जरूरत की खबर- 13 सवालों में समझें आंसू-गैस का साइंस:अगर एक्सपोजर हो तो ऐसे करें बचाव, न करें ये 7 गलतियां, बता रहे हैं डॉक्टर
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में प्रोटेस्ट के दौरान पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। इसके बाद वहां मौजूद लोगों में आंखों में जलन, खांसी और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं देखने को मिलीं। विरोध-प्रदर्शनों के दौरान अक्सर भीड़ को कंट्रोल करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में यह जानना बहुत जरूरी है कि यह हमारी शरीर पर किस तरह असर करती है। आंसू गैस कोई साधारण धुआं या गैस नहीं, बल्कि रासायनिक कणों का मिश्रण है, जो आंख, स्किन और रेस्पिरेटरी सिस्टम को तेजी से प्रभावित करता है। इसलिए ‘जरूरत की खबर’ में आज आंसू गैस के हेल्थ रिस्क पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. अरविंद अग्रवाल, डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली डॉ. पद्मा सिंह, रिटायर्ड लेक्चरर, केमिस्ट्री, प्रयागराज सवाल- आंसू गैस क्या होती है? जवाब- आंसू गैस बेहद महीन रासायनिक कणों का मिश्रण है। इसे गोले, ग्रेनेड या स्प्रे के जरिए हवा में छोड़ा जाता है। इसके संपर्क में आते ही आंखों में तेज जलन, आंसू, खांसी, सांस लेने में तकलीफ और स्किन इरिटेशन जैसी समस्याएं होने लगती हैं। इसका इस्तेमाल भीड़ को कंट्रोल करने के लिए किया जाता है। सवाल- आंसू गैस में कौन-से केमिकल्स होते हैं? जवाब- आंसू गैस में अलग-अलग तरह के केमिकल एजेंट इस्तेमाल किए जाते हैं। इनमें सबसे कॉमन CS गैस है। सभी प्रमुख एजेंट ग्राफिक में देखिए- सवाल- आंसू गैस शरीर में कैसे प्रवेश करती है? जवाब- इसके बेहद महीन रासायनिक कण सांस के साथ नाक और फेफड़ों में पहुंचते हैं। ये कण आंखों और स्किन के सीधे संपर्क में भी आते हैं। इससे कुछ ही सेकेंड में जलन, आंसू, खांसी और सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। सवाल- इसका असर कितनी देर में शुरू होता है और कितनी देर तक रहता है? जवाब- आमतौर पर 20-30 सेकेंड के भीतर इसका असर शुरू हो जाता है। ज्यादातर मामलों में ताजी हवा मिलने पर 15-30 मिनट में असर कम होने लगता है। कुछ मामलों में ज्यादा एक्सपोजर से परेशानी कई घंटे या कुछ दिनों तक बनी रह सकती है। सवाल- आंसू गैस के एक्सपोजर से शरीर पर क्या असर होता है? जवाब- आंसू गैस सबसे ज्यादा आंखों, रेस्पिरेटरी सिस्टम और स्किन को प्रभावित करती है। गैस के संपर्क में ज्यादा देर रहने या पहले से कोई हेल्थ कंडीशन होने पर इसका असर गंभीर हो सकता है। सभी हेल्थ रिस्क ग्राफिक में देखिए- सवाल- आंसू गैस आंख, नाक और फेफड़ों को कैसे प्रभावित करती है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- क्या ज्यादा एक्सपोजर से मौत भी हो सकती है? जवाब- यह बहुत ही रेयर है। हालांकि लंबे समय तक आंसू गैस के संपर्क में रहने से रेस्पिरेटरी फेल्योर हो सकता है। इससे मौत का रिस्क बढ़ जाता है। यह जोखिम अस्थमा, फेफड़ों या हार्ट डिजीज से पीड़ित लोगों में ज्यादा होता है। सवाल- किन लोगों को सबसे ज्यादा रिस्क है? जवाब- आंसू गैस का असर हर किसी पर होता है, लेकिन कुछ लोगों को रिस्क ज्यादा होता है। ग्राफिक में देखिए- सवाल- अगर आंसू गैस के आसपास हों तो बचाव के लिए क्या करें? जवाब- ऐसी स्थिति में सबसे पहले तुरंत वहां से हटकर खुली और ताजी हवा वाली जगह पर जाएं। ग्राफिक में सभी सेफ्टी टिप्स देखिए- सवाल- आंसू गैस के एक्सपोजर में हों तो क्या गलतियां बिल्कुल न करें? जवाब- आंसू गैस के एक्सपोजर में आने पर कुछ गलतियां हेल्थ रिस्क बढ़ा सकती हैं। इन्हें ग्राफिक में देखिए- सवाल- अगर कॉन्टैक्ट लेंस लगाते हैं तो क्या सावधानियां बरतें? