड्स तक में विरोध जताया जा रहा है। शुरू से ही देश के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन विरोध प्रदर्शनों की मुखालफत करते आए हैं। पत्रकारों ने जब उनसे एयरफोर्स वन में सवाल किया तो उन्होंने आव्रजन और सीमा शुल्क विभाग (आईसीई) अधिकारी की गोली का शिकार हुई रेनी निकोल गुड के व्यवहार को ही इसका दोषी बताया।
ट्रंप ने कहा, हमें अपने लॉ एनफोर्समेंट (कानून लागू करने वाली एजेंसियों) का सम्मान करना होगा। कम से कम, उस महिला ने लॉ एनफोर्समेंट के साथ बहुत, बहुत बुरा बर्ताव किया। आप लॉ एनफोर्समेंट के साथ ऐसा नहीं कर सकते, चाहे वह पुलिस हो, या आईसीई, या बॉर्डर पेट्रोल हो या फिर कोई और हो।
उन्होंने कहा कि मारी गई महिला का आईसीई अधिकारी के साथ व्यवहार बहुत असम्मानजनक था। मुझे लगता है वो प्रोफेशनल एजिटेटर्स (विद्रोही) थीं, और मैं पता लगाऊंगा कि उन्हें इस काम के लिए कौन पैसे दे रहा है।
बता दें कि एक आईसीई अधिकारी ने बुधवार को मिनेसोटा राज्य के मिनियापोलिस शहर में एक महिला की गोली मारकर हत्या कर दी थी जिसके बाद से ही पूरे राज्य के लोगों में भारी गुस्सा है। लोग सड़क पर इसका विरोध कर रहे हैं। अमेरिकी महिला की हत्या राष्ट्रपति ट्रंप की सख्त इमिग्रेशन नीतियों के बीच हुई है।
37 साल की रेनी निकोल गुड को 34वीं स्ट्रीट और पोर्टलैंड एवेन्यू के चौराहे के पास गोली मारी गई थी। तब वो अपनी एसयूवी में थीं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम शुरू से ही मौत का दोषी उसे ही बता रहे हैं। उन्होंने कहा कि महिला मौके पर मौजूद आईसीई एजेंट्स के काम में दखल दे रही थी जो कि उकसावे वाला था।
ट्रंप के सख्त प्रवासन मुहिम की प्रमुख चेहरा मानी जाने वाली नोएम ने कहा था कि जब अधिकारियों ने गुड से गाड़ी से बाहर निकलने की दरख्वास्त की तो उन्होंने बात नहीं मानी और जानबूझकर एसयूवी को हथियार की तरह इस्तेमाल करते हुए अधिकारी को टक्कर मारने की कोशिश की, जिसके बाद एजेंट ने आत्मरक्षा में तीन गोलियां चलाईं।
--आईएएनएस
केआर/
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