CUET UG 2026 Exam: लाखों छात्रों का इंतजार खत्म! आज से सीयूईटी-यूजी परीक्षा शुरू, सेंटर पर जाने से पहले जरूर पढ़ें गाइडलाइन
CUET UG 2026 Exam: देशभर के लाखों छात्रों का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है. कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट यानी CUET-UG 2026 की परीक्षा आज 11 मई से शुरू हो गई है. यह परीक्षा 31 मई तक आयोजित की जाएगी. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की ओर से आयोजित इस परीक्षा में इस बार 15.68 लाख से ज्यादा अभ्यर्थी शामिल हो रहे हैं. सीयूईटी-यूजी देश की सबसे बड़ी कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं में शामिल हो चुकी है. इस परीक्षा के जरिए छात्र देश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों और कई अन्य संस्थानों में दाखिला ले सकेंगे. परीक्षा भारत के साथ-साथ विदेशों के कई शहरों में भी आयोजित की जा रही है.
विदेशों में भी आयोजित हो रही परीक्षा
सीयूईटी-यूजी 2026 सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है. यह परीक्षा 13 देशों के 14 अंतरराष्ट्रीय शहरों में भी कराई जा रही है. इनमें यूएई के शारजाह और अबू धाबी, सऊदी अरब का रियाद, कुवैत, नेपाल का काठमांडू, कतर का दोहा, ओमान का मस्कट, बहरीन का मनामा, सिंगापुर, मलेशिया का कुआलालंपुर और अमेरिका का वाशिंगटन डीसी शामिल हैं. इससे विदेशों में रहने वाले भारतीय छात्रों को भी परीक्षा देने में सुविधा मिलेगी.
कितने शिफ्ट में आयोजित होगी परीक्षा
एनटीए ने परीक्षा को दो शिफ्ट में आयोजित करने का फैसला किया है. पहली शिफ्ट सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक चलेगी. वहीं दूसरी शिफ्ट दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक होगी. उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे परीक्षा शुरू होने से कम से कम 1 से 2 घंटे पहले एग्जाम सेंटर पहुंच जाएं। गेट बंद होने के बाद किसी भी छात्र को प्रवेश नहीं मिलेगा.
क्या रहेगा परीक्षा पैटर्न?
सीयूईटी-यूजी 2026 परीक्षा 13 भाषाओं, 23 डोमेन विषयों और जनरल एप्टीट्यूड टेस्ट के लिए आयोजित की जा रही है. हर विषय में कुल 50 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे। प्रत्येक पेपर के लिए 60 मिनट का समय दिया जाएगा. भाषा सेक्शन में रीडिंग कॉम्प्रिहेंशन आधारित सवाल आएंगे. डोमेन विषयों के प्रश्न एनसीईआरटी कक्षा 12 के सिलेबस पर आधारित होंगे. वहीं जनरल एप्टीट्यूड टेस्ट में जनरल नॉलेज, करंट अफेयर्स, लॉजिकल रीजनिंग और बेसिक मैथ्स से जुड़े प्रश्न पूछे जाएंगे.
एग्जाम सेंटर पर क्या ले जाना जरूरी है?
एनटीए की गाइडलाइन के अनुसार छात्रों को परीक्षा केंद्र पर कुछ जरूरी दस्तावेज साथ ले जाने होंगे. इनमें शामिल हैं: CUET UG 2026 एडमिट कार्ड की हार्ड कॉपी, सेल्फ डिक्लेरेशन फॉर्म, वैध फोटो आईडी प्रूफ, दो पासपोर्ट साइज फोटो. इसके अलावा उम्मीदवार ट्रांसपेरेंट पानी की बोतल और ट्रांसपेरेंट बॉल पेन साथ ले जा सकते हैं. पीडब्ल्यूडी और पीडब्ल्यूबीडी उम्मीदवारों को अपना प्रमाण पत्र साथ रखना जरूरी होगा. वहीं डायबिटीज से पीड़ित छात्रों को जरूरी दवाइयां और खाने-पीने की चीजें ले जाने की अनुमति दी गई है.
इन चीजों पर पूरी तरह प्रतिबंध
परीक्षा केंद्र के अंदर कई चीजों को ले जाने पर सख्त रोक लगाई गई है. छात्र मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, ब्लूटूथ डिवाइस, कैलकुलेटर या कोई भी इलेक्ट्रॉनिक सामान अंदर नहीं ले जा सकते. इसके अलावा नोट्स, किताबें, लिखित सामग्री, बैग, पर्स, बेल्ट, गॉगल्स और भारी ज्वेलरी पर भी प्रतिबंध रहेगा. नियमों का उल्लंघन करने पर उम्मीदवार को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं मिलेगा.
ड्रेस कोड का भी रखना होगा ध्यान
एनटीए ने छात्रों को हल्के और साधारण कपड़े पहनकर आने की सलाह दी है. ज्यादा पॉकेट वाले कपड़े, बड़े बटन और भारी एक्सेसरीज पहनने से बचने को कहा गया है. साधारण चप्पल या लो हील फुटवियर पहनने की अनुमति होगी. धार्मिक आस्था से जुड़ी चीजें पहनने की छूट दी गई है. हालांकि ऐसे छात्रों को जांच प्रक्रिया के लिए समय से पहले पहुंचना होगा. एनटीए ने साफ किया है कि ‘कलावा’ जैसे धार्मिक धागे पहनने की अनुमति रहेगी.
