नोएल टाटा ने वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह की टीईडीटी में पुनर्नियुक्ति का विरोध किया: रिपोर्ट
नई दिल्ली, 11 मई (आईएएनएस)। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने टाटा एजुकेशन एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट (टीईडीटी) के ट्रस्टी के रूप में वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह की पुनर्नियुक्ति के खिलाफ मतदान किया है। यह जानकारी कई रिपोर्ट्स में दी गई।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, नोएल टाटा ने मतदान की निर्धारित समय सीमा समाप्त होने से एक दिन पहले अपना वोट डाला था। पुनर्नियुक्तियों के लिए सर्वसम्मति आवश्यक थी, जिससे दोनों की टीईडीटी में पुनर्नियुक्ति अब संभव नहीं है।
खबरों के अनुसार, श्रीनिवासन और सिंह अपने वर्तमान कार्यकाल की समाप्ति के बाद टीईडीटी से इस्तीफा दे देंगे।
यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पहले भी नोएल टाटा ने शासन संबंधी मामलों पर सीनियर ट्रस्टी के साथ आम सहमति बनाए रखी थी।
टाटा ट्रस्ट्स के भीतर नेतृत्व और निगरानी को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच उनके पुनर्नियुक्तियों का विरोध करने को एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
इसके अलावा, टीईडीटी टाटा ट्रस्ट्स के अंतर्गत संचालित प्रमुख धर्मार्थ संस्थाओं में से एक है और छात्रवृत्ति और शैक्षणिक सहायता कार्यक्रमों जैसी कई शिक्षा-केंद्रित पहलें चलाती है।
हालांकि टाटा संस में इसकी कोई इक्विटी हिस्सेदारी नहीं है, फिर भी यह ट्रस्ट एक बड़ी धनराशि का प्रबंधन करता है और समूह के परोपकारी नेटवर्क में एक प्रभावशाली संस्था बना हुआ है।
यह ताजा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब टाटा ट्रस्ट्स में शासन से संबंधित व्यापक विचार-विमर्श चल रहा है।
इसके अलावा, सीनियर ट्रस्टी टाटा संस बोर्ड में प्रतिनिधित्व, कुछ समूह कंपनियों के प्रदर्शन और भविष्य के नेतृत्व से संबंधित मामलों की समीक्षा करने वाले हैं।
यह भी माना जा रहा है कि चर्चाओं में टाइटन कंपनी के पूर्व प्रबंध निदेशक भास्कर भट्ट को टाटा संस बोर्ड में शामिल करने की संभावना भी शामिल है।
साथ ही, टाटा संस बोर्ड में टाटा ट्रस्ट्स के नामित निदेशक के रूप में श्रीनिवासन की भूमिका की भी समीक्षा की जा रही है।
इससे पहले, ट्रस्टी मेहली मिस्त्री और जे.एन. मिस्त्री ने भी कथित तौर पर प्रस्तावों के खिलाफ मतदान किया था।
सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट की बैठकें - जो मूल रूप से इस महीने की शुरुआत में होने वाली थीं - 16 मई के लिए पुनर्निर्धारित की गई हैं।
--आईएएनएस
एबीएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
‘ट्रंप का पूरा कार्यकाल थेरेपी सेशन है’, ईरान के नए प्रस्ताव को खारिज करने पर ईरानी दूतावास ने कसा तंज
तेहरान, 11 मई (आईएएनएस)। ईरान ने अमेरिका के 14 पाइंट वाले प्रस्ताव को रिजेक्ट कर दिया और एक नया ड्राफ्ट प्रस्ताव वाशिंगटन को भेजा। हालांकि, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नए ड्राफ्ट को सिरे से खारिज कर दिया। वहीं भारत में ईरान के दूतावास ने अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है।
ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, अमेरिका के प्लान पर ईरान के जवाब की डिटेल्स, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति ने मंजूर नहीं कहा। अमेरिका के प्लान के जवाब में पेश किया गया ईरान का प्रस्ताव, ईरानी देश के मूल अधिकारों पर जोर देता है। ईरान ने अमेरिका के प्लान को रिजेक्ट कर दिया है। अगर ईरान प्रस्ताव स्वीकार कर लेता, तो इसका मतलब होता कि तेहरान ट्रंप की बहुत ज्यादा मांगों के आगे झुक जाता है।
ईरानी दूतावास ने आगे कहा, ईरान का प्लान इस बात पर जोर देता है कि अमेरिका को युद्ध का हर्जाना देना जरूरी है और होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की संप्रभुता को सुनिश्चित करता है। ईरान ने बैन खत्म करने और देश के जब्त किए गए एसेट्स और संपत्तियों को रिलीज करने की जरूरत पर जोर दिया है।
वहीं घाना में ईरानी दूतावास ने ट्रंप के एक बयान पर तंज कसते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति का दावा है कि उन्होंने कुछ पढ़ा है, जबकि वास्तविकता यह है कि उस सामग्री का मूल सार उनके लिए अब भी एक रहस्य बना हुआ है। इसके बावजूद वे इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि उन्हें वह पसंद नहीं आया। कहा जा रहा है कि ट्रंप केवल वैश्विक ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। व्हाइट हाउस के आंतरिक सूत्रों ने भी इसकी पुष्टि की है कि उनका पूरा कार्यकाल दरअसल एक मल्टी-बिलियन डॉलर थेरेपी सेशन के अतिरिक्त और कुछ नहीं है, एक ऐसा उपचार, जो उन्हें उनके बचपन के दिनों में कभी प्राप्त नहीं हो सका।
दरअसल, ईरान की तरफ से भेजे गए प्रस्ताव को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ने ट्रूथ सोशल पर पोस्ट किया था कि मैंने अभी-अभी ईरान के तथाकथित प्रतिनिधियों का जवाब पढ़ा है। मुझे यह पसंद नहीं आया, बिल्कुल मंजूर नहीं!
ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर आईआरआईबी ने अपने टेलीग्राम चैनल पर कहा कि अमेरिका के प्लान का मतलब है ईरान का ट्रंप के लालच के आगे सरेंडर करना और तेहरान का जवाब ईरान के बुनियादी अधिकारों पर जोर देता है।
इसके साथ ही ईरान के नए प्रस्ताव में अमेरिका द्वारा युद्ध के मुआवजे की जरूरत और होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की संप्रभुता पर भी जोर दिया गया है। वहीं प्रतिबंधों को खत्म करने और देश के जब्त किए गए पैसे और संपत्ति को वापस करने की जरूरत पर भी जोर देता है।
--आईएएनएस
केके/एएस
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