आपका पैसा- 35 की उम्र में 1 करोड़ का फंड:समझें कंपाउंडिंग का गणित और SIP के फायदे, फाइनेंस एक्सपर्ट की 10 जरूरी सलाह
हर कोई चाहता है कि 35-40 की उम्र तक उसके पास इतना पैसा हो कि घर खरीदने, कोई बिजनेस शुरू करने या बच्चों की पढ़ाई जैसे सपने पूरे करने के लिए पैसों की चिंता न करनी पड़े। अच्छी बात यह है कि 1 करोड़ का फंड बनाने के लिए बहुत बड़ी सैलरी होना जरूरी नहीं है। जरूरत है, सही समय पर शुरुआत करने, नियमित निवेश करने और कंपाउंडिंग का फायदा उठाने की। अगर 20-25 साल की उम्र से SIP शुरू कर दी जाए और हर साल निवेश थोड़ा-थोड़ा बढ़ाया जाए, तो 35 साल की उम्र तक ₹1 करोड़ का फंड बनाना संभव हो सकता है। इसलिए आज 'आपका पैसा' में समझेंगे कि 35 की उम्र तक ₹1 करोड़ का फंड कैसे बनाया जा सकता है। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- जितेंद्र सोलंकी, फाइनेंशियल एडवाइजर, गाजियाबाद सवाल- क्या 35 की उम्र तक 1 करोड़ का फंड बनाना संभव है? जवाब- हां, लेकिन यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि अभी आपकी उम्र, इनकम और सेविंग कितनी है। इसके लिए दो चीजें सबसे जरूरी हैं- सवाल- 1 करोड़ का फंड बनाने के लिए मंथली कितने की SIP करनी होगी? जवाब- यह इस पर निर्भर करता है कि आपकी उम्र कितनी है और आप कितने प्रतिशत की स्टेप-अप SIP कर रहे हैं। 35 साल की उम्र तक 1 करोड़ रुपए का फंड बनाने के लिए शुरुआती मासिक SIP नीचे पॉइंट्स में देखिए- उम्र 20 साल है तो- उम्र 22 साल है तो- उम्र 25 साल है तो- सवाल- निवेश की शुरुआत 20, 22 या 25 साल में हो तो SIP में कितना अंतर आएगा? जवाब- अगर कम समय में 1 करोड़ का फंड बनाना चाहते हैं तो लंबी अवधि के इक्विटी बेस्ड निवेश करना होगा, यानी ऐसे निवेश विकल्प, जिनमें लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना हो। इसे ग्राफिक से समझिए- सवाल- 1 करोड़ के फंड में आपको कुल कितने रुपए जमा करने होंगे और कितना रिटर्न मिलेगा? जवाब- जितनी जल्दी शुरुआत करेंगे, इन्वेस्टमेंट अमाउंट उतना ही कम होगा। इसे ग्राफिक से समझिए- सवाल- 1 करोड़ का फंड बनाने में कंपाउंडिंग की क्या भूमिका है? जवाब- इसमें कंपाउंडिंग बेहद महत्वपूर्ण है। इस प्रक्रिया में निवेश पर मिले ब्याज पर भी ब्याज मिलता है। इसका सबसे अधिक फायदा तब मिलता है, जब निवेश का समय लंबा होता है। सवाल- कम उम्र में 1 करोड़ का फंड बनाना है तो निवेश के सही विकल्प क्या हैं? जवाब- अगर उम्र 20-25 साल है और लक्ष्य 35 साल की उम्र तक ₹1 करोड़ का फंड बनाना है, तो सबसे बड़ी ताकत ‘समय’ है। लंबी अवधि के लिए ऐसे निवेश विकल्प चुनें, जिनमें ग्रोथ की संभावना अधिक हो। सभी विकल्प ग्राफिक में देखिए- सवाल- 1 करोड़ का फंड बनाने के लिए SIP काफी है या अन्य निवेश विकल्प भी जोड़ने चाहिए? जवाब- सिर्फ SIP से भी ₹1 करोड़ का फंड बनाया जा सकता है, लेकिन SIP के साथ अन्य निवेश विकल्प रखने से रिस्क कम हो सकता है। SIP के अलावा अन्य निवेश विकल्प सवाल- SIP और म्यूचुअल फंड चुनते समय क्या गलतियां नहीं करनी चाहिए? जवाब- SIP और म्यूचुअल फंड में कुछ कॉमन गलतियां निवेश के गोल को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए निवेश करते समय इन बातों का ध्यान रखें- सवाल- एक स्मार्ट निवेशक फंड बनाने में किन बातों का ध्यान रखता