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BRICS Summit 2026: भारत आएंगे ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची, दिल्ली में होने वाली ब्रिक्स बैठक में होंगे शामिल

BRICS Summit 2026: पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ते तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के बीच ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची (Seyed Abbas Araghchi) इस सप्ताह भारत के दौरे पर आ रहे हैं। वे नई दिल्ली में आयोजित होने वाली ब्रिक्स (BRICS) विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेंगे। ईरान के विदेश मंत्री की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष गहराया हुआ है। यह बैठक सितंबर में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की आधारशिला रखेगी, जिसमें दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के नेता शामिल होंगे।

पश्चिम एशिया संकट पर एस जयशंकर से होगी चर्चा
18 फरवरी को अमेरिका-ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से अब्बास अराघची और भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के बीच कम से कम चार बार टेलीफोन पर बातचीत हो चुकी है। इस दौरान अराघची ने जयशंकर को पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और तेहरान पर हुए अमेरिकी व इजरायली हमलों के बारे में जानकारी दी थी। दिल्ली दौरे के दौरान दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता होने की संभावना है, जिसमें क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा पर गंभीर चर्चा होगी।

ब्रिक्स देशों से समन्वय की अपील
ईरानी विदेश मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए ब्रिक्स देशों के बीच बेहतर तालमेल और समन्वय का आह्वान किया है। उन्होंने बार-बार इस बात को दोहराया है कि ईरान "आत्मरक्षा के अपने वैध अधिकार" का प्रयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है। दिल्ली में होने वाली बैठक में ईरान, ब्रिक्स के मंच से वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकता है और सदस्य देशों से सहयोग की उम्मीद कर सकता है।

भारत-ईरान संबंधों का नया अध्याय
अब्बास अराघची इससे पहले मई 2025 में दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर भारत आए थे। वह उनकी कार्यभार संभालने के बाद पहली भारत यात्रा थी, जो भारत-ईरान मैत्री संधि (Friendship Treaty) की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित की गई थी। उस दौरान उन्होंने 20वीं भारत-ईरान संयुक्त आयोग की बैठक की सह-अध्यक्षता की थी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मुलाकात की थी।

सितंबर में होने वाले शिखर सम्मेलन की तैयारी
दिल्ली में होने वाली यह बैठक केवल विदेश मंत्रियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सितंबर में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की रूपरेखा तैयार करेगी। बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के दौर में भारत का ब्रिक्स की अध्यक्षता करना और ईरान जैसे महत्वपूर्ण देश का इसमें सक्रिय भागीदारी निभाना, वैश्विक कूटनीति के केंद्र को पश्चिम से पूर्व की ओर स्थानांतरित करने का संकेत देता है।

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World Lupus Day: क्यों महिलाओं के लिए 'साइलेंट किलर' है Lupus? जानें Hormones का पूरा खेल

आज है  World Lupus Day मनाया जा रहा है। यह प्रकार से ऐसी ऑटोइम्यून बीमारी है, जो पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को ज्यादा प्रभावित करती है। इस बीमारी का खतरा सबसे ज्यादा महिलाओं को होता है। खासतौर पर इस बीमारी के बारे में लोगों को कुछ पता ही नहीं है और इसके संकेतों पर ध्यान भी नहीं जाता है। अगर समय रहते हुए इस पर ध्यान दिया जाए तो इस बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है। सही समय पर इस बीमारी का पता लग जाए तो इस शरीर के अंगों तक पहुंचने से पहले इसे रोकने पर ध्यान दिया जाए, तो ट्रीटमेंट आसान हो जाता है। यह बीमारी महिलाओं को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है। आइए आपको बताते हैं किन लक्षणों से पर ध्यान देना जरुरी है। 

ल्यूपस के इन शुरुआती संकेतों पर जरूर दें ध्यान

    - ल्यूपस के शुरुआती संकेतों पर ध्यान देना जरुर दें। यदि इसे समय रहते हुए ध्यान न दिया जाए, तो यह किडनी, हार्ट और बाकी अंगों को प्रभावित कर सकता है।

 - इसका सबसे बड़ा लक्षण जोड़ों का दर्द है। उंगलियों, कलाई और घुटनों के आसा-पास सूजन और दर्द ल्यूपस का संकेत हो सकता है।

 - ल्यूपस आर्थराइटिस पर जोड़ों में विकृति पैदा नहीं करती है। यह न तो रुमेटीइड है और न ही ऑस्टियोआर्थराइटिस है।

 - इसके अतिरिक्त चेहरे पर आने वाले लाल रैशेज भी इसका संकेत हो सकते हैं। आमतौर पर नाक और गालों पर आने वाले बटरफ्लाई रैश इसके शुरुआती लक्षण माने जाते हैं।

 - ये रैशेज, हाथ, पैर और शरीर के बाकी अंगों पर भी हो सकते हैं। वहीं, ये रैशेज सूरज की रोशनी में ज्यादा दिक्कत देते हैं। 

 - यदि आपके बाल तेजी से झड़ रहे है और स्कैल्प पर भी रैशेज नजर आते हैं, तो इसे भी नजरअंदाज न करें। इसके अतिरिक्त ओरल अल्सर, बुखार, वजन कम होना और गर्दन के पास लिम्फ नोड्स में सूजन रहना, ये इसी बीमारी के संकेत हैं।

 - उंगलियों और नाखूनों के आसपास की त्वचा का रंग बदलना भी सही नहीं है। हाई ब्लड प्रेशर और पफीनेस पर ध्यान देना जरुरी है।

महिलाओं में क्यो ज्यादा होता है ल्यूपस का खतरा?

 रिसर्च के अनुसार, ल्यूपस महिलाओं को सबसे अधिक परेशान करता है। इतना ही नहीं, इसका खतरा टीनएज से लेकर 30 साल तक की महिलाओं में होता है। महिलाओं में एस्ट्रोजन का लेवल रिप्रोडक्टिव सालों में ज्यादा होता है और इसके उतार-चढ़ाव के चलते इम्यून सिस्टम प्रभावित करता है। इसके अलावा, प्रेग्नेंसी और पीरियड्स में होने वाला हार्मोनल इंबैलेंस होता है। वैसे जेनेटिक कारणों से भी हो सकता है। 

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  Sports

वेपिंग के विवाद, VIP पास की आड़ में बढ़ती पहुंच, हनी ट्रैप की सुगबुगाहट, IPL के आसपास 'डर्टी गेम' की बढती परछाई

वेपिंग के विवाद, VIP पास की आड़ में बढ़ती पहुंच, और हनी ट्रैप जैसे खतरों ने इस चमचमाती लीग की परछाईं को थोड़ा धुंधला कर दिया है.  सवाल यह है कि क्या इंडियन प्रीमियर लीग अब सिर्फ क्रिकेट तक सीमित रह गया है, या इसके आसपास एक “डर्टी गेम” भी आकार ले चुका है? Mon, 11 May 2026 15:24:35 +0530

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