भारत ने वो कर दिखाया है जिसे पश्चिमी देश कहते थे कि यह हो ही नहीं सकता। टेक्नोलॉजिकली यह पॉसिबल ही नहीं है। भारत ने आज बता दें कि इतिहास रच दिया है। तमिलनाडु के कलपक्कम परमाणु परिसर में मौजूद प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर यानी कि पीएफबीआर ने क्रिटिकिटी हासिल कर ली है। यानी कि बता दें कि अब यह जो रिएक्टर है यह खुद से न्यूक्लियर रिएक्शन को बनाए रख सकता है। और वो भी बिना किसी बाहरी सहायता के। बता दें कि यह वही मोमेंट है। यह वही पल है जब भारत ने ऑफिशियली अपने थ्री स्टेज न्यूक्लियर प्रोग्राम के दूसरे चरण में एंट्री कर ली।
बता दें कि खुद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि को भारत की सिविल न्यूक्लियर जर्नी का एक निर्णायक मोड़ भी बताया। उन्होंने अपने संदेश में यह साफ कहा। यह साफ लिखा कि भारत ने अपनी वैज्ञानिक क्षमता और इंजीनियरिंग उत्कृष्टता का एक बेहतरीन उदाहरण दुनिया के सामने एक बार फिर प्रस्तुत किया है। यह उपलब्धि, ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है। देश के वैज्ञानिक और जो इंजीनियर्स हैं उनको मैं बधाई देना चाहता हूं जिसने इस पूरे जटिल तकनीक को सफल बनाया। दरअसल यह कोई सामान्य रिएक्टर नहीं है। यह है ब्रीडर रिएक्टर यानी एक ऐसा रिएक्टर जो जितना ईंधन जलाता है, उससे कई गुना ज्यादा नया ईंधन यह पैदा करता है। यह प्लूटोनियम 239 बनाता है और भविष्य के लिए ईंधन का भंडार तैयार करता है। यानी ईंधन जो है वो खत्म नहीं होगा। ईंधन बढ़ता ही जाएगा। पश्चिम इसमें फेल हुआ लेकिन भारत सफल रहा। अमेरिका, जापान, जर्मनी, फ्रांस सभी ने इस टेक्नोलॉजी पर अरबों डॉलर खर्च किए। लेकिन बता दें कि सोडियम लीक फायर एक्सपेंसिव है यह सिस्टम।
बता दें कि कई देशों ने इस प्रोजेक्ट को बंद करना पड़ा। लेकिन भारत ने 20 साल की कड़ी मेहनत के बाद और स्वदेशी टेक्नोलॉजी को इस्तेमाल करके और धैर्य के साथ इस मिशन को ना सिर्फ पूरा किया बल्कि इसे सफल भी बनाया। भारत अब कहां पर खड़ा है? उस पर नजर डालते हैं। बता दें कि रूस और भारत के पास ही कमर्शियल स्केल फास्ट ब्रीडर रिएक्टर है। यानी भारत जो है वो अब न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी के टॉप क्लब में शामिल हो चुका है। तीन स्टेज का यह गेम चेंजर प्लान है। यह सब कुछ बता दें कि यह सब कुछ तब शुरू हुआ था जब महान वैज्ञानिक होमी भाबा के विज़न से इसे शुरू किया गया।
अमेरिका-ईरान सीजफायर के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से एविएशन सेक्टर को राहत मिली है. इसी के चलते इंडिगो की पैरेंट कंपनी InterGlobe Aviation के शेयर 11% तक उछलकर नुकसान की भरपाई कर चुके हैं.
Bumrah vs Sooryavanshi: मुंबई इंडियंस और राजस्थान रॉयल्स के बीच मुकाबले में बारिश ने खलल डाला और पहली गेंद का इंतजार लंबा हो गया था- करीब 3 घंटे। जब खेल शुरू तो साफ था कि पूरे 40 ओवर तो नहीं होंगे, अच्छी बात ये रही कि ओवर तो घटे लेकिन 11-11 ओवर यानी कुल 22 ओवर के खेल तय हुआ। लेकिन इस छोटे से मंच पर जो तस्वीर सामने आई, उसने पूरे क्रिकेट जगत को थाम लिया।
ये थी जसप्रीत बुमराह बनाम वैभव सूर्यवंशी की टक्कर- अनुभव और प्रतिभा का मुकाबला। राजस्थान रॉयल्स और मुंबई इंडियंस के बीच गुवाहाटी में खेले गए मुकाबले की शुरुआत ही अनिश्चितताओं से भरी रही। सवाल कई थे- क्या बुमराह और सूर्यवंशी आमने-सामने आएंगे? क्या बारिश फिर लौटेगी? क्या जिस टक्कर का सबको इंतजार था, वो अधूरा रह जाएगा?