है? जवाब- स्मार्ट निवेशक एक क्लियर प्लान और अनुशासन के साथ निवेश करता है। निवेशकों के लिए एक्सपर्ट की 10 सलाह ग्राफिक में देखिए- सवाल- निवेशक की किन गलतियों से फंड बनने में देरी हो सकती है? जवाब- कई बार छोटी-छोटी गलतियों के कारण फाइनेंशियल गोल हासिल करने में देरी हो सकती है, जैसेकि- सवाल- अगर किन्हीं कारणों से बीच में SIP की किश्त जमा न हो पाए तो इससे ओवरऑल फंड पर क्या असर पड़ेगा? जवाब- अगर किसी कारण से एक-दो SIP किश्तें छूट जाती हैं, तो इसका सीधा असर निवेश के लक्ष्य पर पड़ता है। सवाल- नौकरी बदलने, शादी या अन्य बड़े खर्चों के बीच निवेश कैसे जारी रखें? जवाब- नौकरी बदलना, शादी या बड़े खर्च जीवन का हिस्सा हैं, लेकिन इनके कारण निवेश पूरी तरह बंद नहीं करना चाहिए। SIP में रेगुलैरिटी बनाए रखने के लिए- ………………………….. ये खबर भी पढ़ें… आपका पैसा- ITR फाइल करने के बाद e-वेरिफिकेशन जरूरी:एक्सपर्ट से जानें स्टेप-बाय-स्टेप पूरा प्रोसेस, इन 5 कॉमन गलतियों से बचें हर साल करोड़ों लोग आखिरी तारीख से पहले अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करते हैं। रिटर्न सबमिट होते ही उन्हें लगता है कि अब उनका काम पूरा हो गया है। अब बस रिफंड का इंतजार करना है। लेकिन यहीं कई लोग एक जरूरी स्टेप छोड़ देते हैं, वह है- ITR का e-वेरिफिकेशन। पूरी खबर पढ़ें…
जरूरत की खबर- 13 सवालों में समझें आंसू-गैस का साइंस:अगर एक्सपोजर हो तो ऐसे करें बचाव, न करें ये 7 गलतियां, बता रहे हैं डॉक्टर
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में प्रोटेस्ट के दौरान पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। इसके बाद वहां मौजूद लोगों में आंखों में जलन, खांसी और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं देखने को मिलीं। विरोध-प्रदर्शनों के दौरान अक्सर भीड़ को कंट्रोल करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में यह जानना बहुत जरूरी है कि यह हमारी शरीर पर किस तरह असर करती है। आंसू गैस कोई साधारण धुआं या गैस नहीं, बल्कि रासायनिक कणों का मिश्रण है, जो आंख, स्किन और रेस्पिरेटरी सिस्टम को तेजी से प्रभावित करता है। इसलिए ‘जरूरत की खबर’ में आज आंसू गैस के हेल्थ रिस्क पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. अरविंद अग्रवाल, डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली डॉ. पद्मा सिंह, रिटायर्ड लेक्चरर, केमिस्ट्री, प्रयागराज सवाल- आंसू गैस क्या होती है? जवाब- आंसू गैस बेहद महीन रासायनिक कणों का मिश्रण है। इसे गोले, ग्रेनेड या स्प्रे के जरिए हवा में छोड़ा जाता है। इसके संपर्क में आते ही आंखों में तेज जलन, आंसू, खांसी, सांस लेने में तकलीफ और स्किन इरिटेशन जैसी समस्याएं होने लगती हैं। इसका इस्तेमाल भीड़ को कंट्रोल करने के लिए किया जाता है। सवाल- आंसू गैस में कौन-से केमिकल्स होते हैं? जवाब- आंसू गैस में अलग-अलग तरह के केमिकल एजेंट इस्तेमाल किए जाते हैं। इनमें सबसे कॉमन CS गैस है। सभी प्रमुख एजेंट ग्राफिक में देखिए- सवाल- आंसू गैस शरीर में कैसे प्रवेश करती है? जवाब- इसके बेहद महीन रासायनिक कण सांस के साथ नाक और फेफड़ों में पहुंचते हैं। ये कण आंखों और स्किन के सीधे संपर्क में भी आते हैं। इससे कुछ ही सेकेंड में जलन, आंसू, खांसी और सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। सवाल- इसका असर कितनी देर में शुरू होता है और कितनी देर तक रहता है? जवाब- आमतौर पर 20-30 सेकेंड के भीतर इसका असर शुरू हो जाता है। ज्यादातर मामलों में ताजी हवा मिलने पर 15-30 मिनट में असर कम होने लगता है। कुछ मामलों में ज्यादा एक्सपोजर से परेशानी कई घंटे या कुछ दिनों तक बनी रह सकती है। सवाल- आंसू गैस के एक्सपोजर से शरीर पर क्या असर होता है? जवाब- आंसू गैस सबसे ज्यादा आंखों, रेस्पिरेटरी सिस्टम और स्किन को प्रभावित करती है। गैस के संपर्क में ज्यादा देर रहने या पहले से कोई हेल्थ कंडीशन होने पर इसका असर गंभीर हो सकता है। सभी हेल्थ रिस्क ग्राफिक में देखिए- सवाल- आंसू गैस आंख, नाक और फेफड़ों को कैसे प्रभावित करती है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- क्या ज्यादा एक्सपोजर से मौत भी हो सकती है? जवाब- यह बहुत ही रेयर है। हालांकि लंबे समय तक आंसू गैस के संपर्क में रहने से रेस्पिरेटरी फेल्योर हो सकता है। इससे मौत का रिस्क बढ़ जाता है। यह जोखिम अस्थमा, फेफड़ों या हार्ट डिजीज से पीड़ित लोगों में ज्यादा होता है। सवाल- किन लोगों को सबसे ज्यादा रिस्क है? जवाब- आंसू गैस का असर हर किसी पर होता है, लेकिन कुछ लोगों को रिस्क ज्यादा होता है। ग्राफिक में देखिए- सवाल- अगर आंसू गैस के आसपास हों तो बचाव के लिए क्या करें? जवाब- ऐसी स्थिति में सबसे पहले तुरंत वहां से हटकर खुली और ताजी हवा वाली जगह पर जाएं। ग्राफिक में सभी सेफ्टी टिप्स देखिए- सवाल- आंसू गैस के एक्सपोजर में हों तो क्या गलतियां बिल्कुल न करें? जवाब- आंसू गैस के एक्सपोजर में आने पर कुछ गलतियां हेल्थ रिस्क बढ़ा सकती हैं। इन्हें ग्राफिक में देखिए- सवाल- अगर कॉन्टैक्ट लेंस लगाते हैं तो क्या सावधानियां बरतें? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- किस स्थिति में डॉक्टर को दिखाना जरूरी है? जवाब- इन स्थितियों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें- ध्यान रखें, अस्थमा, फेफड़ों या हार्ट डिजीज से पीड़ित लोगों को हल्के लक्षण होने पर भी डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। सवाल- अगर आंसू गैस एक्सपायर्ड हो तो उसका क्या असर होता है? जवाब- एक्सपायर्ड आंसू गैस का असर तय नहीं है। आमतौर पर समय के साथ इसकी प्रभावशीलता कम हो सकती है। लेकिन इसके यूज से आंखों, स्किन और रेस्पिरेटरी सिस्टम में जलन हो सकती है। अगर कैनिस्टर खराब हो चुका हो या उसमें मौजूद केमिकल टूटने लगे हों, तो जोखिम बढ़ भी सकता है। इसलिए एक्सपायर्ड आंसू गैस का इस्तेमाल सुरक्षित नहीं माना जाता है। …………………… जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- अकेलापन रोज 15 सिगरेट पीने के बराबर: बढ़ता हार्ट डिजीज, डिप्रेशन, कैंसर का रिस्क, डॉक्टर से समझें लोनलीनेस का साइंस साल 2017 में ‘नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन’ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, अकेलापन रोज 15 सिगरेट पीने जितना नुकसानदायक है। इसका शरीर पर बुरा असर पड़ता है। यही वजह है कि वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने अकेलेपन को पब्लिक हेल्थ इश्यू माना है। पूरी खबर पढ़िए…
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others

















