UPPSC RO-ARO Result 2023: यूपी RO-ARO का 419 पदों पर भर्ती का फाइनल रिजल्ट जारी, अनिल पांडेय बने टॉपर
UPPSC RO-ARO Result 2023: उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन की ओर से जारी यूपी आरओ-एआरओ 2023 भर्ती का फाइन रिजल्ट जारी कर दिया है. परिणाम की घोषणा के साथ मेरिट लिस्ट भी जारी कर दी गई है. इसे ऑफिशियल वेबसाइट uppsc.up.nic.in पर चेक कर सकते हैं. सभी उम्मीदवार तुरंत वेबसाइट पर जाकर दिए गए डायरेक्ट लिंक से मेरिट लिस्ट का PDF डाउनलोड कर सकते हैं और अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं.
अनिल पांडेय बने टॉपर
विभाग द्वारा जारी लिस्ट के अनुसार, 338 अभ्यर्थी समीक्षा अधिकारी और 81 अभ्यर्थी सहायक समीक्षा अधिकारी पद पर चुने गए हैं. परीक्षा में अनिल पांडेय ने RO में टॉप रैंक हासिल की है. आदित्य प्रताप सिंह को दूसरा स्थान प्राप्त हुआ वहीं लिस्ट में तीसरे नंबर पर लक्ष्मी वर्मा, जो कि महिला है, उन्हें मिला है.
ये भी पढ़ें- MMMUT में बीटेक छात्रों के लिए लागू हुए नए नियम, बीच में पढ़ाई छोड़ने के बाद भी मिलेगा पढ़ाई का चांस! जानें पूरी बात
419 कैंडिडेट्स का हुआ चयन
UPPSC की ओर से जारी फाइनल लिस्ट में 419 खाली पदों के सापेक्ष कुल 419 अभ्यर्थियों का चयन किया गया है. इस बारे में आयोग के सचिव अशोक कुमार ने परिणामों की घोषणा करते हुए आधिकारिक पुष्टि की है.
5930 अभ्यर्थियों ने दिया था एग्जाम
आयोग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, RO-ARO मुख्य परीक्षा 02 और 03 फरवरी 2026 को आयोजित हुई थी, जिसमें कुल 5930 अभ्यर्थी शामिल हुए थे. इसके बाद सहायक समीक्षा अधिकारी पद के लिए हिंदी टंकण परीक्षा 16, 17, 18 और 19 फरवरी 2026 को आयोजित की गई थी.
नेम वाइज रिजल्ट करें चेक
यूपीपीएससी आरओ-एआरओ की फाइनल लिस्ट जारी हो गई है. मेरिट लिस्ट में पास हुए कैंडिडेट्स का रोल नंबर, नाम और कैटेगरी मौजूद है. अभ्यर्थी अपने नाम के अनुसार रिजल्ट चेक कर सकते हैं. इन स्टेप्स को फॉलो करें.
रिजल्ट चेक करने के आसान स्टेप्स
- इसके लिए सबसे पहले ऑफिशियल वेबसाइट uppsc.up.nic.in पर जाएं.
- इसके बाद यहां होम पेज पर व्हॉट्स न्यू में रिजल्ट के PDF लिंक पर क्लिक करें.
- अब PDF स्क्रीन पर खुल जाएगा और आप इसे डाउनलोड कर सकेंगे.
- इसके बाद इसमें अपना रोल नंबर और नाम चेक करें.
