Delhi News: केजरीवाल ने देश के आर्थिक हालातों पर जताई चिंता, केंद्र की अपीलों को बताया गंभीर संकेत
Delhi News: आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को पार्टी मुख्यालय में एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता आयोजित की. इस दौरान उनके साथ दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज भी मौजूद रहे. केजरीवाल ने देश की वर्तमान आर्थिक स्थिति को लेकर गहरे सवाल उठाए और केंद्र सरकार से मांग की कि वह देश के आर्थिक हालात की पूरी और सही जानकारी जनता के साथ साझा करे. उन्होंने कहा कि देश के नागरिकों को यह जानने का पूरा हक है कि भारत की अर्थव्यवस्था किस दिशा में जा रही है और आने वाले समय में उन्हें किन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.
सरकारी अपीलों ने बढ़ाई चिंता
अरविंद केजरीवाल ने अपनी बात की शुरुआत हाल के दिनों में सरकार की ओर से जारी किए गए विभिन्न सुझावों और अपीलों से की. उन्होंने बताया कि सरकार लगातार लोगों से बचत और संयम बरतने की अपील कर रही है. इन सुझावों में वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देना, सोने की खरीद में कमी लाना, पेट्रोल और डीजल की बचत करना, सार्वजनिक परिवहन का अधिक इस्तेमाल करना और विदेशी उत्पादों व विदेश यात्राओं को सीमित करना शामिल है. केजरीवाल ने कहा कि ये सामान्य सुझाव नहीं हैं, बल्कि इस बात का संकेत हैं कि देश की अर्थव्यवस्था कहीं न कहीं बड़े दबाव में है. उन्होंने अंदेशा जताया कि आने वाले समय में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है.
जनता का सहयोग और पारदर्शिता की शर्त
प्रेस वार्ता के दौरान केजरीवाल ने स्पष्ट किया कि भारत के लोग हमेशा से ही राष्ट्रीय हित में सहयोग देने के लिए तत्पर रहते हैं. उन्होंने कहा कि यदि देश के सामने कोई बड़ा संकट है और उसके लिए कठिन फैसले लेने या त्याग करने की जरूरत है, तो देशवासी कभी पीछे नहीं हटेंगे. लेकिन, इसके लिए सरकार को ईमानदारी से सच बताना होगा. जनता को यह पता होना चाहिए कि आखिर इन पाबंदियों और अपीलों की आवश्यकता क्यों पड़ रही है. उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह वर्तमान आर्थिक चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं को लेकर एक स्पष्ट तस्वीर पेश करे ताकि समाज में किसी भी तरह के भ्रम या अफवाहों के लिए जगह न रहे.
वैश्विक तनाव और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
केजरीवाल ने इस बात को स्वीकार किया कि वर्तमान में पूरी दुनिया में तनाव का माहौल है और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का असर सभी देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि ऐसे कठिन समय में सरकार की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वह जनता के साथ सीधा संवाद बनाए रखे और भरोसे का वातावरण तैयार करे. उन्होंने जोर देकर कहा कि आर्थिक चुनौतियों का सामना करने की जिम्मेदारी केवल किसी एक वर्ग पर नहीं डाली जा सकती. समाज के सभी वर्गों को इसमें अपनी क्षमता के अनुसार योगदान देना चाहिए, लेकिन इसकी शुरुआत सरकार की ओर से पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए.
मध्यम वर्ग पर बढ़ता बोझ
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अरविंद केजरीवाल ने विशेष रूप से मध्यम वर्ग की समस्याओं का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि जब भी सरकार की ओर से खर्चों में कटौती या बचत की अपील आती है, तो उसका सबसे सीधा और गहरा असर मिडिल क्लास पर पड़ता है. पेट्रोल-डीजल की बचत, निजी वाहनों का कम इस्तेमाल और विदेश यात्राओं पर रोक जैसे कदम सीधे तौर पर मध्यम वर्ग की जीवनशैली को प्रभावित करते हैं. केजरीवाल ने कहा कि यह वर्ग हमेशा से देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ रहा है और हर मुश्किल वक्त में साथ खड़ा रहा है. ऐसे में सरकार को इस वर्ग की भावनाओं और उनकी आर्थिक सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए.
सरकारी तंत्र को पेश करना होगा उदाहरण
अरविंद केजरीवाल ने यह सुझाव भी दिया कि आर्थिक संयम और संतुलन की जिम्मेदारी केवल आम जनता की नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकार, प्रशासनिक अधिकारियों और समाज के अत्यंत संपन्न वर्गों को भी अपनी फिजूलखर्ची पर लगाम लगानी चाहिए. जब सरकार और बड़े पदों पर बैठे लोग खुद बचत और सादगी का उदाहरण पेश करेंगे, तभी जनता के बीच एक सकारात्मक संदेश जाएगा. इससे सामूहिक भागीदारी की भावना पैदा होगी और लोग अधिक उत्साह के साथ देशहित में अपना योगदान देंगे.
