बॉम्बे हाई कोर्ट ने शुक्रवार को महाराष्ट्र में प्राइवेट होटलों और फ़ूड चेन के ख़िलाफ़ फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की कार्रवाई पर कड़ा रुख़ अपनाया। कोर्ट ने साफ़ कहा कि कानून सिर्फ़ प्राइवेट संस्थानों पर ही लागू नहीं हो सकता, बल्कि यह सरकारी और सेमी-गवर्नमेंट संस्थानों पर भी समान रूप से लागू होना चाहिए। मामले की सुनवाई के दौरान, FDA ने कहा कि उसने मंत्रालय की कैंटीन का भी निरीक्षण किया, हालाँकि वहाँ कोई कीड़े-मकोड़े नहीं मिले। इसके साथ ही, FDA ने अपना जवाब दाखिल करने के लिए कोर्ट से समय माँगा, जिसके बाद हाई कोर्ट ने अगली सुनवाई आज दोपहर 3 बजे तय की।
बॉम्बे HC ने जांच के लिए मिनिस्ट्री कैंटीन में टीम भेजी
शुक्रवार को बॉम्बे हाई कोर्ट ने प्राइवेट होटलों के खिलाफ FDA की कार्रवाई पर कड़ा रुख अपनाया, क्योंकि FDA का दावा था कि मिनिस्ट्री कैंटीन 98 प्रतिशत साफ-सुथरी है। इस बारे में पता चलने के तुरंत बाद, बॉम्बे HC ने जांच के लिए चार वकीलों की एक टीम मिनिस्ट्री भेजी। होटलों और फूड चेन के खिलाफ FDA की कार्रवाई को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट ने एजेंसी के रुख पर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि नियम लागू करने का काम सिर्फ प्राइवेट संस्थानों तक ही सीमित नहीं हो सकता और कानून सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए। FDA ने कोर्ट को बताया कि मिनिस्ट्री कैंटीन की भी जांच की गई थी और सरकारी व अर्ध-सरकारी संस्थानों से जुड़ी रिपोर्ट जमा कर दी गई हैं। एजेंसी ने कहा कि जहां भी गड़बड़ी पाई गई, वहां कार्रवाई की गई।
FDA का कहना है कि मंत्रालय की कैंटीन में कोई कीड़े-मकोड़े नहीं मिले
FDA ने कोर्ट को बताया कि मंत्रालय की कैंटीन में कोई कीड़े-मकोड़े नहीं पाए गए। हाई कोर्ट ने इस दावे को "हंसी के लायक" बताया। कोर्ट ने कहा कि बड़े फाइव-स्टार होटलों में भी कभी-कभी मक्खियां या छोटे कीड़े दिख जाते हैं; ऐसे में यह दावा कैसे किया जा सकता है कि मंत्रालय की कैंटीन पूरी तरह से कीड़े-मकोड़ों से मुक्त है? इसके बाद, बॉम्बे हाई कोर्ट ने पूछा कि क्या उसे आज दोपहर 3 बजे तक मंत्रालय की कैंटीन के निरीक्षण का आदेश देना चाहिए और कीड़े-मकोड़े मिलने पर सख्त कार्रवाई का निर्देश देना चाहिए। फिर कोर्ट ने मंत्रालय की कैंटीन का निरीक्षण करने के लिए चार वकीलों की एक टीम नियुक्त की और साफ तौर पर निर्देश दिया कि पूरे निरीक्षण की वीडियोग्राफी की जाए और एक नई निरीक्षण रिपोर्ट कोर्ट में सौंपी जाए। अगली सुनवाई आज दोपहर 3 बजे तय की गई है, जब निरीक्षण रिपोर्ट कोर्ट के सामने पेश की जाएगी।
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कांग्रेस सांसद और पब्लिक अकाउंट्स कमिटी के चेयरमैन केसी वेणुगोपाल ने शुक्रवार को केंद्रीय राज्य मंत्री (PMO) जितेंद्र सिंह के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने मंत्री पर आरोप लगाया कि उन्होंने संसद को जानबूझकर गुमराह किया है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से आग्रह किया कि वह केंद्रीय मंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की कार्यवाही शुरू करें। लोकसभा अध्यक्ष को दिए नोटिस में वेणुगोपाल ने लोकसभा के नियम एवं कार्य संचालन के नियम 222 के तहत विशेषाधिकार का प्रश्न उठाया है।
उनके मुताबिक, जितेंद्र सिंह ने बीते 29 जुलाई को अपराह्न तीन बजे लोक परीक्षा संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के अपने जवाब में कहा था कि बार-बार यह स्पष्ट किया गया कि 20 जुलाई को दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान गोली चली ही नहीं, केवल आंसू गैस का इस्तेमाल हुआ। जब गोली चली ही नहीं तो आदेश देने का सवाल ही नहीं उठता। वेणुगोपाल ने दावा किया कि मंत्री का यह बयान जमीनी तथ्यों के प्रतिकूल है। उनका कहना है कि संबंधित घटना में गोली चली थी और घायल व्यक्ति का अब भी उपचार हो रहा है।
कांग्रेस नेता ने नोटिस में आरोप लगाया कि मंत्री ने जानबूझकर गलत जानकारी दी और सदन को गुमराह किया। उन्होंने कहा कि किसी मंत्री द्वारा सदन को गुमराह करना विशेषाधिकार का हनन माना जाता है और मंत्री का दायित्व है कि वह सदन के पटल पर तथ्य रखने से पहले उनकी पुष्टि करे। वेणुगोपाल ने लोकसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया है कि इस मामले में विशेषाधिकार की कार्यवाही शुरू की जाए तथा मामले को जांच और आवश्यक कार्रवाई के लिए विशेषाधिकार समिति के पास भेजा जाए।
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