Pakistan में इस साल 3,000 से अधिक आतंकवादी घटनाएं दर्ज की गईं: सेना
पाकिस्तान में इस साल आतंकवाद से जुड़ी 3,000 से अधिक घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें सुरक्षा बलों सहित 800 लोगों की मौत हो गई। सेना के एक शीर्ष अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। ‘इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस’ के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने बताया कि पाकिस्तान में इस साल विभिन्न अभियानों के दौरान कुल 2,084 आतंकवादी मारे गए।
इस्लामाबाद में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में चौधरी ने कहा, “साल 2026 में पाकिस्तान में 3,145 आतंकवादी घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें से 1,971 घटनाएं खैबर पख्तूनख्वा, 1,148 बलूचिस्तान और 26 देश के अन्य हिस्सों घटीं।” उन्होंने कहा कि उक्त अवधि में रोजाना औसतन 10 आतंकवादी मारे गए, जो अब तक का सर्वाधिक औसत है। चौधरी के मुताबिक, पाकिस्तान में 2026 में हुए आतंकवादी हमलों में 819 लोग मारे गए, जिनमें सेना के 303 जवान और पुलिस तथा नागरिक सशस्त्र बल के 194 कर्मी भी शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि देश में इस साल खुफिया जानकारी पर आधारित कुल 40,348 अभियान चलाए गए, जिनमें से 31,000 बलूचिस्तान में संचालित हुए। चौधरी के अनुसार, पाकिस्तान में इस साल आत्मघाती हमले की 28 घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें से अधिकतर में अफगान नागरिक और उनके सुरक्षा बलों से जुड़े लोग शामिल थे।
Sri Lanka 2019 ईस्टर संडे हमले में पूर्व पुलिस प्रमुख और नौकरशाह को मौत की सजा
श्रीलंका पुलिस के पूर्व प्रमुख पुजित जयसुंदरा और रक्षा मंत्रालय के तत्कालीन शीर्ष नौकरशाह हेमासिरी फर्नांडो को 2019 के ईस्टर संडे आतंकी हमले के मामले में शुक्रवार को मौत की सजा सुनाई गई। इस हमले में 270 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। उच्च न्यायालय ने दोनों पूर्व अधिकारियों को पहले से मिली खुफिया चेतावनियों पर कार्रवाई नहीं करने का दोषी माना।
अदालत ने कहा कि अगर समय पर कार्रवाई की जाती, तो इन हमलों को रोका जा सकता था। पुलिस के मुताबिक, 21 अप्रैल 2019 को गिरजाघरों और महंगे होटलों पर हुए सिलसिलेवार आत्मघाती बम धमाकों में 279 लोगों की मौत हुई थी तथा मरने वालों में 45 विदेशी नागरिक भी शामिल थे। जयसुंदरा और फर्नांडो को 2019 में गिरफ्तार किया गया था।
चार महीने तक हिरासत में रहने के बाद उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया था। नवंबर 2021 में दोनों के खिलाफ आरोप तय किए गए थे और उन पर स्थानीय जिहादी हमले की साजिश रचने की भारतीय एजेंसियों से मिली खुफिया जानकारी की अनदेखी करने का आरोप था। उच्च न्यायालय ने फरवरी 2022 में दोनों को बरी कर दिया था और उनके खिलाफ लगाए गए सभी 855 आरोप खारिज कर दिए थे।
नवंबर 2024 में अटॉर्नी जनरल द्वारा उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद इस मामले की फिर से सुनवाई शुरू हुई। अटॉर्नी जनरल ने कहा था कि पिछली सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से कोई गवाह पेश नहीं किया गया था। न्यायमूर्ति प्रियंथा लियानागे और न्यायमूर्ति तिलकरत्ने बंडारा ने बहुमत का फैसला सुनाते हुए कहा कि खुफिया जानकारी की अनदेखी के कारण 268 लोगों की मौत हुई और 586 लोग घायल हुए।
पीठ ने कहा कि जयसुंदरा नागरिकों की जान की रक्षा करने और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहे। तीन सदस्यीय पीठ के न्यायमूर्ति विराज वीरसूरिया ने इससे अलग फैसला दिया और दोनों को बरी कर दिया था। जयसुंदरा 150 से अधिक वर्षों के इतिहास में श्रीलंका पुलिस के सबसे वरिष्ठ अधिकारी बन गए, जिन्हें मुकदमे का सामना करना पड़ा और दोषी ठहराए जाने के बाद सजा सुनाई गई।
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