West Bengal Election में बड़ा विवाद, लाखों वोटर लिस्ट से बाहर; मतदान के दिन हुआ हंगामा...
West Bengal Election Voter List Controversy: पहले चरण के मतदान के दिन गुरुवार को वेस्ट बंगाल के मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें दिखीं. कुद बूथों पर नाम वोटर लिस्ट में नहीं होने से लोगों को परेशानी हुई. इसके अलावा कुछ इलाकों से कार्यकर्ताओं के बीच झड़प की खबरें हैं.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में आज पहले चरण की वोटिंग जोर शोर से चल रही है. मतदान केंद्रों पर सुबह से ही लंबी कतारें हैं, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. कुछ जगहों से टीएमसी और हुमायूं कबीर की पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प की खबरें आ रही हैं. इस बीच एक और वजह है जो मतदान के दौरान चर्चा का विषय बना हुआ है. वह है वोटिंग से पहले चुनाव आयोग का स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के तहत राज्य की वोटर लिस्ट से करीब 91 लाख नाम हटा देना.
27 लाख के मामले अभी ट्रिब्यूनल में लंबित हैं
मतदाताओं के नाम काटने पर टीएमसी का आरोप है कि ये 91 लाख लोग कुल मतदाताओं का लगभग 12 फीसदी हिस्सा हैं. इनमें से 63 लाख को मृत या अनुपस्थित बताकर लिस्ट से हटाया गया जबकि करीब 27 लाख के मामले अभी ट्रिब्यूनल में लंबित हैं.
वोटर कार्ड होने के बाद भी लोग नहीं दे पा रहे वोट, कई जगह हंगामा...
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वेस्ट बंगाल में पहले चरण के मतदान में कई बूथ पर लोगों ने पहचान पत्र होते हुए भी वोट देने से रोके जाने और मतदान सूची में नाम काटे जाने का आरोप लगाया. टीएमसी नेताओं का आरोप है कि राज्य में निष्पक्ष चुनाव नहीं हो रहे हैं.
मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर 24 परगना में हंगामा
मुर्शिदाबाद में हिंसक झड़प और पथराव की सूचना है, कई जगह टीएमसी कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया. मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर 24 परगना के इलाके पुलिस छावनी में तब्दील हैं और संवेदनशील बूथों के बाहर सुरक्षा बढ़ाई गई है. जानकारी के अनुसार मुर्शिदाबाद में 4.6 लाख, उत्तर 24 परगना में 3.3 लाख और मालदा में 2.4 लाख नाम हटाए गए। इन इलाकों में मुस्लिम आबादी का बड़ा हिस्सा रहता है.
खबर अपडेट की जा रही है
केंद्र ने पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ने वाली रिपोर्ट्स को खारिज किया, कहा-ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं
नई दिल्ली, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने गुरुवार को उन रिपोर्ट्स को खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया गया था कि वर्तमान में चल रहे विधानसभा चुनावों के बाद, देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 25-28 रुपए प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
इसे फेक न्यूज बताते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की बात कही जा रही है। यह स्पष्ट किया जाता है कि सरकार के समक्ष ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
इस तरह की खबरें नागरिकों में भय और दहशत पैदा करने के उद्देश्य से फैलाई जाती हैं और ये शरारतपूर्ण और भ्रामक होती हैं।
पोस्ट में अंत में लिखा, भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां पिछले चार वर्षों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि नहीं हुई है। भारत सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने भारतीय नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय कीमतों में होने वाली तीव्र वृद्धि से बचाने के लिए लगातार कदम उठाए हैं।
इससे पहले दैनिक प्रेस ब्रीफिंग में बुधवार को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि देश में पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है और लोगों से अपील की है कि पेट्रोल-डीजल या गैस की जल्दबादी में खरीदारी न करें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।
सरकार के मुताबिक, देश भर में घरेलू एलपीजी, पीएनजी और सीएनजी की 100 प्रतिशत सप्लाई सुनिश्चित की जा रही है।
23 मार्च 2026 से अब तक 20 लाख से ज्यादा 5 किलो वाले छोटे गैस सिलेंडर (एफटीएल) बेचे जा चुके हैं, जो खासकर प्रवासी मजदूरों के लिए राहत का काम कर रहे हैं। सरकार ने इन सिलेंडरों की सप्लाई भी दोगुनी कर दी है ताकि जरूरतमंदों तक आसानी से गैस पहुंच सके।
पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) के विस्तार पर भी तेजी से काम हो रहा है। मार्च 2026 से अब तक करीब 5.10 लाख नए कनेक्शन चालू किए जा चुके हैं और 2.56 लाख अतिरिक्त कनेक्शन के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो चुका है। इसके अलावा, 5.77 लाख लोग नए कनेक्शन के लिए रजिस्ट्रेशन कर चुके हैं।
सरकार कंपनियों के साथ मिलकर लोगों को पीएनजी अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। कई कंपनियां नए कनेक्शन पर ऑफर भी दे रही हैं। साथ ही राज्यों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे गैस कनेक्शन देने की प्रक्रिया को तेज करें।
--आईएएनएस
एबीएस/
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