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हर किसी के बालों पर अलग असर दिखाता है रीठा, इस्तेमाल से पहले जान लें ये जरूरी सावधानियां

नई दिल्ली, 12 मई (आईएएनएस)। बदलती जीवनशैली, धूल-मिट्टी, प्रदूषण, तनाव और कैमिकल वाले हेयर प्रोडक्ट्स की वजह से बालों की सेहत लगातार बुरा प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे में लोग अब फिर से प्राकृतिक चीजों की तरफ लौट रहे हैं। आयुर्वेद में रीठा को बालों की सफाई के लिए फायदेमंद बताया गया है। वहीं विज्ञान के मुताबिक रीठा में ऐसे प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं, जो बालों को मजबूती देते हैं, लेकिन यह हर किसी के बालों पर अलग असर दिखाता है, इसलिए इसके इस्तेमाल पर सावधानियां बरतनी चाहिए।

वैज्ञानिक रिसर्च के अनुसार, रीठा में सैपोनिन नाम का प्राकृतिक तत्व पाया जाता है, जो पानी के साथ मिलकर झाग बनाता है और सफाई करने का काम करता है। यह सिर में जमा धूल, पसीना और अतिरिक्त तेल हटाने में मदद करता है।

जब रीठा को पानी में भिगोकर या उबालकर उसके पानी से बाल धोए जाते हैं, तो यह सिर की त्वचा पर जमी गंदगी को हटाता है। गंदगी हटने पर बालों की ग्रोथ अच्छी होती है। अगर स्कैल्प पर ज्यादा तेल और गंदगी जमा हो जाए तो बाल कमजोर होने लगते हैं।

रूसी की समस्या से परेशान लोगों के लिए भी रीठा फायदेमंद माना जाता है। रूसी का एक बड़ा कारण सिर की त्वचा पर फंगल संक्रमण, ज्यादा तेल या मृत त्वचा का जमा होना होता है। रीठा सिर की त्वचा को साफ करती है, जिससे रूसी कम हो सकती है। हालांकि, अगर किसी को बहुत ज्यादा रूसी, खुजली या संक्रमण की समस्या हो, तो उसे डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

बालों की मजबूती को लेकर भी रीठा को काफी उपयोगी माना जाता है। जब सिर की त्वचा स्वस्थ रहती है तो बालों की जड़ें भी मजबूत बनी रहती हैं। रीठा के इस्तेमाल से बाल टूटने कम हो जाते हैं। लंबे समय तक रीठा का इस्तेमाल करने से बाल ज्यादा मुलायम और घने होते हैं। बालों का घना होना सिर्फ किसी एक चीज पर निर्भर नहीं करता। इसके पीछे खानपान, शरीर में पोषण की मात्रा, हार्मोन और जीवनशैली समेत अन्य चीजें भी अपना योगदान देती हैं।

अगर सिर में खुजली और जलन की समस्या हो, तो रीठा इसमें भी राहत पहुंचाता है। कुछ लोग इसे संवेदनशील त्वचा के लिए बेहतर विकल्प मानते हैं। इसके नियमित उपयोग से बालों में प्राकृतिक चमक भी दिखाई देती है।

हालांकि विशेषज्ञ कहते हैं कि हर व्यक्ति के बाल और त्वचा अलग होते हैं। इसलिए किसी भी प्राकृतिक चीज का उपयोग करने से पहले थोड़ी सावधानी जरूरी है। अगर रीठा लगाने के बाद खुजली, जलन या एलर्जी महसूस हो तो इसका इस्तेमाल तुरंत बंद कर देना चाहिए।

इसके अलावा, बहुत ज्यादा सूखे बालों वाले लोगों को इसे सीमित मात्रा में इस्तेमाल करना चाहिए।

--आईएएनएस

पीके/वीसी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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Delhi News: केजरीवाल ने देश के आर्थिक हालातों पर जताई चिंता, केंद्र की अपीलों को बताया गंभीर संकेत

Delhi News: आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को पार्टी मुख्यालय में एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता आयोजित की. इस दौरान उनके साथ दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज भी मौजूद रहे. केजरीवाल ने देश की वर्तमान आर्थिक स्थिति को लेकर गहरे सवाल उठाए और केंद्र सरकार से मांग की कि वह देश के आर्थिक हालात की पूरी और सही जानकारी जनता के साथ साझा करे. उन्होंने कहा कि देश के नागरिकों को यह जानने का पूरा हक है कि भारत की अर्थव्यवस्था किस दिशा में जा रही है और आने वाले समय में उन्हें किन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.

