पहलगाम हमले के 1 साल बाद भी बंद बैसरन वैली, पहली बरसी से पहले सेना ने कहा- जो हदें लांघेघा, उसे जवाब देंगे
Pahalgam Attack: जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर से लगभग 95 किलोमीटर दूर पहलगाम पड़ता है और पहलगाम से छह किलोमीटर की चढ़ाई करने पर आता है बैसरन वैली. ये वही जगह है, जहां 22 अप्रैल 2025 यानी ठीक एक साल पहले आतंकियों ने 26 लोगों को ढेर कर दिया था. कल उसी आतंकवादी हमले की पहली बरसी है.
पहली बरसी के मौके पर सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर है. कश्मीर भर के टूरिस्ट स्पॉट्स स्पॉट्स पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है. सभी सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे टूरिस्ट स्पॉट्स के आसपास, किसी भी संभावित आतंकी हमले को लेकर अलर्ट रहें.
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भारतीय सेना ने क्या कहा
खास मौके पर भारतीय सेना ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया है, जिसमें आतंकियों और उनके रहनुमाओं को चेतावनी दी गई है. भारतीय सेना ने कहा कि भारत कुछ नहीं भूला है. इंसानियत की हदें, जब पार हो जाती हैं तो तो मुंहतोड़ जवाब दिया जाता है. न्याय हो चुका है. भारत एकजुट है. कुछ हदों को कभी भी लांघनी नहीं चाहिए. भारतीय सेना ने पोस्ट में दो तस्वीर भी शेयर की है, जिसमें सिंदूर और भारत का नक्शा दिखाया गया है. इस पोस्ट का थीम ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ा हुआ है.
When boundaries of humanity are crossed, the response is decisive.
— ADG PI - INDIAN ARMY (@adgpi) April 21, 2026
Justice is Served.
India Stands United.#SindoorAnniversary #JusticeEndures #NationFirst pic.twitter.com/rtgYu9Hg11
आतंकी हमले का बदला लेने के लिए भारत ने चलाया था ऑपरेशन सिंदूर
पाकिस्तान के आतंकियों से भारतीयों की हत्या का बदला लेने के लिए इंडियन एयरफोर्स ने 6-7 मई 2025 की आधी रात को करीब 1.05 बजे पाकिस्तान और पीओके में एयरस्ट्राइक की. 25 मिनट चले ऑपरेशन में भारतीय सेना ने सात शहरों में स्थित नौ आतंकी ठिकानों को बर्बाद कर दिया. इसे भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर नाम दिया था.
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पहले जैसा नहीं रहा पहलगाम, एक हद के बाद जाने की मनाही
बैसरन घाटी तक जाने के लिए कम से कम तीन रास्ते हैं और तीनों रास्तों को ही पहुंच एक हद तक है. यहां तक की अगर अगर कोई घोड़ा भी भटककर सीमा के उधर जाता है तो उसे ढूंढने की भी इजाजत नहीं है. आसान भाषा में कहें तो बैसरन वैली जाने की इजाजत किसी को नहीं है न ही टूरिस्ट की और न ही कोई स्थानीय लोग. वैली फिलहाल बंद है और अब ये कब खुलेगी ये किसी को नहीं पता. हालांकि, पहलगाम के दूसरे स्पॉट्स जैसे- बेताब वैली और चंदनवाड़ी तक जाने पर कोई रोक नहीं है.
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स्थानीय लोगों में गुस्सा
कश्मीर जाने वाले पर्यटकों में पहलगाम हमले के बाद से गिरावट आई है. स्थानीय लोगों में इस बात पर गुस्सा है कि वैली क्यों नहीं खोली जा रही. आखिर उनका कसूर क्या है और क्यों सैलानियों के आने पर पाबंदी लगा दी गई है.
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घर हो या ऑफिस कहीं भी कर सकते हैं 'एंकल मूवमेंट', टखनों की जकड़न व दर्द में मिलेगा झट से आराम
नई दिल्ली, 21 अप्रैल (आईएएनएस)। आजकल की अनियमित तनाव भरी जीवनशैली और लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठकर काम करने की आदत के कारण शरीर में जकड़न और दर्द की समस्या तेजी से बढ़ रही है। खासकर टखनों, कमर, कंधों और पीठ में जकड़न आम हो गई है। ऐसे में विशेषज्ञ छोटे और आसान व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करने की सलाह देते हैं। एंकल मूवमेंट ऐसा ही एक आसान और असरदार व्यायाम है, जो कुछ ही मिनटों में राहत दे सकता है।
भारत सरकार का आयुष मंत्रालय ट्रंक मूवमेंट को बेहद कारगर बताता है। यह एक्सरसाइज रोजाना 3 से 5 मिनट में आसानी से की जा सकती है। इससे टखनों और पैरों में रक्त संचार बेहतर होता है, जकड़न कम होती है और शरीर का संतुलन भी मजबूत होता है। इसे घर या ऑफिस में बैठे-बैठे या खड़े होकर भी किया जा सकता है, जिससे यह हर उम्र के लोगों के लिए सुविधाजनक बन जाता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि लंबे समय तक बैठे या खड़े रहने वाले लोगों के लिए यह अभ्यास खास तौर पर फायदेमंद है। नियमित रूप से एंकल मूवमेंट करने से टखनों की लचीलापन बढ़ती है और जोड़ों की कार्यक्षमता भी बेहतर होती है। इससे चलने-फिरने में आसानी होती है और गिरने का खतरा भी कम होता है, खासकर बुजुर्गों के लिए यह काफी कारगर है।
इस व्यायाम की विधि बेहद आसान है। सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं और दोनों पैरों को पास रखें। शरीर को संतुलित रखते हुए हाथों को कमर पर या बगल में रखें। अब एक पैर को थोड़ा आगे उठाएं, लगभग 9 इंच तक। इसके बाद पैर को धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करें, फिर दाएं-बाएं घुमाएं। इसके बाद पैर को गोल घुमाएं- पहले घड़ी की दिशा में और फिर उल्टी दिशा में। हर दिशा में 5 से 10 बार इस प्रक्रिया को दोहराएं और फिर दूसरे पैर से भी यही करें।
व्यायाम करते समय ध्यान रखें कि हर मूवमेंट धीरे और नियंत्रित तरीके से हो। यदि संतुलन बनाए रखने में परेशानी हो तो दीवार या कुर्सी का सहारा लिया जा सकता है। यह पूरा अभ्यास कुछ ही मिनटों में पूरा हो जाता है और इसे दिन में किसी भी समय किया जा सकता है, जैसे सुबह उठने के बाद या काम के बीच ब्रेक में।
नियमित अभ्यास से टखनों और पैरों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। इससे पैरों में सूजन और थकान कम होती है और जोड़ों की लचीलापन बढ़ती है। साथ ही, घुटनों और कूल्हों पर दबाव कम पड़ता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे छोटे-छोटे व्यायाम रोजाना करने से शरीर को सक्रिय और संतुलित बनाए रखा जा सकता है।
--आईएएनएस
एमटी/पीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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