UPPSC RO-ARO भर्ती 2023 के टॉप 10 अभ्यर्थी
1. अनिल पांडेय
2. आदित्य प्रताप सिंह
3. लक्ष्मी वर्मा
4. नीलेश कुमार सिंह
5. सूरज नारायण मिश्रा
6. शिवांशु शर्मा
7. हृषु श्यामली
8. शिवम पचौरी
9. मंगल सिंह
10. शिवम शुक्ला
ये भी पढ़ें- यूपी रोडवेड में कंडक्टर के 1000 पदों पर निकली भर्ती, 12वीं पास युवा करें आवेदन
महंगे लेजर या शॉक वेव नहीं, घुटनों के दर्द में साधारण उपाय ही सबसे प्रभावी
नई दिल्ली, 6 अप्रैल (आईएएनएस)। घुटनों का दर्द आज कई लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रहा है। यह दर्द धीरे-धीरे बढ़ता है और हड्डियों और जोड़ों की कार्यक्षमता को कम कर देता है। इस समस्या से परेशान लोग अक्सर दवाओं और लेजर थेरेपी या शॉक वेव जैसी महंगे तकनीकी उपचारों की तरफ रुख कर लेते हैं। लेकिन हाल ही में एक स्टडी में इससे विपरीत चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं।
प्लॉस वन में प्रकाशित नई स्टडी में शोधकर्ताओं ने 139 क्लिनिकल ट्रायल्स के डेटा का विश्लेषण किया, जिसमें करीब 10,000 प्रतिभागियों की जानकारी शामिल थी। उनका उद्देश्य था विभिन्न नॉन-ड्रग उपचारों की तुलना करना और पता लगाना कि कौन से तरीके सबसे ज्यादा असरदार हैं। इस स्टडी में 12 तरह की थेरेपी शामिल की गईं, जिसमें साधारण एक्सरसाइज से लेकर हाई-टेक उपचार जैसे लेजर और इलेक्ट्रिकल थेरेपी तक सब शामिल थे।
नतीजे चौंकाने वाले थे। शोध में यह पता चला कि सबसे प्रभावी तरीके सबसे महंगे या हाई-टेक नहीं थे। बल्कि, सरल और आसानी से उपलब्ध उपाय सबसे अच्छे साबित हुए। सबसे ऊपर रहे नी ब्रेसेस। ये ब्रेसेस घुटने को स्थिर करने में मदद करते हैं और जोड़ के किसी विशेष हिस्से पर दबाव कम करते हैं। इसका सीधा फायदा यह होता है कि दर्द कम होता है और चलने-फिरने में आसानी होती है। साथ ही, ये ब्रेसेस आसानी से उपलब्ध हैं और ज्यादा महंगे भी नहीं हैं, इसलिए अधिकांश मरीजों के लिए यह एक व्यवहारिक विकल्प है।
इसके बाद हाइड्रोथेरेपी यानी पानी में एक्सरसाइज ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया। गर्म पानी में व्यायाम करने से जोड़ पर भार कम होता है, जिससे घुटनों की मांसपेशियां सुरक्षित रहते हुए मजबूत होती हैं। पानी की प्रतिरोधक क्षमता मांसपेशियों को मजबूती देती है और दर्द को कम करती है। इस वजह से यह विधि दर्द राहत और मूवमेंट सुधार दोनों में असरदार साबित हुई।
तीसरा सबसे प्रभावी उपाय था नियमित एक्सरसाइज। रोजाना हल्का-फुल्का चलना, स्ट्रेचिंग और मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम घुटने की कार्यक्षमता बढ़ाते हैं। इससे जोड़ की कठोरता कम होती है, संतुलन बेहतर होता है और रोजमर्रा के काम करना आसान हो जाता है। समय के साथ यह मरीजों की जीवन गुणवत्ता में सुधार लाता है।
इसके विपरीत, हाई-टेक उपचार जैसे लेजर थेरेपी और शॉक वेव थेरेपी सिर्फ मध्यम लाभ दे पाए। अल्ट्रासाउंड थेरेपी सबसे कम असरदार साबित हुई। इसका मतलब यह है कि नई तकनीकें हमेशा सबसे बेहतर नहीं होतीं और सरल उपायों की तुलना में उनकी प्रभावशीलता कम हो सकती है।
इस स्टडी से यह भी साफ हुआ कि मरीजों और डॉक्टरों को घुटनों के ऑस्टियोआर्थराइटिस के इलाज में अपने दृष्टिकोण को बदलने की जरूरत है। महंगे या जटिल इलाज की बजाय सरल, सुरक्षित और सुलभ उपाय अपनाना ज्यादा असरदार हो सकता है। नी ब्रेसेस, हाइड्रोथेरेपी और नियमित व्यायाम आसानी से उपलब्ध हैं और इन्हें अपनाना भी आसान है।
--आईएएनएस
पीआईएम/एएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation


















