आर्टेमिस II मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों ने हैनसेन ओरियन कैप्सूल की खिड़की से देखा चांद, बताया अपना अनुभव
वांशिंगटन, 6 अप्रैल (आईएएनएस)। नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) के अंतरिक्ष यात्री क्रिस्टीना कोच, रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर और जेरेमी हैनसेन ओरियन कैप्सूल से आर्टेमिस-II मून मिशन पर गए हुए हैं। नासा के अंतरिक्ष यात्रियों ने स्थानीय समयानुसार रविवार को अमेरिकी मीडिया को बताया कि उन्होंने हैनसेन ओरियन कैप्सूल की खिड़की से चंद्रमा को देखा।
अमेरिकी मीडिया एनबीसी के साथ बातचीत के दौरान क्रिस्टीना कोच ने चांद देखने का अपना अनुभव शेयर किया। उन्होंने कहा कि यह धरती से दिखने वाले चांद से अलग दिखता है। कोच ने कहा, जैसे हम आमतौर पर चांद को देखते आ रहे हैं, यहां आपकी समझ में कुछ ऐसा होता है जो चांद को वैसा नहीं दिखने देता है। जैसे कि चांद का अंधेरे वाला हिस्सा बिल्कुल सही जगह पर नहीं लगता है। कोच ने यह भी स्पष्ट किया कि यह चांद का वही अंधेरा वाला हिस्सा है, जिसे अंतरिक्ष यात्रियों ने पहले भी देखा है।
कोच ने आगे बताया कि उन्होंने और तीन दूसरे क्रू मेंबर्स अंतरिक्ष यात्री रीड वाइसमैन और विक्टर ग्लोवर और कैनेडियन एस्ट्रोनॉट जेरेमी हैनसेन ने अपने ट्रेनिंग मटेरियल (ट्रेनिंग के दौरान साझा की गई जानकारी) की समीक्षा की और जो कुछ वे देख रहे थे, उससे उसकी तुलना की ताकि उस अनजान नज़ारे को समझा जा सके।
अंतरिक्ष यात्री ने बताया कि जो दृश्य उन्हें अंतरिक्ष से दिखाई दे रहा था, वह उनके लिए नया और थोड़ा अनजान था। इसलिए उन्होंने अपनी ट्रेनिंग के दौरान सीखी गई जानकारी से उसकी तुलना की। इस प्रक्रिया के जरिए वे उस अलग दिखने वाले नजारे को बेहतर तरीके से समझने की कोशिश कर रहे थे। अंतरिक्ष यात्री यह समझने की कोशिश कर रहे थे कि वास्तव में वे क्या देख रहे हैं और वह उन्हें अलग क्यों महसूस हो रहा है।
कोच ने कहा कि सभी क्रू मेंमबर में इसे लेकर काफी उत्साह है। वे ओरियन कैप्सूल के अंदर आराम से सो पा रहे हैं। कैप्सूल लगभग 16.5 फीट चौड़ा है और इसमें कैंपर वैन जितनी रहने की जगह है।
उन्होंने कहा, यहां इंसान होना इस मिशन की सबसे दिलचस्प चीजों में से एक है। उन्होंने बताया कि वे सब बस सामान्य इंसानों की तरह ही अपनी दिनचर्या संभालने की कोशिश कर रहे हैं।
कोच ने हल्के-फुल्की भाषा में समझाते हुए कहा कि हम चांद के दूसरी तरफ जाकर उसकी शानदार चीजों को देख सकते हैं और फिर सोच सकते हैं, हम्म, शायद मुझे अपने मोजे बदल लेने चाहिए और मोजों की एक जोड़ी ढूंढने की कोशिश कर सकते हैं। तो यह मानव अंतरिक्ष यात्रा का एक अनोखा पहलू है।
बता दें, नासा का ये मिशन 10 अप्रैल को प्रशांत महासागर में स्प्लैशडाउन के साथ पूरा होगा। नासा का लक्ष्य 2028 तक चांद के दक्षिणी ध्रुव के पास दो अंतरिक्ष यात्रियों को उतारना और भविष्य में चांद पर स्थायी बेस बनाना है।
--आईएएनएस
केके/एएस
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Iran-Israel War: किसकी जीत की तरफ बढ़ रही जंग? अभी तक किसका पलड़ा भारी...
