क्या ईरान में कभी भी अमेरिकी हमला हो सकता है? यह सवाल इसलिए उठा है क्योंकि अमेरिका ने कतर में अमेरिकी सैन्य बेस से अपने कर्मचारियों को निकलने की सलाह दी है वहीं भारत सरकार ने भी ईरान में रह रहे अपने नागरिकों को स्पष्ट शब्दों में कहा है कि हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं, इसलिए भारतीय नागरिक बिना देरी किए ईरान छोड़ दें। भारतीय दूतावास ने अपने नागरिकों से अपील की है कि वे भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर रहें और उपलब्ध व्यावसायिक उड़ानों के माध्यम से जल्द से जल्द भारत लौटने की योजना बनाएं। छात्रों, व्यापारियों और पर्यटकों को विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है। भारतीय दूतावास का कहना है कि मौजूदा हालात में सुरक्षा की गारंटी देना मुश्किल होता जा रहा है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने भारतीयों के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी कर दिये हैं।
वहीं, कतर के अल उदैद एयर बेस पर तैनात कुछ अमेरिकी सैन्य कर्मियों को आज शाम तक क्षेत्र छोड़ने की सलाह दी गई है। यह कदम ईरान के साथ बढ़ते अमेरिकी तनाव और मध्य-पूर्व में संभावित सैन्य कार्रवाई की आशंकाओं के बीच उठाया गया है। हम आपको बता दें कि अल उदैद एयर बेस मध्य-पूर्व में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा है जहां लगभग 10,000 सैनिक तैनात हैं। देखा जाये तो अमेरिका ने यह कदम सतर्कता के नजरिये से उठाया है। हम आपको याद दिला दें कि पिछले साल जून में ईरान पर अमेरिकी हवाई हमलों से पहले भी अमेरिका ने अपने कुछ सैनिकों और उनके परिवारों को मध्य-पूर्व के बेसों से हटाया था। अमेरिका के हवाई हमले के बाद ईरान ने जवाब में कतर स्थित इसी एयर बेस पर मिसाइल हमला भी किया था।
वहीं ईरान के हालात की बात करें तो आपको बता दें कि विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत भले ही आर्थिक परेशानियों के मुद्दे पर हुई हो, लेकिन अब यह आंदोलन राजनीतिक बदलाव की मांग में बदल चुका है। कई शहरों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पों की खबरें सामने आई हैं। हालात पर काबू पाने के लिए सरकार ने इंटरनेट और संचार सेवाओं पर सख्त पाबंदियां लगा दी हैं, जिससे आम लोगों की आवाज़ बाहर तक पहुंचना और मुश्किल हो गया है। हालांकि किसी तरह कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आये हैं जिनमें देखा जा सकता है कि अस्पतालों के बाहर लाशों का अंबार है और सड़कों पर प्रदर्शनकारी सुरक्षा बलों से भिड़ रहे हैं। ईरान के अलग-अलग हिस्सों से रिपोर्टें मिल रही हैं कि हालात दिन-ब-दिन गंभीर होते जा रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों और मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, अब तक प्रदर्शनों के दौरान हज़ारों लोगों की मौत हो चुकी है और सैंकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अस्पतालों में भारी संख्या में घायल इलाज के लिए आए हैं जिनमें से कई लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
उधर, ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई ने इस पूरे मामले में विदेशी दखल का आरोप लगाते हुए कहा है कि देश “शत्रुओं के षड्यंत्र” से जूझ रहा है। उन्होंने अमेरिका को चेताते हुए यह भी कहा है कि ईरान को वेनेजुएला समझने की भूल ना करें। हम आपको यह भी बता दें कि ईरान की सरकार सरकारी टीवी चैनलों और समर्थक रैलियों के माध्यम से प्रदर्शनकारियों को अराजक तत्व बताते हुए जनता से संयम रखने की अपील भी कर रही है।
इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। उन्होंने ईरान में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों के समर्थन में बयान दिए हैं जिसके बाद यह आशंका और तेज हो गई है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ कड़े कदम उठा सकता है। यह भी बताया जा रहा है कि ट्रंप को ईरान के मुद्दे पर हर घंटे एक रिपोर्ट दी जा रही है। ट्रंप खुद कह चुके हैं कि यदि ईरान में प्रदर्शनकारियों को मौत के घाट उतारना जारी रहा तो अमेरिका दखल देगा। ट्रंप ने कहा है कि वह एलन मस्क से इस बारे में बात करेंगे कि वह अपने स्टारलिंक के माध्यम से ईरानी जनता को इंटरनेट मुहैया करवाएं ताकि वह अपनी आवाज बाहर तक पहुँचा सके। ट्रंप ने ईरान में हिंसा पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि अगर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा जारी रही तो अमेरिका कठोर प्रतिक्रिया देगा। ट्रंप ने ईरान के साथ किसी वार्ता से भी इंकार कर दिया है।
