Who is Asmita Dey: कौन हैं अस्मिता डे? जिन्होंने CWG 2026 में जूडो का पहला गोल्ड जीतकर रचा इतिहास
Asmita Dey Biography: भारत की 22 वर्षीय जूडोका अस्मिता डे ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में इतिहास रच दिया है। उन्होंने ग्लासगो में खेले गए महिला 48 किग्रा वर्ग के फाइनल में कनाडा की हेइडी क्वैच को 2-1 से हराकर कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो का गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल किया। उनकी इस ऐतिहासिक जीत के साथ भारत को जूडो में पहला कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड भी मिला।
कौन हैं अस्मिता डे?
22 मार्च 2003 को त्रिपुरा के बेलोनिया में जन्मीं अस्मिता डे का सफर किसी प्रेरणादायक कहानी से कम नहीं है। साइकिल रिपेयर की दुकान चलाने वाले पिता की बेटी अस्मिता ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने सपनों को कभी नहीं छोड़ा। शुरुआती दिनों में उन्होंने 800 मीटर दौड़ में हिस्सा लिया, लेकिन एक कोच की सलाह पर उन्होंने जूडो को अपना करियर बनाया।
2015 में उन्होंने त्रिपुरा स्पोर्ट्स स्कूल में दाखिला लिया, जहां बीना देबनाथ और बाद में माणिक लाल देब की देखरेख में उन्होंने जूडो की बारीकियां सीखीं। स्कूल गेम्स और खेलो इंडिया प्रतियोगिताओं में लगातार शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) भोपाल के रीजनल सेंटर में ट्रेनिंग का मौका मिला।
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— The Khel India (@TheKhelIndia) July 31, 2026
ऐसे चमका इंटरनेशनल करियर
अस्मिता ने जुलाई 2022 में बैंकॉक में आयोजित एशियन कैडेट और जूनियर जूडो चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। इस दौरान उन्होंने चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और मलेशिया की खिलाड़ियों को हराया और अंतरराष्ट्रीय पदक जीतने वाली त्रिपुरा की पहली जूडोका बनीं।
इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
- 2022: एशियन कैडेट एवं जूनियर चैंपियनशिप – ब्रॉन्ज
- 2022: खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स – गोल्ड
- 2023: एशियन ओपन (कुवैत) – सिल्वर
- 2023: जूनियर एशिया कप (मकाऊ) – गोल्ड
- 2024: कॉमनवेल्थ जूडो चैंपियनशिप – ब्रॉन्ज
- 2025: अफ्रीकन ओपन (कैसाब्लांका) – गोल्ड
- 2026: कॉमनवेल्थ गेम्स (ग्लासगो) – गोल्ड
TOPS स्कीम से मिला बड़ा सहारा
अस्मिता भारत सरकार की टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) की डेवलपमेंट एथलीट हैं। उन्होंने कई बार कहा है कि उनका अगला लक्ष्य भारत के लिए ओलंपिक मेडल जीतना है। जापान की दिग्गज जूडोका उटा आबे और भारतीय जूडो खिलाड़ी अवतार सिंह उनके प्रेरणास्रोत रहे हैं।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में रचा इतिहास
ग्लासगो में खेले गए महिला 48 किग्रा फाइनल में अस्मिता डे ने कनाडा की हेइडी क्वैच को 2-1 से हराया। पूरे मुकाबले में उन्होंने संयमित खेल दिखाया और 'यूको' के जरिए निर्णायक बढ़त हासिल कर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इस जीत के साथ वह कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो का गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गईं और भारतीय खेल इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया।
Amazon और Safer Internet India ने ग्राहकों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए गाइड जारी की
फर्जी वेबसाइट, नकली डिलीवरी पैकेज, भुगतान में धोखाधड़ी और बहुत सस्ता दिखने वाले ऑफर ऑनलाइन खरीदारी में धोखाधड़ी के सबसे आम तरीके बन चुके हैं। इन खतरों के बारे में उपभोक्ताओं को सतर्क करने के लिए एक नई उपभोक्ता गाइड जारी की गई है। इस हैंडबुक को सेफर इंटरनेट इंडिया ने तैयार किया है और इसे दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन के सहयोग से जारी किया गया है।
‘सुरक्षित ऑनलाइन खरीदारी के लिए आपका गाइड’ शीर्षक इस हैंडबुक का उद्देश्य ऑनलाइन खरीदारों को धोखाधड़ी पहचानने, उससे बचने और खुद को सुरक्षित रखने के आसान तरीके बताना है। एक विज्ञप्ति के मुताबिक, इस गाइड में फर्जी वेबसाइट, फर्जीवाड़ा करने वाले लिंक, नकली डिलीवरी की धांधली, खाली बॉक्स भेजने जैसी धोखाधड़ी, भुगतान फर्जीवाड़ा और फर्जी ग्राहक सहयोग खाता जैसे तरीकों की पहचान कराई गई है। इसके अलावा जल्दी करें जैसे दबाव बनाकर ठगने वाले फर्जीवाड़े और सदस्यता को आगे बढ़ाने के नाम पर धोखाधड़ी जैसे मामलों को भी शामिल किया गया है।
इस हैंडबुक में सुरक्षित ऑनलाइन खरीदारी के तरीके, भारतीय कानूनों के तहत उपभोक्ता अधिकार, शिकायत निवारण प्रणाली और व्यावहारिक सुरक्षा उपायों को सरल में समझाया गया है। अमेजन के उपाध्यक्ष (ग्राहक एवं साझेदार विश्वास) रोहन ओमेन ने कहा कि भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था और ई-कॉमर्स के विस्तार के साथ खासकर छोटे शहरों से नए ग्राहक जुड़ रहे हैं। लेकिन अनुभव की कमी के कारण वे ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार हो सकते हैं, इसलिए जागरूकता बेहद जरूरी है।
ओमेन ने पीटीआई-के साथ बातचीत में कहा कि वेरिफाई@अमेजन.कॉम जैसी सुविधा शुरू की गई है, जहां ग्राहक संदिग्ध ईमेल की जांच करवा सकते हैं। साथ ही, पिछले साल 70,000 से अधिक फर्जी वेबसाइट को पहचानकर हटाने में मदद भी की गई। उन्होंने बताया कि प्रौद्योगिकी के साथ उपभोक्ताओं को जागरूक बनाना भी जरूरी है, क्योंकि जब तक लोग खतरे को पहचानेंगे नहीं, तब तक सुरक्षा उपकरणों का सही इस्तेमाल भी नहीं कर पाएंगे।
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