Export पर संकट से गिरे प्याज के दाम, Modi सरकार का बड़ा कदम, NAFED खरीदेगा पूरा स्टॉक
केंद्र सरकार किसानों से 12.35 रुपये प्रति किलोग्राम यानी 1,235 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्याज खरीदेगी। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को प्याज की कीमतों में जारी गिरावट के बीच यह घोषणा की है उन्होंने यह घोषणा महाराष्ट्र के सतारा में एक कार्यक्रम में की। महाराष्ट्र प्याज का एक प्रमुख उत्पादक राज्य है और इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी मौजूद थे। चौहान ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण प्याज के निर्यात पर असर पड़ा है। यह संकट 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हवाई हमलों के कारण शुरू हुआ था।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि उन्होंने प्याज की कीमतों में आए संकट के बारे में फडणवीस से चर्चा की है। उन्होंने कहा, ‘‘चूंकि पश्चिम एशिया संकट के कारण प्याज का निर्यात प्रभावित हुआ है, इसलिए प्याज की कीमतें गिर गई हैं। मैं यह घोषणा करना चाहूंगा कि आज (शुक्रवार) से ताजे प्याज की खरीद दर 12.35 रुपये प्रति किलोग्राम होगी। हम किसानों का पूरा स्टॉक खरीदेंगे और प्याज उपजाने वालों को सहायता देंगे।’’ उन्होंने कहा कि इस संबंध में भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नाफेड) को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। बाद में इसी कार्यक्रम में फडणवीस ने भी प्याज की खरीद दर को लेकर चौहान की घोषणा को दोहराया। हालांकि, केंद्र और राज्य सरकार की इस घोषणा से महाराष्ट्र के प्याज उत्पादकों के चेहरों पर खुशी नहीं आई।
महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ (एमएसओजीए) ने कहा कि 1,235 रुपये प्रति क्विंटल की खरीद दर पर्याप्त नहीं है। यह दर तो उत्पादन लागत को भी पूरा नहीं करती और उन्होंने 3,000 रुपये प्रति क्विंटल की समर्थन मूल्य की मांग की। उन्होंने उन किसानों के लिए मुआवजे की भी मांग की, जिन्होंने हाल के महीनों में बहुत कम कीमतों पर अपना प्याज बेचा है। साथ ही, उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो वे विरोध प्रदर्शन करेंगे।
SBI रिपोर्ट की चेतावनी: गिरता Rupee पेट्रोल-डीजल की कीमतों में की गई बढ़ोतरी को कर देगा बेअसर!
रुपये में यदि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले और भी गिरावट होती है तो तेल विपणन कंपनियों को वाहन ईंधन कीमतों में की गई बढ़ोतरी से मिलने वाला पूरा लाभ खत्म हो सकता है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के आर्थिक अनुसंधान विभाग ने यह कहा। एसबीआई इकोरैप रिपोर्ट के मुताबिक, ईंधन कीमतों में यह बढ़ोतरी तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को खुदरा बिक्री पर लागत के मुकाबले हो रहे नुकसान (अंडर-रिकवरी) में करीब 52,700 करोड़ रुपये की राहत दे सकती है, जो वित्त वर्ष 2026-27 में अपेक्षित कुल नुकसान का लगभग 15 प्रतिशत है।
सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तीन-तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की। यह कदम पश्चिम एशिया संकट के बीच कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में आई तीव्र वृद्धि के बाद उठाया गया है। हालांकि रिपोर्ट कहती है कि रुपये में अगर आगे भी गिरावट का रुख बना रहता है तो कच्चे तेल के आयात की लागत बढ़ जाएगी, जिससे कीमत वृद्धि का पूरा लाभ समाप्त हो सकता है। एसबीआई इकोरैप के मुताबिक, यदि रुपये में मौजूदा औसत स्तर से केवल दो रुपये की और कमजोरी आती है, तो आयात लागत इतनी बढ़ जाएगी कि ईंधन मूल्य वृद्धि का लाभ पूरी तरह चला जाएगा।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रुपया पहले ही एक महत्वपूर्ण गिरावट स्तर के करीब पहुंच चुका है, जिसके बाद और कमजोरी घरेलू ईंधन कीमत संशोधन के लाभ को काफी हद तक खत्म कर सकती है। शुक्रवार को कारोबार के दौरान रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96 के स्तर से नीचे चला गया और अंत में 95.81 के सर्वकालिक निचले स्तर पर बंद हुआ। एसबीआई रिपोर्ट में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के हवाले से कहा गया है कि तेल विपणन कंपनियों को प्रतिदिन लगभग 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है, जो सालाना करीब 3.6 लाख करोड़ रुपये बैठता है।
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