सीटिंग और रिपोर्टिंग को लेकर जरूरी निर्देश
परीक्षा हॉल में छात्रों को रोल नंबर के आधार पर सीट आवंटित की जाएगी. उम्मीदवारों को केवल अपनी निर्धारित सीट पर ही बैठना होगा. एंट्री गेट परीक्षा शुरू होने से लगभग 30 मिनट पहले बंद कर दिए जाएंगे. इसलिए छात्रों को एडमिट कार्ड पर दिए गए सेंटर का पता और शिफ्ट टाइमिंग पहले ही जांच लेने की सलाह दी गई है.
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इस्लामिक स्टेट का खतरनाक प्लान, विदेशी मॉडयूल के जरिए भारत में कराना चाहता है श्रीलंका जैसे हमले
नई दिल्ली, 11 मई (आईएएनएस)। आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने भारत के खिलाफ एक नई रणनीति तैयार की है। इसके तहत वो हिंदुस्तान के इर्द-गिर्द स्थित देशों में मौजूद अपने चरमपंथी तत्वों का इस्तेमाल भारत के भीतर दुष्प्रचार और आतंकी हमले के लिए करेगा।
जब 2013 के अंत में इस्लामिक स्टेट ने वैश्विक स्तर पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी, तब भारत से भी कई लोग संगठन में शामिल होने के लिए देश छोड़कर चले गए थे। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में भारतीय एजेंसियों ने कई लोगों को सीरिया, इराक और अफगानिस्तान जाकर संगठन में शामिल होने से रोकने में सफलता हासिल की है।
साथ ही, सफल डी-रेडिकलाइजेशन अभियानों के जरिए उन लोगों को भी मुख्यधारा में वापस लाया गया, जो संगठन में शामिल होने की योजना बना रहे थे।
एक खुफिया ब्यूरो कर्मी के अनुसार, भारत में यह समस्या काफी हद तक नियंत्रण में है, लेकिन अब संगठन अन्य देशों से कट्टरपंथी तत्वों को भारत में भेजने की कोशिश कर रहा है।
इस्लामिक स्टेट ने पाकिस्तान, बांग्लादेश, मालदीव और श्रीलंका में अपने अलग-अलग मॉड्यूल स्थापित कर रखे हैं।
श्रीलंका मॉड्यूल का असर तमिलनाडु और मंगलुरु में देखने को मिला था। दोनों जगहों पर इस्लामिक स्टेट से प्रभावित कट्टरपंथी व्यक्तियों ने हमले की कोशिश की थी, हालांकि वे असफल रहे।
इन मामलों में समानता यह थी कि आरोपी जेमेशा मुबीन और मोहम्मद शारिक, दोनों को श्रीलंका के एक ही व्यक्ति ने कट्टरपंथी बनाया था। श्रीलंका में हुए ‘ईस्टर बम धमाकों’ का मास्टरमाइंड जहरान हाशिम वहां इस्लामिक स्टेट का प्रमुख था। वह दक्षिण भारत आया था और काफी समय तक यहां रहा था, इसी दौरान उसने मुबीन और शारिक को कट्टरपंथी बनाया।
आधिकारिक सूत्र ने आगे कहा कि बांग्लादेश में मौजूद मॉड्यूल पश्चिम बंगाल और बिहार में रिक्रूट्स को भेजने पर ज्यादा केंद्रित हैं। दूसरी ओर, दक्षिणी राज्यों में श्रीलंका और मालदीव के जरिए चरमपंथी तत्वों को भेजने की तैयारी है।
अधिकारी ने इसे खतरनाक बताते हुए आगे कहा कि बांग्लादेश को इसके लिए सबसे मुफीद माना जा रहा है। इस्लामिक स्टेट के मुख पत्र, दाबिक के हाल के संस्करण में बंगाल में जिहाद का फिर से शुरू होना शीर्षक से एक लेख छपा था, जिसका मकसद युवाओं को जिहाद के लिए उकसाना था।
अधिकारियों का कहना है कि यह पहली बार था जब बांग्लादेश में इस्लामिक स्टेट मॉड्यूल भारत में अपना एजेंडा आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा था।
एक और अधिकारी ने कहा कि श्रीलंका से खतरा सबसे कम है। ईस्टर बम धमाकों के बाद, इस गुट का एक बड़ा हिस्सा खत्म हो गया है, हालांकि यह मानना गलत होगा कि गुट ने देश में अपनी दुकान बंद कर दी है। अधिकारी ने आगे कहा कि यही वजह है कि मालदीव से दक्षिण भारत में बड़ी कोशिश की जा रही है।
इसका मकसद भारत में उसी पैमाने पर हमले का है जैसे श्रीलंका में किए गए थे। इस्लामिक स्टेट चाहता है कि हमले विदेशी चरमपंथी करें। इसके दो कारण बताए जा रहे हैं। पहला, विदेशी लड़ाकों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। इसके अलावा, यह भी देखा गया है कि भारत की तुलना में विदेशी लड़ाकों को कट्टरपंथ की ओर धकेलना ज्यादा आसान होता है।
खुफिया एजेंसियों का कहना है कि मकसद भारत में बड़ा हमला करना है, लेकिन दूसरा प्लान इसे रिक्रूटमेंट टूल (भर्ती करने के टूल) के तौर पर इस्तेमाल करना है।
इस्लामिक स्टेट अपने कुछ भारतीय मॉड्यूल को भारत में हमले करने के लिए उकसा रहा है, लेकिन वे कई बार विफल हो चुके हैं। इस्लामिक स्टेट को लगता है कि विदेशी मॉड्यूल के हमले एक मिसाल बन सकते हैं और भारतीय ऑपरेटिव्स को देश के भीतर हमले करने को प्रेरित कर सकते हैं।
--आईएएनएस
केआर/
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