IPL 2026: CSK को जीत की पटरी पर ला सकते हैं ये 3 बड़े बदलाव, लगातार तीन हार के बाद मुश्किल में टीम
IPL 2026: इंडियन प्रीमियर लीग की 5 बार की चैंपियन चेन्नई सुपर किंग्स खराब दौरे से गुजर रहे है. पिछले सीजन चेन्नई सुपर किंग्स प्वाइंट्स टेबल में सबसे नीचले स्थान पर रही थी. अब आईपीएल 2026 के शुरुआती 3 मैच चेन्नई सुपर किंग्स हार चुकी है. सीएसके का हालात देख इस सीजन भी प्लेऑफ में उसका पहुंचना मुश्किल लग रहा है. चेन्नई सुपर किंग्स को वापसी करनी है, तो उन्हें अपनी रणनीति में बदलाव करने होंगे.
CSK को करनी होगी गेंदबाजी डिपार्टमेंट में सुधार
IPL 2026 में चेन्नई सुपर किंग्स की गेंदबाजी डिपार्टमेंट ने काफी निराश किया है. पावरप्ले हो या फिर डेथ ओवर चेन्नई सुपर किंग्स के गेंदबाज कमाल नहीं कर पा रहे हैं. चेन्नई को इस सीजन वापसी करनी है तो उन्हें गेंदबाजों को विकेट निकालने के साथ रनों की गति पर भी रोक लगाने होंगे. चेन्नई सुपर किंग्स के स्क्वाड में अकील होसैन और जैकरी फॉलक्स जैसे 2 गेंदबाज मौजूद हैं, जो पावरप्ले और डेथ ओवरों में अच्छी गेंदबाजी कर सकते हैं, लेकिन चेन्नई सुपर किंग्स उन्हें प्लेइंग 11 में मौका नहीं दे रही है. अकील होसैन 273 टी20 मैचों में सिर्फ 7.1 की इकॉनामी रेट से 254 विकेट हासिल कर चुके हैं.
मीडिल ऑर्डर में अनुभवी खिलाड़ियों की जरूरत
चेन्नई सुपर किंग्स ने आईपीएल 2026 के ऑक्शन में प्रशांत वीर और कार्तिक वर्मा दोनों अनकैप्ड खिलाड़ियों को 14.20 करोड़ रुपये में खरीदकर चौंकाया था. शुरुआती तीनों मैचों में इन दोनों खिलाड़ियों को चेन्नई सुपर किंग्स ने प्लेइंग 11 में मौका दिला, मगर ये दोनों खिलाड़ी उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं. हालांकि दोनों खिलाड़ियों के पास प्रतिभा है, लेकिन इनके पास आईपीएल में मीडिल ऑर्डर में खेलने का अनुभव नहीं है. ऐसे में सीएसके इन दोनों युवा खिलाड़ियों पर ज्यादा भरोसा नहीं कर सकती है. ऐसे में सीएसके को मीडिल ऑर्डर में कोई अनुभवी बल्लेबाज की जरूरत है.
CSK को टॉप ऑर्डर में करना होगा बदलाव
IPL 2026 में चेन्नई सुपर किंग्स का टॉप ऑर्डर बुरी तरह से फ्लॉप रहा है. तीनों मैचों में सीएसके के ओपनर्स कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ और संजू सैमसन का बल्ला नहीं चला है. ऐसे में अगर दोनों खिलाड़ी फॉर्म में नहीं है और इनके बल्ले से रन नहीं आ रहे हैं, तो चेन्नई सुपर किंंग्स ओपनिंग कॉम्बिनेशन में बदलाव कर सकती है. युवा बल्लेबाज आयुष म्हात्रे ने पंजाब किंग्स के खिलाफ अर्धशतक लगाया था. उनसे सीएसके ओपनिंग करा सकती है. उनकी जगह नंबर-3 पर ऋतुराज गायकवाड़ बल्लेबाजी के लिए उतर सकते हैं. अब देखना वाली बात है कि चेन्नई सुपर किंग्स अपने अगले मैच में किस बदलाव के साथ उतरती है.