Vaibhav ka jawaab nahi! ????????
Jasprit Bumrah par bhi Vaibhav Sooryavanshi pade bhaari! ????
वैभव बनाम बुमराह पहला ओवर दीपक चाहर ने डाला, लेकिन सूर्यवंशी का सामना उनसे नहीं हुआ। उस ओवर में यशस्वी जायसवाल ने 4, 6, 4, 0, 4, 4 की आतिशी शुरुआत की, पर उस दिन कहानी किसी और के नाम लिखी जानी थी।
जब बुमराह का वैभव से हुआ सामना स्कोरबोर्ड पर एक पल ऐसा आया जब बुमराह के सामने सूर्यवंशी खड़े थे-एक तरफ 32 साल का विश्वस्तरीय गेंदबाज, दूसरी ओर महज 15 साल का बच्चा, जो अभी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम भी नहीं रख पाया है, लेकिन अपनी प्रतिभा से दुनिया को हैरान कर चुका है।
बुमराह के खिलाफ वैभव ने मारे 2 छक्के पहली गेंद-बुमराह की ओर से एक साधारण हाफ वॉली, लेग स्टंप की लाइन पर। यह वह गेंद नहीं थी जिसके लिए बुमराह जाने जाते हैं। न यॉर्कर, न बाउंसर, न ही उनकी सटीक लेंथ। और सूर्यवंशी ने बिना किसी हिचक के, लगभग स्थिर खड़े-खड़े, कलाई के हल्के इस्तेमाल से गेंद को लॉन्ग-ऑन के ऊपर से हवाई सैर करा दी। यह शॉट शक्ति से ज्यादा टाइमिंग की समझ और सहजता की छाप था।
दूसरी गेंद पर बुमराह ने अपनी लय पकड़ी। सटीक रफ्तार, टाइट लाइन, और सूर्यवंशी ने उसे सम्मान देते हुए सिंगल लिया। यह पल दिखाता है कि यह युवा बल्लेबाज सिर्फ आक्रामक नहीं, बल्कि समझदार भी है।
तीसरी गेंद-छोटी लेंथ, शरीर की ओर आती हुई। यह गेंद बल्लेबाज को जकड़ने के लिए थी। लेकिन सूर्यवंशी ने जिस तेजी से अपनी पोजिशन बनाई, वह असाधारण थी। बैकफुट पर जाते हुए, शरीर को खोलते हुए, उन्होंने गेंद को स्क्वायर लेग के ऊपर से 79 मीटर दूर भेज दिया। यह शॉट केवल ताकत नहीं, बल्कि असाधारण टाइमिंग और तकनीक का नतीजा था।
तीन गेंदों में दो छक्के और एक कहानी जो समय से परे लगती है। सूर्यवंशी की तुलना पहले ही सचिन तेंदुलकर और ब्रायन लारा से की जा चुकी है, लेकिन इस शॉट में कहीं न कहीं डॉन ब्रैडमैन की झलक भी दिखाई दी, वह तेजी जिससे वे गेंद की लंबाई को पहचानते थे और खुद को तैयार कर लेते थे।
हर छठी गेंद पर छक्का उड़ा रहे सूर्यवंशी के आंकड़े भी इस कहानी को मजबूत करते हैं। आईपीएल 2026 से पहले टी20 क्रिकेट में उन्होंने 378 गेंदों पर 68 छक्के लगाए- हर 5.6 गेंद पर एक छक्का। यह आंकड़ा उन्हें सामान्य खिलाड़ियों से अलग खड़ा करता है।
यह ओवर खत्म हुआ, लेकिन इसका असर लंबे समय तक रहेगा। यह सिर्फ एक ओवर नहीं था, बल्कि दो पीढ़ियों का संवाद था, जहां अनुभव ने चुनौती दी और युवा प्रतिभा ने जवाब दिया। तीन घंटे का इंतजार, कुछ मिनटों का खेल और एक यादगार अध्याय, जो आईपीएल के इतिहास में लंबे समय तक गूंजता रहेगा।