Iran Israel War Who Is Winning: मिडिल ईस्ट में जारी Iran–Israel conflict को लेकर दुनिया भर में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इस टकराव में किसको बढ़त मिल रही है. इस वॉर में किसकी जीत हो रही है पूरी दुनिया ये बात जानना चाहती है.
हालांकि अभी यह संघर्ष पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है, लेकिन सैन्य ताकत, रणनीति और अंतरराष्ट्रीय समर्थन को देखकर विशेषज्ञ लगातार आकलन कर रहे हैं. वर्तमान के हमलों और हालातों का आंकलन कर पूर्व सैन्य अधिकारी ये बता रहे हैं कि किसका पलड़ा भारी है? आइए हम आपको इसके बारे में बेहद आसान भाषा में बताते हैं.
क्या अभी तक किसी की साफ जीत हुई है?
अब तक इस टकराव में किसी भी पक्ष की निर्णायक जीत घोषित नहीं हुई है. दोनों देशों के बीच हमले, जवाबी कार्रवाई और कूटनीतिक दबाव का दौर जारी है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह पारंपरिक युद्ध की तरह नहीं बल्कि लंबे समय तक चलने वाला रणनीतिक संघर्ष बन गया है. इसलिए अभी Iran Israel War “किसने जीती” कहना जल्दबाजी होगा.
ईरान या इजरायसल अभी किसकी बढ़त मानी जा रही है?
कई रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि सैन्य तकनीक और अंतरराष्ट्रीय समर्थन के कारण इजरायल फिलहाल रणनीतिक बढ़त बनाए हुए है. दरअसल, इजरायल की एयर डिफेंस और मिसाइल सिस्टम काफी मजबूत मानी जाती है. अमेरिका और पश्चिमी देशों का भी उसे समर्थन है. जिसके चलते वह कुछ मामलों में ईरान से मजबूत दिखाई पड़ रहा है.
क्या ईरान सैन्य ताकत में मजबूत है?
ईरान को मिडिल ईस्ट की बड़ी सैन्य शक्तियों में गिना जाता है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान के पास बड़ी संख्या में मिसाइलें और ड्रोन तकनीक है. कई समूह भी ईरान के साथ जुड़े हुए हैं जो वॉर में उसकी मदद कर रहे हैं. वहीं, बीते लंबे समय ईरान ने अपनी रक्षा क्षमता बढ़ाने पर काम किया है, जिसका उसे फायदा मिल रहा है. एक्सपर्ट कहते हैं ईरान सीधे युद्ध के साथ क्षेत्रीय दबाव की रणनीति भी अपना रहा है.
क्या इजरायल तकनीकी ताकत में आगे है?
Israel की सैन्य तकनीक और खुफिया क्षमता को काफी हाई क्वालिटी माना जाता है. उसके पास आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम, हाई-टेक ड्रोन और साइबर क्षमताएं हैं. इजरायल के पास मजबूत खुफिया नेटवर्क है. विशेषज्ञों की मानें तो तकनीकी युद्ध में इजरायल फिलहाल आगे दिखता है.
क्या यह जंग जल्दी खत्म हो सकती है?
फिलहाल ऐसा साफ संकेत नहीं है कि ये जंग जल्द खत्म हो सकती है. मिडिल ईस्ट की राजनीति, अंतरराष्ट्रीय दबाव और क्षेत्रीय गठबंधन इस संघर्ष को लंबा भी खींच सकते हैं. कई देशों की कोशिश है कि युद्ध को कूटनीतिक रास्ता निकालकर खत्म करवाया जाए.
FAQ
Q1. क्या ईरान-इजरायल युद्ध खत्म हो गया है?
नहीं, यह संघर्ष अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और हालात लगातार बदल रहे हैं.
Q2. क्या अभी किसी देश की जीत घोषित हुई है?
नहीं, अभी तक किसी भी पक्ष की निर्णायक जीत नहीं हुई है.
Q3. ईरान और इजरायल में सैन्य रूप से कौन मजबूत है?
सामान्य तौर पर ईरान के पास बड़ी मिसाइल क्षमता और क्षेत्रीय नेटवर्क है, जबकि इजरायल तकनीकी और एयर डिफेंस में आगे माना जाता है.
Q4. क्या यह संघर्ष बड़े युद्ध में बदल सकता है?
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर तनाव बढ़ता रहा तो इसका असर पूरे मिडिल ईस्ट पर पड़ सकता है, इसलिए कई देश इसे रोकने की कोशिश कर रहे हैं.
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