मूवी रिव्यू- एवरीबडी लव्स सोहराब हांडा:शानदार कलाकारों के बावजूद, कमजोर पटकथा और ढीली रफ्तार के कारण मिस्ट्री थ्रिलर असर छोड़ने में नाकाम
मिस्ट्री-थ्रिलर जॉनर में बनी ‘एवरीबडी लव्स सोहराब हांडा’ एक दिलचस्प कॉन्सेप्ट के साथ शुरू होती है, लेकिन कमजोर कहानी और धीमी रफ्तार के कारण यह फिल्म उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती। रजत कपूर के निर्देशन में बनी इस फिल्म में शानदार स्टारकास्ट तो है, मगर कंटेंट उस स्तर का नहीं बन पाया, जो दर्शकों को अंत तक बांधे रख सके। यह फिल्म ZEE5 पर स्ट्रीम हो चुकी है। इस फिल्म की लेंथ 1 घंटा 4 0 मिनट है। दैनिक भास्कर ने इस फिल्म को 5 में से 2 स्टार की रेटिंग दी है। फिल्म की कहानी कैसी है? फिल्म की कहानी एक पार्टी से शुरू होती है, जहां दोस्तों का एक ग्रुप एनिवर्सरी सेलिब्रेशन के लिए इकट्ठा होता है। इसी दौरान सोहराब हांडा नाम का एक व्यक्ति मृत पाया जाता है, जिसकी हत्या गला काटकर की गई होती है। इसके बाद शुरू होती है जांच, जिसमें हर किरदार शक के घेरे में आता है और उनके बीच छिपे राज सामने आने लगते हैं। हालांकि कहानी का प्लॉट दिलचस्प है, लेकिन स्क्रीनप्ले काफी कमजोर है। फिल्म कई जगह भटकती नजर आती है और मिस्ट्री का असर उतना मजबूत नहीं बन पाता, जितना होना चाहिए था। स्टारकास्ट की एक्टिंग कैसी है? फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी स्टारकास्ट है। विनय पाठक अपने किरदार में प्रभाव छोड़ते हैं और उनकी परफॉर्मेंस काफी नेचुरल लगती है। सौरभ शुक्ला भी अपने रोल में दमदार नजर आते हैं और स्क्रीन पर पकड़ बनाए रखते हैं। वहीं रणवीर शौरी और रजत कपूर जैसे कलाकार भी अपने अनुभव का असर दिखाते हैं। हालांकि बाकी सहायक कलाकारों की एक्टिंग सामान्य है और वे ज्यादा प्रभाव नहीं छोड़ पाते। फिल्म का डायरेक्शन और तकनीकी पक्ष कैसा है? डायरेक्शन की बात करें तो रजत कपूर का प्रयास साफ दिखता है, लेकिन कहानी और पटकथा कमजोर होने की वजह से फिल्म प्रभावित होती है। फिल्म शुरू से अंत तक दर्शकों को बांधे रखने में असफल रहती है। तकनीकी रूप से फिल्म ठीक-ठाक है, लेकिन इसमें कोई खास नई बात या प्रभावशाली ट्रीटमेंट देखने को नहीं मिलता। फिल्म का संगीत और बैकग्राउंड स्कोर कैसा है? फिल्म में कोई खास गाने नहीं हैं, जिससे इसका एंटरटेनमेंट वैल्यू थोड़ा कम हो जाता है। बैकग्राउंड म्यूजिक भी सामान्य है और कई जगह सीन के असर को मजबूत करने में नाकाम रहता है। फाइनल वर्डिक्ट, देखे या नहीं? अगर आप मिस्ट्री फिल्मों के शौकीन हैं और सिर्फ अच्छे कलाकारों की एक्टिंग देखना चाहते हैं, तो इसे एक बार देखा जा सकता है। लेकिन अगर आप एक कसावट भरी कहानी और मजबूत थ्रिल की उम्मीद कर रहे हैं, तो यह फिल्म आपको निराश कर सकती है।
आंगनबाड़ी केंद्र 8.9 करोड़ लाभार्थियों को सेवा प्रदान कर रहे : अन्नपूर्णा देवी
नई दिल्ली, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी के अनुसार, 14 लाख से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों के साथ आंगनबाड़ी दीदियां गर्भवती माताओं, स्तनपान कराने वाली माताओं, किशोरियों और बच्चों तक पहुंच रही हैं। साथ ही, 8.9 करोड़ लाभार्थियों को सेवा प्रदान कर रही हैं।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पोषण माह और पोषण पखवाड़ा ने एक सच्चे जन आंदोलन का रूप ले लिया है, जिसमें देशभर में करोड़ों गतिविधियां हो रही हैं।
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा, हमारी आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां, आंगनबाड़ी सहायिकाएँ और आशा दीदियाँ प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण और लक्ष्यों को सामूहिक प्रयासों से हर घर तक पहुँचाने में पूरे लगन से लगी हुई हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का दायित्व व्यापक है और हम देशभर के हर घर और हर बच्चे तक पहुँच रहे हैं।”
उन्होंने कहा, हमारे बच्चे राष्ट्र का भविष्य हैं और विकसित भारत के संकल्प को आगे बढ़ाएंगे। उन्हें बेहतर पोषण मिले, यह सुनिश्चित करना हम सभी की जिम्मेदारी है, जिसे हमें जन आंदोलन के रूप में मिलकर निभाना होगा।
उन्होंने राज्यों से एक-दूसरे से सीखने, सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने और उन्हें अनुकूलित करने तथा जिलों, विशेष रूप से आकांक्षी जिलों में बेहतर प्रदर्शन को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया।
मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि पोषण एक सतत प्रक्रिया है और बच्चों के समग्र और मानसिक विकास में सहयोग देने के लिए अधिक समय, देखभाल और सामुदायिक भागीदारी की आवश्यकता पर बल दिया।
इस राष्ट्रीय आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने पोषण पखवाड़ा के 8वें संस्करण का शुभारंभ किया है, जो 9 अप्रैल से 23 अप्रैल तक चलने वाले राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरुआत का प्रतीक है।
केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2018 से अब तक आठ पोषण माह और सात पोषण पखवाड़े आयोजित किए जा चुके हैं। जीवन के पहले छह वर्षों में मस्तिष्क के विकास को अधिकतम करना पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह अवधि महत्वपूर्ण है क्योंकि मस्तिष्क का 85 प्रतिशत से अधिक विकास प्रारंभिक वर्षों में होता है, जिसमें पहले 1,000 दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण होते हैं।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केवल पोषण तक सीमित न रहकर, समग्र बाल विकास सुनिश्चित करने के लिए संवेदनशील देखभाल और प्रारंभिक शिक्षा पर समान रूप से ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।
--आईएएनएस
एसएके/पीएम
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