इस बीच, ईरान को लेकर अमेरिका और रूस के बीच कूटनीतिक तनाव और तेज़ हो गया है। ट्रंप ने स्पष्ट तौर पर संकेत दिया है कि अमेरिका ईरान के संकट के समाधान के लिए सहायता उपलब्ध कराएगा, हालांकि उन्होंने इसका स्वरूप स्पष्ट नहीं किया। उधर, ट्रंप के बयान के तुरंत बाद रूस ने कड़ा रुख अपनाया और अमेरिका की कार्रवाइयों को भयानक परिणाम के रूप में बताया। रूसी विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि ईरान के मामलों में बाहरी हस्तक्षेप, किसी भी तरह के सैन्य कदम या खींचतान, मध्य-पूर्व और वैश्विक सुरक्षा के दृष्टिकोण से गंभीर परिणाम ला सकता है और इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है।
देखा जाये तो ईरान में भड़का मौजूदा जनआंदोलन अब केवल एक देश के भीतर सत्ता और जनता के टकराव की कहानी नहीं रह गया है। यह संकट धीरे-धीरे वैश्विक राजनीति, सामरिक संतुलन और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ी परीक्षा बनता जा रहा है। भारत द्वारा अपने नागरिकों को ईरान छोड़ने की सलाह देना इस बात का संकेत है कि हालात को अब केवल आंतरिक अस्थिरता के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसके क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय फैलाव की आशंका गंभीर हो चुकी है।
देखा जाये तो ईरान का भौगोलिक और सामरिक महत्व इस संकट को और गंभीर बनाता है। यह देश न केवल ऊर्जा संसाधनों का बड़ा केंद्र है, बल्कि कई अहम समुद्री और व्यापारिक मार्गों के समीप स्थित है। यदि यहां लंबे समय तक अस्थिरता बनी रहती है, तो वैश्विक तेल और ऊर्जा बाज़ार बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं, महंगाई और आपूर्ति संकट का असर दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं तक पहुंचेगा, मध्य-पूर्व में पहले से मौजूद तनाव और गहरा होगा तथा यूरोप और एशिया, दोनों ही क्षेत्र इस अस्थिरता के झटकों से अछूते नहीं रहेंगे।
बहरहाल, यह संकट अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी एक चेतावनी है कि किसी देश की आंतरिक आग को भू-राजनीतिक हथियार बनाने की कोशिश अंततः पूरी दुनिया को झुलसा सकती है। ईरान का भविष्य अब केवल तेहरान की सड़कों पर नहीं, बल्कि वैश्विक कूटनीति के फैसलों में भी तय होगा।
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ईरान ने अमेरिकी सैनिकों की मेजबानी करने वाले पड़ोसी देशों को चेतावनी दी है कि अगर संयुक्त राज्य अमेरिका ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों में हस्तक्षेप करने की अपनी धमकी को अंजाम देता है, तो वह अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई करेगा। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में उद्धृत तीन राजनयिकों ने कहा कि कुछ कर्मियों को क्षेत्र में स्थित मुख्य अमेरिकी हवाई अड्डे को छोड़ने की सलाह दी गई थी, हालांकि सैनिकों की बड़े पैमाने पर निकासी के तत्काल कोई संकेत नहीं थे, जैसा कि पिछले साल ईरानी मिसाइल हमले से कुछ घंटे पहले देखा गया था। अपुष्ट घटनाक्रम ईरान में व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच सामने आए हैं, जिसके चलते राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली अमेरिकी सरकार ने हस्तक्षेप की चेतावनी जारी की है।
ईरान वर्षों में अशांति की सबसे गंभीर लहर का सामना कर रहा है, क्योंकि गिरती अर्थव्यवस्था और बढ़ती कीमतों से प्रेरित विरोध प्रदर्शन अब सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व वाले इस्लामी गणराज्य के धार्मिक शासन को उखाड़ फेंकने की खुली मांगों में तब्दील हो गए हैं। एक मानवाधिकार समूह के अनुसार, अब तक के सबसे बड़े विरोध आंदोलनों में से एक पर ईरानी शासन की कार्रवाई में लगभग 2,600 लोग मारे गए हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कई बार धमकियां जारी की हैं और ईरान में हो रहे प्रदर्शनों में अमेरिकी हस्तक्षेप की चेतावनी दी है। पिछले शनिवार को ट्रम्प ने कहा कि ईरान में प्रदर्शनकारियों पर इस्लामिक गणराज्य के अधिकारियों द्वारा बढ़ते दमन के मद्देनजर अमेरिका उन्हें समर्थन देने के लिए तैयार है।
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