एक दशक से सत्ता में रहने वाले वाम गठबंधन के लिए केरल विधानसभा चुनाव में मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। सत्ता विरोधी लहर के बाद भी अल्पसंख्यकों के बदलते रुख से सभी दलों की परेशानियां बढ़ी हुई हैं। प्रदेश में करीब 45 फीसदी ईसाई और मुस्लिम वोटर है। वहीं दलित वर्ग की आबादी करीब 9 फीसदी है। वहीं यह चुनाव वाम गठबंधन के लिए राजनीतिक अस्तित्व का सवाल है। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें, तो विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक, 2026 का असर इस चुनाव पर देखने को मिल सकता है। वहीं यूडीएफ इस मुद्दे को भुनाने में की पुरजोर कोशिश कर रही हैं।
FCRA है चुनाव में मुद्दा
केरल में सत्ता विरोधी लहर है, लेकिन यह कहना अभी मुश्किल है कि इसका ज्यादा फायदा किस गठबंधन को मिलेगा। अल्पसंख्यकों की भूमिका अहम है और वह विधेयक से डरे हुए हैं। राज्य में ईसाई एफसीआरए बिल से डरे हैं, वहीं मुस्लिमों को नागरिकता से जुड़े मुद्दों को लेकर परेशान हैं। राज्य में 27 फीसदी मुस्लिम और 18 फीसदी ईसाई हैं। ऐसे में केरल में अल्पसंख्यकों और दलितों का समर्थन प्राप्त किए बगैर किसी भी दल के लिए सत्ता की राह आसान नहीं है। पिछले 10 सालों में मौजूदा सत्ताधारी गठबंधन के शासन में भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार को लेकर जनता के बीच बदलाव की चिंगारी बन सकती है।
वाम गठबंधन के लिए तीसरी बार सत्ता में बने रहने की लड़ाई इसलिए ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है, क्योंकि देशभर में केरल एकमात्र ऐसा प्रदेश है, जो वामदलों की सरकार है। हालांकि LDF अपनी कल्याणकारी योजनाओं के प्रदर्शन सहित तमाम वर्गों के समर्थन से सत्ता में बने रहने की कोशिश कर रहा है। वहीं केंद्र के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर अधिक प्रभावी है, इसलिए दोनों गठबंधन की निगाहें अल्पसंख्यक वोटरों पर टिकी हैं।
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केरल की नेमोम विधानसभा सीट को भाजपा के लिए राज्य में प्रवेश द्वार माना जाता है। साल 2016 में यही से ओ राजगोपाल की जीत के साथ बीजेपी ने पहली बार केरल विधानसभा में एंट्री ली थी। तब से यह सीट राजनीतिक रूप से काफी अहम हो गई है। साल 2026 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर से यह सीट सुर्खियों में आ गई है। इस सीट पर एलडीएफ, यूडीएफ और एनडीए के बीच त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है।
शिवनकुट्टी मैदान में
वर्तमान समय में इस सीट पर LDF का कब्जा है। वहीं केरल के शिक्षा मंत्री वी शिवनकुट्टी एक बार फिर इस सीट से चुनावी मैदान में उतरे हैं। साल 2021 के चुनाव में शिवनकुट्टी ने बीजेपी उम्मीदवार को हराया था। लेकिन साल 2016 में उनको इस सीट से हार का सामना करना पड़ा था। ऐसे में यह साफ है कि नेमोम सीट का रुझान स्थिर नहीं है और हर चुनाव में इस सीट का परिणाम बदल सकता है।
NDA के राजीव चंद्रशेखर
इस बार भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर को चुनावी मैदान में उतारा है। राजीव इस सीट को जीतने के लिए जोरशोर से प्रचार कर रहे थे। पिछले चुनाव में बीजेपी ने यहां मजबूत प्रदर्शन किया था। वहीं पीएम मोदी की रैली से भी बीजेपी उम्मीदवार को फायदा मिलने की उम्मीद है।
UDF ने नए चेहरे पर जताया भरोसा
यूडीएफ ने नेमोम सीट से के एस सबरीनाधन को अपना उम्मीदवार बनाया है। जोकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जी कार्तिकेयन के बेटे हैं। उनके समर्थन में तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर भी प्रचार कर रहे हैं। कांग्रेस पार्टी को उम्मीद है कि लोकसभा चुनाव में थरूर की लोकप्रियता का फायदा विधानसभा चुनाव में भी मिल सकता है।
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