सरकारी अपीलों ने बढ़ाई चिंता

अरविंद केजरीवाल ने अपनी बात की शुरुआत हाल के दिनों में सरकार की ओर से जारी किए गए विभिन्न सुझावों और अपीलों से की. उन्होंने बताया कि सरकार लगातार लोगों से बचत और संयम बरतने की अपील कर रही है. इन सुझावों में वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देना, सोने की खरीद में कमी लाना, पेट्रोल और डीजल की बचत करना, सार्वजनिक परिवहन का अधिक इस्तेमाल करना और विदेशी उत्पादों व विदेश यात्राओं को सीमित करना शामिल है. केजरीवाल ने कहा कि ये सामान्य सुझाव नहीं हैं, बल्कि इस बात का संकेत हैं कि देश की अर्थव्यवस्था कहीं न कहीं बड़े दबाव में है. उन्होंने अंदेशा जताया कि आने वाले समय में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है.

जनता का सहयोग और पारदर्शिता की शर्त

प्रेस वार्ता के दौरान केजरीवाल ने स्पष्ट किया कि भारत के लोग हमेशा से ही राष्ट्रीय हित में सहयोग देने के लिए तत्पर रहते हैं. उन्होंने कहा कि यदि देश के सामने कोई बड़ा संकट है और उसके लिए कठिन फैसले लेने या त्याग करने की जरूरत है, तो देशवासी कभी पीछे नहीं हटेंगे. लेकिन, इसके लिए सरकार को ईमानदारी से सच बताना होगा. जनता को यह पता होना चाहिए कि आखिर इन पाबंदियों और अपीलों की आवश्यकता क्यों पड़ रही है. उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह वर्तमान आर्थिक चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं को लेकर एक स्पष्ट तस्वीर पेश करे ताकि समाज में किसी भी तरह के भ्रम या अफवाहों के लिए जगह न रहे.

वैश्विक तनाव और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

केजरीवाल ने इस बात को स्वीकार किया कि वर्तमान में पूरी दुनिया में तनाव का माहौल है और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का असर सभी देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि ऐसे कठिन समय में सरकार की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वह जनता के साथ सीधा संवाद बनाए रखे और भरोसे का वातावरण तैयार करे. उन्होंने जोर देकर कहा कि आर्थिक चुनौतियों का सामना करने की जिम्मेदारी केवल किसी एक वर्ग पर नहीं डाली जा सकती. समाज के सभी वर्गों को इसमें अपनी क्षमता के अनुसार योगदान देना चाहिए, लेकिन इसकी शुरुआत सरकार की ओर से पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए.

मध्यम वर्ग पर बढ़ता बोझ

प्रेस कॉन्फ्रेंस में अरविंद केजरीवाल ने विशेष रूप से मध्यम वर्ग की समस्याओं का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि जब भी सरकार की ओर से खर्चों में कटौती या बचत की अपील आती है, तो उसका सबसे सीधा और गहरा असर मिडिल क्लास पर पड़ता है. पेट्रोल-डीजल की बचत, निजी वाहनों का कम इस्तेमाल और विदेश यात्राओं पर रोक जैसे कदम सीधे तौर पर मध्यम वर्ग की जीवनशैली को प्रभावित करते हैं. केजरीवाल ने कहा कि यह वर्ग हमेशा से देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ रहा है और हर मुश्किल वक्त में साथ खड़ा रहा है. ऐसे में सरकार को इस वर्ग की भावनाओं और उनकी आर्थिक सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए.

सरकारी तंत्र को पेश करना होगा उदाहरण

अरविंद केजरीवाल ने यह सुझाव भी दिया कि आर्थिक संयम और संतुलन की जिम्मेदारी केवल आम जनता की नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकार, प्रशासनिक अधिकारियों और समाज के अत्यंत संपन्न वर्गों को भी अपनी फिजूलखर्ची पर लगाम लगानी चाहिए. जब सरकार और बड़े पदों पर बैठे लोग खुद बचत और सादगी का उदाहरण पेश करेंगे, तभी जनता के बीच एक सकारात्मक संदेश जाएगा. इससे सामूहिक भागीदारी की भावना पैदा होगी और लोग अधिक उत्साह के साथ देशहित में अपना योगदान देंगे.

संवाद और समान भागीदारी की जरूरत

प्रेस वार्ता के अंत में अरविंद केजरीवाल ने एक बार फिर इस बात को दोहराया कि देश की आर्थिक मजबूती केवल कागजी नीतियों से नहीं आ सकती. इसके लिए सरकार और जनता के बीच गहरा तालमेल और भरोसा होना जरूरी है. उन्होंने कहा कि आज के समय में पारदर्शिता, खुला संवाद और हर वर्ग की समान भागीदारी सबसे बड़ी आवश्यकता है. केजरीवाल ने उम्मीद जताई कि सरकार उनकी इस अपील को गंभीरता से लेगी और जल्द ही देश की आर्थिक स्थिति को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट या जानकारी सार्वजनिक करेगी ताकि सभी लोग मिलकर देश को आर्थिक मजबूती की ओर ले जा सकें.

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