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सदियों पुराना देसी सुपरफूड: सत्तू का सफर रहा है दिलचस्प, सैनिकों के राशन से हेल्थ ट्रेंड तक, पढ़ें दिलचस्प बातें
Indian superfood: आज के दौर में जब महंगे सुपरफूड्स का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है, वहीं एक सादा और देसी आहार फिर से अपनी पहचान बना रहा है सत्तू। पोषण से भरपूर और सदियों पुरानी परंपरा से जुड़ा यह फूड कभी सैनिकों और यात्रियों की ताकत का राज हुआ करता था। अब वही सत्तू आधुनिक लाइफस्टाइल में एक हेल्दी सुपरफूड के रूप में दोबारा लोकप्रिय हो रहा है।
सत्तू की सबसे बड़ी खासियत इसकी उपयोग में आसानी है। कम कीमत में ज्यादा पोषण देने वाला यह आहार आज के हेल्थ-कॉन्शियस लोगों के लिए परफेक्ट विकल्प बनता जा रहा है। जैसे-जैसे लोग नेचुरल और देसी खानपान की ओर लौट रहे हैं, सत्तू भी एक बार फिर से सुर्खियों में आकर हेल्दी डाइट का अहम हिस्सा बनता जा रहा है।
सत्तू की शुरुआत कब हुई?
सत्तू का इतिहास काफी पुराना माना जाता है और इसकी जड़ें प्राचीन भारत तक जाती हैं। माना जाता है कि यह भोजन मौर्य काल (लगभग 4वीं-2वीं शताब्दी ईसा पूर्व) में प्रचलन में था। उस समय सैनिक और यात्री इसे अपने साथ रखते थे, क्योंकि यह हल्का, पौष्टिक और लंबे समय तक खराब न होने वाला भोजन था। बिना पकाए भी इसे पानी में घोलकर खाया जा सकता था, जो इसे यात्रा के लिए आदर्श बनाता था।
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कैसे बना आम लोगों का पसंदीदा फूड?
समय के साथ सत्तू आम लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हुआ, खासकर ग्रामीण इलाकों में। बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों में यह रोजमर्रा के खानपान का हिस्सा बन गया। इसकी सबसे बड़ी खासियत थी कि इसे बनाना आसान था बस चने को भूनकर पीसना होता है। कम खर्च में ज्यादा पोषण मिलने की वजह से यह गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए भी एक भरोसेमंद आहार बन गया।
गर्मी का सुपरफूड कैसे बना?
भारत के गर्म इलाकों में सत्तू को खास तौर पर “गर्मी का सुपरफूड” माना जाता है। इसकी तासीर ठंडी होती है, जिससे यह शरीर को ठंडा रखने में मदद करता है। पहले के समय में जब फ्रिज या कोल्ड ड्रिंक जैसी सुविधाएं नहीं थीं, तब लोग सत्तू का घोल बनाकर पीते थे, जिससे उन्हें तुरंत ऊर्जा और ठंडक मिलती थी। यही वजह है कि यह धीरे-धीरे गर्मियों का सबसे लोकप्रिय देसी ड्रिंक बन गया।
आज के समय में सत्तू की लोकप्रियता
आज सत्तू सिर्फ गांवों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शहरों और हेल्थ-कॉन्शियस लोगों के बीच भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इसे “इंडियन सुपरफूड” के रूप में देखा जाने लगा है। फिटनेस एक्सपर्ट्स भी इसे हाई प्रोटीन और लो-कॉस्ट न्यूट्रिशन का अच्छा स्रोत मानते हैं। अब सत्तू से बने शेक, स्मूदी, और हेल्दी स्नैक्स शहरों के कैफे और डाइट प्लान में भी शामिल हो चुके हैं।
सत्तू का सफर प्राचीन काल से शुरू होकर आज के मॉडर्न दौर तक पहुंच चुका है। सादगी, पोषण और आसानी से बनने की खासियत ने इसे हर दौर में खास बनाए रखा है। यही कारण है कि आज भी सत्तू उतना ही प्रासंगिक है जितना सदियों पहले था।
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