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- किस स्थिति में डॉक्टर को दिखाना जरूरी है? जवाब- इन स्थितियों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें- ध्यान रखें, अस्थमा, फेफड़ों या हार्ट डिजीज से पीड़ित लोगों को हल्के लक्षण होने पर भी डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। सवाल- अगर आंसू गैस एक्सपायर्ड हो तो उसका क्या असर होता है? जवाब- एक्सपायर्ड आंसू गैस का असर तय नहीं है। आमतौर पर समय के साथ इसकी प्रभावशीलता कम हो सकती है। लेकिन इसके यूज से आंखों, स्किन और रेस्पिरेटरी सिस्टम में जलन हो सकती है। अगर कैनिस्टर खराब हो चुका हो या उसमें मौजूद केमिकल टूटने लगे हों, तो जोखिम बढ़ भी सकता है। इसलिए एक्सपायर्ड आंसू गैस का इस्तेमाल सुरक्षित नहीं माना जाता है। …………………… जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- अकेलापन रोज 15 सिगरेट पीने के बराबर: बढ़ता हार्ट डिजीज, डिप्रेशन, कैंसर का रिस्क, डॉक्टर से समझें लोनलीनेस का साइंस साल 2017 में ‘नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन’ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, अकेलापन रोज 15 सिगरेट पीने जितना नुकसानदायक है। इसका शरीर पर बुरा असर पड़ता है। यही वजह है कि वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने अकेलेपन को पब्लिक हेल्थ इश्यू माना है। पूरी खबर पढ़िए…
फिजिकल हेल्थ- चांदीपुरा वायरस से 3 बच्चों की मौत:डॉक्टर से जानें ये क्या है, कैसे फैलता है, इसका लक्षण, इलाज और बचाव क्या है
हाल ही में गुजरात में चांदीपुरा वायरस (CHPV) के बढ़ते मामलों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। राज्य में अब तक 7 मामलों की पुष्टि हुई है, जिनमें से 3 बच्चों की मौत हो चुकी है। वहीं कुछ अन्य संदिग्ध मरीजों के सैंपल्स की जांच जारी है। ‘नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल’ (NCDC) के मुताबिक, भारत में चांदीपुरा वायरस का प्रकोप समय-समय पर आता रहा है। इसके मामले खासकर मानसून के दौरान बढ़ते हैं, क्योंकि इस मौसम में वायरस फैलाने वाले कीड़े ज्यादा एक्टिव हो जाते हैं। इसलिए आज ‘फिजिकल हेल्थ’ में चांदीपुरा वायरस की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. रोहित शर्मा, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, जयपुर सवाल- चांदीपुरा वायरस क्या है? जवाब- चांदीपुरा वायरस एक रेयर, लेकिन बेहद खतरनाक वायरल इन्फेक्शन है। इसकी पहचान पहली बार साल 1965 में महाराष्ट्र के चांदीपुरा गांव में हुई थी। इसलिए इसका नाम चांदीपुरा रखा गया। सवाल- यह वायरस कैसे फैलता है? जवाब- पॉइंटर्स में देखिए- सवाल- मानसून में चांदीपुरा वायरस का खतरा क्यों बढ़ जाता है? जवाब- इसके कई कारण हैं- सवाल- चांदीपुरा वायरस के शुरुआती लक्षण क्या हैं? जवाब- शुरुआत में चांदीपुरा वायरस के लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे होते हैं। ग्राफिक में इसके सभी शुरुआती लक्षण देखिए- सवाल- चांदीपुरा वायरस के गंभीर लक्षण क्या हैं? जवाब- अगर संक्रमण तेजी से बढ़कर ब्रेन को प्रभावित करने लगे तो पेशेंट की हालत कुछ ही घंटों में गंभीर हो सकती है। ऐसे में कुछ लक्षण दिख सकते हैं। ग्राफिक में देखिए- सवाल- संक्रमित होने के कितने दिन बाद लक्षण दिखते