चीन के लिए जासूसी कर रही थी अमेरिकी मेयर!: FBI खुलासे के बाद मचा हड़कंप, जानिए अब क्या होगा?
अमेरिका के कैलिफोर्निया से एक ऐसा खुलासा हुआ है जिसने राजनीतिक और सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मचा दिया है। आर्केडिया शहर की मेयर एलीन वांग ने स्वीकार किया है कि वे गुप्त रूप से चीन सरकार के लिए काम कर रही थीं।
FBI और अमेरिकी न्याय विभाग की जांच में सामने आया कि उन्होंने बीजिंग समर्थक एजेंडा फैलाने और अमेरिकी लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित करने के लिए एक न्यूज वेबसाइट का इस्तेमाल किया। खुलासे के बाद एलीन वांग ने इस्तीफा दे दिया है और अब उन्हें 10 साल तक की जेल हो सकती है।
बीजिंग के हितों के लिए वेबसाइट का इस्तेमाल
एलीन वांग ने अपने 'प्लेड गिल्टी एग्रीमेंट' में माना कि साल 2020 के अंत से 2022 तक उन्होंने और उनके पूर्व मंगेतर याओनिंग 'माइक' सन ने चीनी सरकारी अधिकारियों के नियंत्रण और निर्देशन में काम किया। इन दोनों ने मिलकर 'US News Center' नामक एक वेबसाइट चलाई।
यह वेबसाइट देखने में तो स्थानीय चीनी-अमेरिकी समुदाय के लिए एक समाचार पोर्टल लगती थी, लेकिन वास्तव में इसका इस्तेमाल बीजिंग के हितों को बढ़ावा देने और चीनी अधिकारियों के निर्देश पर 'प्रो-पीआरसी' कंटेंट पोस्ट करने के लिए किया जा रहा था।
एफबीआई और सुरक्षा एजेंसियों का एक्शन
एफबीआई के काउंटर इंटेलिजेंस और जासूसी प्रभाग के सहायक निदेशक रोमन रोजावस्की के अनुसार, वांग ने निजी लाभ के लिए सीक्रेट रूप से विदेशी सरकार की सेवा की। उन्होंने अमेरिकी अटॉर्नी जनरल को कभी सूचित नहीं किया कि वे चीन के लिए काम कर रही हैं।
कलिफोर्निया के फर्स्ट असिस्टेंट यूएस अटॉर्नी बिल एस्सायली ने कहा, "जो लोग सीक्रेट रूप से विदेशी सरकारों के इशारों पर काम करते हैं, वे हमारे लोकतंत्र को कमजोर करते हैं। यह समझौता हमारे संस्थानों को भ्रष्ट करने के चीन के प्रयासों के खिलाफ हमारी एक बड़ी सफलता है।"
कितनी मिलेगी सजा?
एलीन वांग ने एक गंभीर अपराध के आरोप में दोषी ठहराए जाने पर सहमति व्यक्त की है। इस जुर्म के लिए उन्हें अधिकतम 10 साल की जेल की सजा हो सकती है। आने वाले हफ्तों में लॉस एंजिल्स की संघीय अदालत उनकी सजा पर अंतिम फैसला सुनाएगी।
गौरतलब है कि इसी मामले में उनके साथी माइक सन ने पिछले साल अक्टूबर में अपना अपराध स्वीकार कर लिया था और वर्तमान में वे चार साल की जेल की सजा काट रहे हैं। एलीन वांग नवंबर 2022 में आर्केडिया सिटी काउंसिल के लिए चुनी गई थीं और रोटेशन नीति के तहत उन्हें मेयर नियुक्त किया गया था।
विदेशी प्रभाव के खिलाफ कड़ी चेतावनी
अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने इस मामले के बाद एक बार फिर कड़ी चेतावनी जारी की है। एजेंसियों का कहना है कि सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को केवल अमेरिकी जनता के हितों के लिए काम करना चाहिए।
किसी भी तरह का विदेशी प्रभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें न्याय के कटघरे में लाया जाएगा। इस मामले ने अमेरिका और चीन के बीच पहले से ही जारी कूटनीतिक और सुरक्षा संबंधी तनाव को और बढ़ा दिया है।
शेयर बाजार में लगातार चौथे दिन गिरावट: सेंसेक्स 1450 पॉइंट गिरा; निफ्टी भी करीब 2 फीसदी टूटा; जानें क्यों हुआ ऐसा
Closing Bell: शेयर बाजार में मंगलवार को लगातार चौथे दिन बड़ी गिरावट देखने को मिली। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, अमेरिका-ईरान तनाव, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कमजोर वैश्विक संकेतों ने निवेशकों का भरोसा हिला दिया। दिनभर दबाव में कारोबार करने के बाद सेंसेक्स 1467 अंक टूटकर 74548 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 432 अंक यानी करीब 1.83 फीसदी गिरकर 23383 के स्तर पर आ गया।
बाजार में लगभग हर सेक्टर में बिकवाली देखने को मिली। एनएसई के सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए। हालांकि मेटल, ऑयल एंड गैस और पीएसयू बैंक शेयरों में थोड़ी मजबूती रही। स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में भी दबाव बना रहा।
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
गिरावट की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल रही। ब्रेंट क्रूड करीब 2.5 फीसदी बढ़कर 106.75 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने का असर सीधे महंगाई और कंपनियों की लागत पर पड़ता।
अमेरिका-ईरान तनाव से डरा बाजार
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने भी बाजार का मूड बिगाड़ा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम को कमजोर बताया और तेहरान के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इससे निवेशकों को डर है कि पश्चिम एशिया में तनाव लंबा खिंच सकता है, जिससे तेल सप्लाई प्रभावित होगी।
आईटी शेयरों में भारी बिकवाली
आईटी सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 3.7 फीसदी टूट गया। टीसीएस, इंफोसिस, एचसीएल टेक और विप्रो जैसे दिग्गज शेयर 2.5 से 4 फीसदी तक फिसल गए। इस गिरावट की एक वजह ओपनएआई की नई एआई कंपनी की घोषणा भी रही। कंपनी 4 अरब डॉलर से ज्यादा निवेश के साथ नई एआई डिप्लॉयमेंट कंपनी शुरू करने जा रही है। इससे पारंपरिक आईटी सेवाओं पर असर की चिंता बढ़ गई है।
पीएम मोदी की अपील का असर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील का असर भी बाजार पर दिखा। उन्होंने लोगों से एक साल तक सोने की खरीद और गैर जरूरी विदेशी यात्राएं टालने की बात कही थी। इसके बाद रियल एस्टेट, ज्वेलरी और ट्रैवल सेक्टर के शेयरों में लगातार दूसरे दिन दबाव रहा।
भारतीय रुपया भी ऑलटाइम लो
रुपया भी डॉलर के मुकाबले टूटकर 95.63 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया। कमजोर रुपये से विदेशी निवेशकों का भरोसा और कमजोर पड़ा। एफआईआई लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे। सोमवार को विदेशी निवेशकों ने 8437 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना रहा।
गिरते बाजार में ओएनजीसी और ऑयल इंडिया जैसे शेयर चमके। सरकारी रॉयल्टी कटौती के फैसले के बाद दोनों कंपनियों के शेयर 6 फीसदी से ज्यादा चढ़ गए। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया का तनाव कम नहीं होता और तेल की कीमतों में राहत नहीं मिलती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
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