गर्भावस्था में अपच और भूख न लगने से परेशान? अपनाएं ये आसान घरेलू उपाय
नई दिल्ली, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। गर्भावस्था हर महिला के जीवन का बेहद खास समय होता है, लेकिन इस दौरान शरीर में होने वाले बदलाव कई तरह की परेशानियां भी लेकर आते हैं। इन्हीं में से एक आम समस्या है अपच, पेट में भारीपन और भूख न लगना।
दरअसल, प्रेग्नेंसी में हार्मोनल बदलाव के कारण पाचन प्रक्रिया धीमी हो जाती है, जिससे गैस, एसिडिटी और मतली जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। आयुर्वेद और विज्ञान दोनों ही मानते हैं कि खानपान और कुछ प्राकृतिक उपायों के जरिए इन समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
आयुर्वेद में सौंफ को पाचन के लिए बहुत लाभकारी माना गया है। सौंफ में मौजूद प्राकृतिक तेल और फाइबर पेट की मांसपेशियों को आराम देते हैं और गैस बनने की समस्या को कम करते हैं। सौंफ में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीस्पास्मोडिक गुण होते हैं, जो पेट में ऐंठन और भारीपन को कम करने में मदद करते हैं। जब सौंफ को पानी में उबालकर पिया जाता है, तो इसके तत्व और भी आसानी से शरीर में घुल जाते हैं और पाचन तंत्र को शांत करते हैं। यही वजह है कि खाने के बाद थोड़ी सौंफ लेने से पेट हल्का महसूस होता है और अपच की समस्या कम हो सकती है।
अदरक को भी प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाली मतली और अपच के लिए बेहद असरदार माना जाता है। आयुर्वेद में अदरक को महा औषधि कहा गया है, क्योंकि यह पाचन अग्नि को मजबूत करता है। विज्ञान के अनुसार, अदरक में जिंजरोल और शोगोल जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो पेट में बनने वाले एसिड को संतुलित करते हैं और उल्टी जैसा महसूस होने से राहत देते हैं। जब अदरक के साथ नींबू मिलाया जाता है, तो यह और ज्यादा असरदार हो जाता है। नींबू में विटामिन सी और प्राकृतिक एसिड होते हैं, जो पाचन रस को सक्रिय करते हैं और भोजन को जल्दी पचाने में मदद करते हैं। इस मिश्रण को गुनगुने पानी के साथ लेने से पेट हल्का रहता है और भूख भी धीरे-धीरे बढ़ने लगती है।
नारियल पानी भी इस दौरान बहुत फायदेमंद माना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, यह शरीर को ठंडक देता है और पित्त दोष को संतुलित करता है, जो प्रेग्नेंसी में बढ़ जाता है और एसिडिटी का कारण बनता है। नारियल पानी में इलेक्ट्रोलाइट्स जैसे पोटैशियम और मैग्नीशियम होते हैं, जो शरीर को हाइड्रेट रखते हैं और पेट की जलन को शांत करते हैं। जब शरीर हाइड्रेटेड रहता है, तो पाचन प्रक्रिया भी बेहतर तरीके से काम करती है और अपच की समस्या कम हो जाती है। नियमित रूप से ताजा नारियल पानी पीने से शरीर में ऊर्जा भी बनी रहती है।
--आईएएनएस
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US Iran Conflict: एक गलती और तबाही शुरू! ईरान-अमेरिका जंग का न्यूक्लियर मोड़; खाड़ी देशों में बढ़ी चिंता
अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अब एक बेहद खतरनाक रूप ले लिया है. खासतौर पर ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित बुशेहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर बार-बार हो रहे हमलों ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. खबरों के मुताबिक, एक महीने में इस न्यूक्लियर प्लांट पर चार बार हमले हो चुके हैं.
परमाणु हादसे का खतरा
अब तक इस संघर्ष का असर तेल और गैस की सप्लाई पर दिख रहा था, लेकिन अब सबसे बड़ा खतरा परमाणु हादसे का है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने चेतावनी दी है कि अगर इस प्लांट पर सीधा हमला हुआ, तो इसका असर सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहेगा. इसका रेडियोधर्मी असर खाड़ी देशों (GCC) तक फैल सकता है.
क्यों बढ़ गया है खतरा?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय सबसे बड़ा खतरा परमाणु बम नहीं, बल्कि परमाणु प्लांट पर होने वाला कोई हादसा है. अगर कोई मिसाइल गलती से या जानबूझकर न्यूक्लियर प्लांट के संवेदनशील हिस्सों जैसे कि रिएक्टर कोर, स्पेंट फ्यूल पूल और कूलिंग सिस्टम पर गिर जाती है, तो रेडियोधर्मी रिसाव (Radiation Leak) हो सकता है.
ऐसी स्थिति में रेडिएशन हवा और समुद्री धाराओं के जरिए सैकड़ों किलोमीटर तक फैल सकता है. इससे लाखों लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है और समुद्री जीवन भी बुरी तरह प्रभावित हो सकता है.
अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की चिंता
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने भी इस मामले पर चिंता जताई है. एजेंसी के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने साफ कहा है कि किसी भी न्यूक्लियर साइट पर हमला नहीं होना चाहिए. हालांकि, एजेंसी ने यह भी कहा है कि अभी तक रेडिएशन लेवल में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है, लेकिन खतरा बना हुआ है.
ईरान भी कर रहा है जवाबी हमला
यह लड़ाई एकतरफा नहीं है. ईरान भी इजराइल के न्यूक्लियर ठिकानों को निशाना बना रहा है. खासकर डिमोना न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर पर हमले की कोशिशें हो रही हैं. हाल ही में ईरान की मिसाइल ने नेगेव रेगिस्तान में उस जगह के पास हमला किया, जो डिमोना प्लांट से कुछ ही किलोमीटर दूर है. माना जाता है कि यहां इजराइल के पास कई परमाणु हथियार मौजूद हैं.
कितना घातक हो सकता है असर?
अगर इस तरह के किसी प्लांट पर हमला सफल हो जाता है, तो इसका असर बहुत विनाशकारी हो सकता है, इतना कि हिरोशिमा और नागासाकी जैसे हमलों से भी कई गुना ज्यादा तबाही हो सकती है.
पहले भी हो चुके हैं ऐसे खतरे
यह पहली बार नहीं है जब किसी न्यूक्लियर प्लांट पर युद्ध के दौरान खतरा पैदा हुआ हो. रूस-यूक्रेन युद्ध में भी जेपोरेजिया न्यूक्लियर पावर प्लांट पर कई बार हमले हुए थे. इन घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि आधुनिक युद्ध में परमाणु ठिकाने सबसे संवेदनशील और खतरनाक लक्ष्य बन चुके हैं.
छोटी सी गलती पड़ सकती है भारी
इस पूरे मामले में सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर कोई छोटी सी गलती भी हो गई, तो उसका असर पूरे क्षेत्र पर पड़ेगा. यह सिर्फ एक देश की समस्या नहीं रहेगी, बल्कि कई देशों की आबादी और पर्यावरण को प्रभावित करेगी. युद्ध के इस दौर में परमाणु संयंत्रों की सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है, क्योंकि यहां हुई एक गलती पूरी दुनिया के लिए खतरा बन सकती है.
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