आईपीएल 2026 के लिए चेन्नई सुपर किंग्स का स्क्वाड
संजू सैमसन (विकेटकीपर), रुतुराज गायकवाड़ (कप्तान), आयुष म्हात्रे, मैथ्यू शॉर्ट, कार्तिक शर्मा, शिवम दुबे, जेमी ओवरटन, नूर अहमद, मैट हेनरी, अंशुल कंबोज, खलील अहमद, सरफराज खान, प्रशांत वीर, राहुल चाहर, गुरजापनीत सिंह, रामकृष्ण घोष, अकील होसेन, एमएस धोनी, श्रेयस गोपाल, स्पेंसर जॉनसन, मुकेश चौधरी, अमन खान, डेवाल्ड ब्रेविस, जैकरी फाउलकेस, उर्विल पटेल.
यह भी पढ़ें: 'भारतीय क्रिकेट को हल्के में लेने वालों को बैन करो', सुनील गावस्कर ने कमिंस, स्टार्क और हेजलवुड पर दिया बड़ा बयान
बांग्लादेश मुक्ति संग्राम: 50 साल बाद भी पाकिस्तान और जमात-ए-इस्लामी पर जवाबदेही से बचने के आरोप
ढाका, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। बांग्लादेश के 1971 के मुक्ति संग्राम के पांच दशक से अधिक समय बाद भी पाकिस्तान और कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी पर युद्ध अपराधों को लेकर स्पष्ट और बिना शर्त माफी से बचने के आरोप लगे हैं।
‘टाइम्स ऑफ बांग्लादेश’ की रिपोर्ट के अनुसार, यह केवल ऐतिहासिक विफलता नहीं बल्कि सच्चाई को छिपाने की एक सुनियोजित कोशिश है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान लंबे समय से “माफी” की जगह “खेद” जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर जिम्मेदारी से बचने की रणनीति अपनाता रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि “खेद” व्यक्त करना आसान होता है, क्योंकि इससे जिम्मेदारी स्वीकार किए बिना दुख जताया जा सकता है और ‘नरसंहार’ जैसे गंभीर शब्दों से बचा जा सकता है। इसे एक तरह की “योजनाबद्ध अस्पष्टता” बताया गया है।
वहीं, जमात-ए-इस्लामी की भूमिका को और अधिक गंभीर बताते हुए कहा गया है कि यह कोई बाहरी देश नहीं, बल्कि बांग्लादेश के भीतर सक्रिय राजनीतिक दल है, जिसने 1971 में न सिर्फ स्वतंत्रता का विरोध किया बल्कि पाकिस्तानी सैन्य शासन का साथ दिया और नागरिकों पर हुए अत्याचारों में शामिल रहा।
रिपोर्ट के मुताबिक, जमात-ए-इस्लामी ने अपने अतीत का सामना करने के बजाय अपनी राजनीतिक छवि बदलने की रणनीति अपनाई है। उसके बयान ऐसे होते हैं जो माफी जैसे लगते हैं, लेकिन वास्तव में जिम्मेदारी से बचने का प्रयास होते हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि हाल ही में ढाका स्थित राष्ट्रीय शहीद स्मारक पर जमात द्वारा दी गई श्रद्धांजलि “सच्ची श्रद्धांजलि” नहीं बल्कि “प्रतीकात्मक दिखावा” है, क्योंकि वह इतिहास में उस समय गलत पक्ष में खड़ी थी जब ये शहीद हुए थे।
रिपोर्ट के अंत में कहा गया कि पाकिस्तान को अस्पष्ट बयानों के पीछे छिपना बंद करना चाहिए और जमात-ए-इस्लामी को भी अपने अतीत का ईमानदारी से सामना करना चाहिए। जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक उनके सभी बयान और कदम केवल दिखावटी ही माने जाएंगे।
--आईएएनएस
डीएससी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation





