हैं? जवाब- चांदीपुरा वायरस से संक्रमित होने के आमतौर पर 3-6 दिन के भीतर लक्षण दिखाई देने लगते हैं। इसे ‘इन्क्यूबेशन पीरियड’ कहा जाता है। कुछ बच्चों में बीमारी तेजी से बढ़ती है। ऐसे में 24-48 घंटे के भीतर दौरे पड़ना, बेहोशी या ब्रेन में सूजन जैसे गंभीर लक्षण हो सकते हैं। सवाल- सामान्य वायरल बुखार और चांदीपुरा वायरस में फर्क कैसे पहचानें? जवाब- चांदीपुरा वायरस के शुरुआती लक्षण वायरल फीवर से मिलते-जुलते होते हैं, लेकिन इनमें कुछ अंतर होता है। ग्राफिक में दोनों के बीच फर्क समझिए- सवाल- इस वायरस का खतरा किसे ज्यादा है? जवाब- चांदीपुरा वायरस किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में इन्फेक्शन का रिस्क ज्यादा होता है। ग्राफिक में देखिए- सवाल- बच्चों को सबसे ज्यादा खतरा क्यों होता है? जवाब- इसकी कई वजहें हैं। नीचे दिए पॉइंटर्स से समझिए– 1. बच्चों की इम्यूनिटी कमजोर होती है 2. वायरस का असर जल्दी गंभीर हो सकता है 3. बाहर खेलने से रिस्क बढ़ जाता है 4. शुरुआती लक्षण सामान्य बुखार जैसे लगते हैं ध्यान रखें अगर बच्चे को तेज बुखार के साथ दौरे पड़ें, बार-बार उल्टी हो, बहुत ज्यादा सुस्ती आए या बेहोशी होने लगे, तो तुरंत हॉस्पिटल लेकर जाएं। सवाल- चांदीपुरा वायरस का इलाज क्या है? जवाब- अभी तक चांदीपुरा वायरस को खत्म करने वाली कोई खास दवा (एंटीवायरस) या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। मरीज का इलाज उसके लक्षणों और हालत के अनुसार किया जाता है। इसे सपोर्टिव ट्रीटमेंट कहते हैं। सवाल- चांदीपुरा वायरस से बचाव कैसे करें? जवाब- इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखें, जैसेकि- चांदीपुरा वायरस से जुड़े कुछ कॉमन सवाल–जवाब सवाल- क्या चांदीपुरा वायरस से संक्रमित हर बच्चे की मौत हो जाती है? जवाब- नहीं, चांदीपुरा वायरस से संक्रमित हर बच्चे की मौत नहीं होती। कई बच्चों में समय पर इलाज मिलने से वे पूरी तरह ठीक भी हो जाते हैं। हालांकि कुछ मामलों में संक्रमण तेजी से गंभीर होकर ब्रेन को प्रभावित कर सकता है। सवाल- क्या यह वायरस बड़ों को भी अटैक कर सकता है? जवाब- हां, वयस्कों में भी संक्रमण हो सकता है, लेकिन गंभीर बीमारी और मौत का रिस्क बच्चों की तुलना में कम होता है। सवाल- क्या यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है? जवाब- नहीं, चांदीपुरा वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता है। सवाल- क्या इसके लिए कोई वैक्सीन उपलब्ध है? जवाब- नहीं, फिलहाल चांदीपुरा वायरस से बचाव के लिए कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। सवाल- क्या मच्छर भगाने वाली क्रीम या जाली से बचाव हो सकता है? जवाब- हां, क्योंकि यह वायरस कीटों के जरिए फैलता है। इसलिए कीटों से बचाव इन्फेक्शन का रिस्क कम कर सकता है। सवाल- क्या बुखार आते ही चांदीपुरा वायरस की जांच करानी चाहिए? जवाब- नहीं, हर बुखार चांदीपुरा वायरस की वजह से नहीं होता। …………………… ये खबर भी पढ़ें… फिजिकल हेल्थ- रैट फीवर पर एडवाइजरी:बारिश में बढ़ता रिस्क, पानी में न भीगें, जानें सभी लक्षण और बचाव के लिए जरूरी सावधानियां मुंबई में लगातार बारिश और जलभराव के बीच बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने रैट फीवर (लेप्टोस्पायरोसिस) को लेकर हेल्थ एडवाइजरी जारी की है। दूषित बाढ़ के पानी से फैलने वाली इस बीमारी से बचने के लिए लोगों को जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है। पूरी खबर पढ़ें…
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