Nepal के सप्तरी जिले में सांप्रदायिक तनाव के बाद अनिश्चितकालीन Curfew लागू किया गया
(शिरीष बी. प्रधान) काठमांडू, 31 जुलाई नेपाल के अधिकारियों ने सुनसरी जिले में हाल में हुई सांप्रदायिक हिंसा के विरोध में प्रदर्शन शुरू होने के बाद शुक्रवार को भारत की सीमा से लगे सप्तरी जिले के कुछ हिस्सों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल और प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने तनावपूर्ण स्थिति पर गहरी चिंता जताई है तथा लोगों से शांति, एकता व संयम बनाए रखने की अपील की। सप्तरी जिला प्रशासन कार्यालय ने एहतियाती कदम के तौर पर राजबिराज नगरपालिका के कुछ हिस्सों में सुबह आठ बजे से कर्फ्यू लागू कर दिया।
यह फैसला सांप्रदायिक झड़पों के विरोध में कुछ समूहों द्वारा प्रदर्शन किए जाने के बाद लिया गया। सप्ताहांत में सुनसरी में सांप्रदायिक झड़पें शुरू होने के बाद से नेपाल के कई जिलों में तनाव बना हुआ है। अधिकारियों ने इस कारण कर्फ्यू और निषेधाज्ञा लागू की तथा सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी है।
इस नए आदेश के बाद अब चार जिलों में कर्फ्यू लागू हो गया है। नेपाल के दक्षिणी तराई क्षेत्र में भारत की सीमा से लगे सुनसरी, धनुषा और सिरहा जिलों के कुछ हिस्सों में पहले से ही कर्फ्यू लागू है। अधिकारियों को तनाव को नियंत्रित करने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है।
रविवार को दो धार्मिक समुदायों के कार्यक्रमों के दौरान हुए विवाद के बाद आपस में भिड़े समूहों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने गोलीबारी की, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और सुरक्षा कर्मियों समेत एक दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए। हिंसा उस समय शुरू हुई, जब अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित कर रहे दोनों समुदायों के लोगों के बीच लाउडस्पीकर के इस्तेमाल और धार्मिक झंडे लगाने को लेकर विवाद हो गया। बातचीत के दौरान हुई बहस ने हिंसक रूप ले लिया, जिसके बाद सुरक्षा बलों को हस्तक्षेप करना पड़ा।
बृहस्पतिवार को हिंसा मधेश प्रांत तक फैल गई, जहां सिरहा जिले में हुई झड़पों में एक नाबालिग की मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि सुनसरी में हुई हिंसा में घायल एक व्यक्ति की कोशी प्रांत में मौत हो गई। सहायक मुख्य जिला अधिकारी होम प्रसाद घिमिरे ने बताया कि इस बीच, सीमा से लगे सरलाही जिले की जिला सुरक्षा समिति ने फैसला लिया कि सीमा पार से नेपाल में प्रवेश करने वाले लोगों के लिए वैध पहचान पत्र साथ रखना अनिवार्य होगा।
FIFA अध्यक्ष के सलाहकार Carlos Cordero का इस्तीफा, विश्व कप योजना पर उठाए सवाल
फीफा के अध्यक्ष जियानी इन्फैंटिनो के सबसे करीबी सलाहकारों में से एक, कार्लोस कॉर्डेरो ने संगठन की विवादास्पद विश्व कप निवेश प्रस्ताव के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। कॉर्डेरो ने इस प्रस्ताव को "फुटबॉल के लिए एक बुरा सौदा" बताते हुए इसकी शासन व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं।
प्रस्ताव पर बढ़ता विरोध
कॉर्डेरो का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब फीफा को UEFA, Concacaf और AFC जैसे प्रमुख फुटबॉल संगठनों से बढ़ते विरोध का सामना करना पड़ रहा है। यह विरोध फीफा के विश्व कप के लिए प्रस्तावित निवेश योजना को लेकर है, जिसे कई लोग फुटबॉल के भविष्य के लिए हानिकारक मान रहे हैं।
शासन व्यवस्था पर सवाल
कॉर्डेरो ने विशेष रूप से फीफा की निर्णय लेने की प्रक्रिया और पारदर्शिता पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव फुटबॉल के हितों के बजाय किसी और एजेंडे को पूरा करता दिख रहा है। उनके इस्तीफे से फीफा के भीतर और बाहर दोनों तरफ से बढ़ते प्रतिरोध का संकेत मिलता है।
सदस्यों के मतदान से पहले दबाव
फीफा के सदस्य आगामी एक महत्वपूर्ण मतदान में इस प्रस्ताव पर निर्णय लेने वाले हैं। कॉर्डेरो जैसे करीबी सलाहकार का इस्तीफा इन्फैंटिनो के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है और यह प्रस्ताव के पारित होने की संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है। यह घटनाक्रम फीफा के नेतृत्व और उसकी भविष्य की योजनाओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
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