संवाद और समान भागीदारी की जरूरत
प्रेस वार्ता के अंत में अरविंद केजरीवाल ने एक बार फिर इस बात को दोहराया कि देश की आर्थिक मजबूती केवल कागजी नीतियों से नहीं आ सकती. इसके लिए सरकार और जनता के बीच गहरा तालमेल और भरोसा होना जरूरी है. उन्होंने कहा कि आज के समय में पारदर्शिता, खुला संवाद और हर वर्ग की समान भागीदारी सबसे बड़ी आवश्यकता है. केजरीवाल ने उम्मीद जताई कि सरकार उनकी इस अपील को गंभीरता से लेगी और जल्द ही देश की आर्थिक स्थिति को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट या जानकारी सार्वजनिक करेगी ताकि सभी लोग मिलकर देश को आर्थिक मजबूती की ओर ले जा सकें.
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अदाणी पोर्ट्स की सब्सिडियरी ने अमेरिकी कंपनी ओशनियरिंग के साथ किया समझौता, डीपवॉटर कारोबार को मिलेगा बड़ा विस्तार
नई दिल्ली, 12 मई (आईएएनएस)। अदाणी ग्रुप की प्रमुख कंपनी अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (एपीएसईजेड) ने मंगलवार को कहा कि उसकी समुद्री क्षेत्र की सब्सिडियरी एस्ट्रो ऑफशोर ने अमेरिका की इंजीनियरिंग और एप्लाइड टेक्नोलॉजी कंपनी ओशनियरिंग इंटरनेशनल इंक. के साथ साझेदारी की है। इस समझौते का उद्देश्य अल्ट्रा-डीपवॉटर और सबसी ऑपरेशंस में विस्तार करना है, जिसे कंपनी की वैश्विक ऑफशोर ग्रोथ रणनीति में बड़ा कदम माना जा रहा है।
दोनों कंपनियों के बीच हुआ यह समझौता यूरोप में विशेष ऑफशोर अवसरों का लाभ उठाने और जटिल सबसी इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स में क्षमताओं को मजबूत करने के लिए किया गया है, जिसमें अंडरवॉटर कंस्ट्रक्शन, पाइपलाइन इंस्टॉलेशन, निरीक्षण और रखरखाव जैसे काम शामिल हैं।
यह कदम एपीएसईजेड की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत कंपनी लॉजिस्टिक्स, ऑफशोर सपोर्ट सर्विसेज और डीपवॉटर इंफ्रास्ट्रक्चर सॉल्यूशंस को मिलाकर एक वैश्विक समुद्री प्लेटफॉर्म तैयार करना चाहती है।
अपने विस्तार अभियान के तहत एस्ट्रो ऑफशोर ने अपना पहला अल्ट्रा-डीपवॉटर जहाज एस्ट्रो ऑफशोर शामिल किया है। इससे कंपनी की आधुनिक तकनीक और हाई-स्पेसिफिकेशन वाले नए बेड़े को मजबूत करने की रणनीति को बल मिलेगा।
एपीएसईजेड के पूर्णकालिक निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अश्वनी गुप्ता ने कहा कि यह साझेदारी कंपनी के वैश्विक स्तर पर विविधीकृत समुद्री प्लेटफॉर्म बनाने के लक्ष्य को समर्थन देती है।
उन्होंने कहा कि एस्ट्रो ऑफशोर के आधुनिक जहाजों और ओशनियरिंग की डीपवॉटर इंजीनियरिंग तथा आरओवी विशेषज्ञता को मिलाकर कंपनी जटिल ऑफशोर ऑपरेशंस में अपनी क्षमताएं बढ़ा रही है और यूरोप में भी विस्तार कर रही है।
एस्ट्रो ऑफशोर के सीईओ मार्क हम्फ्रीज ने कहा कि एस्ट्रो एटलस के जुड़ने से कंपनी की अल्ट्रा-डीपवॉटर क्षमताएं और मजबूत हुई हैं। इससे कंपनी ऑफशोर क्षेत्र की व्यापक जरूरतों को पूरा कर सकेगी।
उन्होंने कहा, यह अब तक हमारा सबसे बड़ा और सबसे सक्षम जहाज है, जो हमें जटिल ऑफशोर ऑपरेशंस को बेहतर तरीके से संभालने और ग्राहकों की बदलती जरूरतों के अनुसार सेवाएं देने में मदद करेगा।
इसके अलावा, 97 मीटर लंबा डीपी2 मल्टीपर्पज सपोर्ट वेसल (पूर्व नाम एनर्जी सवाना) अत्याधुनिक सबसी सिस्टम से लैस है। इसमें 150 टन क्षमता वाली क्रेन, दूसरी क्रेन, मूनपूल और 100 लोगों तक के रहने की सुविधा मौजूद है।
कंपनी ने बताया कि यह जहाज 3,000 मीटर से अधिक गहराई वाले समुद्री क्षेत्रों में काम करने में सक्षम है।
यह साझेदारी ऐसे समय में हुई है जब एपीएसईजेड अपने समुद्री कारोबार को वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ाने की दीर्घकालिक रणनीति पर काम कर रही है। कंपनी का लक्ष्य वित्त वर्ष 2031 तक 200 जहाजों का बेड़ा तैयार करना, समुद्री कारोबार से 6,000 करोड़ रुपए का राजस्व हासिल करना और 13,000 करोड़ रुपए का पूंजीगत निवेश करना है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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