होर्मुज को लेकर ट्रंप की धमकियों के बाद कुवैती तेल से लदे टैंकर पर ईरान ने ड्रोन से किया हमला
नई दिल्ली, 31 मार्च (आईएएनएस)। ईरान ने कुवैत के एक तेल टैंकर पर हमला किया है। इस हमले की पुष्टि कुवैत के लोगों ने की है। दुबई मीडिया ऑफिस ने बताया कि इस हमले में जानमाल का कोई नुकसान नहीं हुआ है। इसके साथ ही दुबई के पानी में तेल से भरे टैंकर पर हमले के बाद किसी लीक या किसी के घायल होने की खबर नहीं है।
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को धमकी दी थी कि अगर होर्मुज स्ट्रेट को फिर से नहीं खोला गया तो वे उसकी तेल फैसिलिटी को उड़ा देंगे। ट्रंप की इस धमकी के बाद ही कुवैती तेल टैंकर पर हमले की जानकारी सामने आई है।
अमेरिकी मीडिया की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, ट्रंप की धमकी को लेकर व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा कि अमेरिकी सेना हमेशा कानून का पालन करेगी। इस बीच विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला करना एक युद्ध अपराध हो सकता है।
दुबई के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि रिस्पॉन्स टीमों ने दुबई के पानी में कुवैती तेल टैंकर से जुड़ी घटना को सफलतापूर्वक काबू कर लिया है, जिसमें कोई लीक नहीं हुआ और किसी के घायल होने की खबर नहीं है।
इससे पहले, कुवैत की सरकारी न्यूज एजेंसी कूना ने बताया दुबई के पास खड़े बड़े क्रूड कैरियर अल-सलमी पर ईरानी सेना ने हमला किया था। कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने तेल लीक की संभावना की चेतावनी दी थी।
ब्रिटेन की मैरीटाइम अथॉरिटी (यूकेएमटीओ) के मुताबिक, जहाज दुबई से 31 नॉटिकल मील उत्तर-पश्चिम में हमले का शिकार हुआ था। इस हमले से जहाज में आग लग गई, जिसे बाद में दुबई के अधिकारियों ने बुझा दिया। अधिकारियों ने बताया कि अब आग पर काबू पा लिया गया है।
दूसरी तरफ चीन ने अमेरिका-इजरायल से ईरान के खिलाफ जारी हमलों को तुरंत रोकने की अपील की है। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह सभी पक्षों से सैन्य कार्रवाई बंद कर शांति बनाए रखने का अनुरोध करता है।
इसके साथ ही चीन ने परमाणु संयंत्रों और 133 ऐतिहासिक स्थलों को पहुंचे नुकसान को भी अफसोसनाक बताया। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने मंगलवार को प्रेस ब्रीफिंग में सरकार का पक्ष रखा।
उन्होंने कहा, दुनिया की सांस्कृतिक धरोहर पूरी इंसानियत के लिए एक बेशकीमती संपत्ति है। चीन को इस बात का बहुत अफसोस है कि संघर्ष के दौरान ईरान की सांस्कृतिक निशानियों और स्मारकों को नुकसान पहुंचाया गया। वहीं, उन्होंने चीन ने परमाणु सुविधाओं पर हमलों का विरोध करते हुए कहा कि ऐसे कदम बेहद खतरनाक हैं।
--आईएएनएस
केके/एबीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
सिंध में माछी समुदाय पर पाकिस्तानी पुलिस की बर्बरता से भारी आक्रोश
इस्लामाबाद, 31 मार्च (आईएएनएस)। पाकिस्तानी पुलिसकर्मियों की ज्यादती से देश में चिंता व्याप्त हो गई है। हाल ही पुलिस सिंध प्रांत में गरीब माछी समुदाय को मारती पीटती दिखी। सोशल मीडिया पर इसका फुटेज अपलोड होते ही बड़ी संख्या लोग नाराज हो गए।
मंगलवार को आई एक रिपोर्ट के अनुसार, फुटेज में दिखाया गया है कि सिंध के उमरकोट इलाके में गरीब माछी समुदाय की झुग्गियों पर पुरुष और महिला पुलिस अधिकारियों ने धावा बोल दिया। वे बेकसूर, बेसहारा, रोजादार महिलाओं और छोटी बच्चियों को घसीट रहे थे, उनके कपड़े फाड़ रहे थे, और उन्हें पुलिस वैन में ठूंस रहे थे।
पाकिस्तानी दैनिक बिजनेस रिकॉर्डर की एक रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है, ये तस्वीरें रूह कंपा देने वाली हैं। एक पल के लिए, कोई यह मान सकता है कि हत्या या आतंकवाद में शामिल खूंखार अपराधियों को पकड़ने के लिए कोई बड़ा ऑपरेशन चल रहा था। लेकिन नहीं, ये तो आम महिलाएं, छोटी बच्चियां और बच्चे थे। उनके परिवारों के पुरुष सदस्य या तो पहले से ही हिरासत में थे या फिर अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए बाहर गए हुए थे।
इसमें आगे कहा गया है कि यह ऑपरेशन एक निचली अदालत के आदेश पर किया गया। इसमें 10,000 वर्ग फुट के एक प्लॉट को खाली कराने को कहा गया था; इस प्लॉट पर माछी समुदाय लंबे समय से रह रहा था।
हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि जिस तरीके से पुलिस ने—जिसका काम लोगों की जान, इज्जत और संपत्ति की हिफाजत करना है—इस आदेश को लागू किया, वह बेहद चिंताजनक था।
इसमें कहा गया है, भले ही बेदखली जरूरी थी, लेकिन क्या इतनी जबरदस्ती करना जरूरी था—खासकर रमजान के पवित्र महीने में? क्या हिंसा का सहारा लेने से पहले शांतिपूर्ण तरीके से बातचीत, समझाना-बुझाना और कानूनी संयम जैसे सभी तरीके आजमा लिए गए थे? इसका जवाब, जो वायरल वीडियो में साफ-साफ दिखाई दे रहा है, वो नहीं लगता है।
इसमें आगे सवाल उठाया गया है, निचली अदालत का फैसला न तो अंतिम था और न ही उसे चुनौती दी जा सकती थी। इसके खिलाफ जिला और सत्र न्यायालय में, फिर उच्च न्यायालय में, और आखिर में सर्वोच्च न्यायालय में अपील की जा सकती थी। यह कानूनी प्रक्रिया सबको अच्छी तरह पता है। फिर जब कानूनी विकल्प मौजूद थे, तो इतनी अजीब जल्दबाजी और आक्रामकता क्यों दिखाई गई? इतनी तेजी सिर्फ तभी क्यों दिखाई गई, जब वहां रहने वाले लोग गरीब और कमजोर थे?
रिपोर्ट के अनुसार, सिंध पुलिस ने रसूखदार लोगों और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली व्यक्तियों का पक्ष लेने के लिए बदनामी कमाई है; कानून का पहिया अक्सर ताकतवर लोगों के लिए तेजी से घूमता है।
इस घटना की निंदा करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है, यह कोई छोटी या टाली जा सकने वाली घटना नहीं है। यह हम सबके लिए शर्म की बात है। गरीबी और कमजोरी कोई अपराध नहीं हैं। देश का कानून बिना किसी भेदभाव के, सभी के लिए समान और पवित्र है। फिर भी बार-बार ऐसा होता है कि आम लोगों को इसके परिणाम भुगतने पड़ते हैं, जबकि रसूखदार लोग अपने प्रभाव और पद का इस्तेमाल करके न्याय से बच निकलते हैं।
--आईएएनएस
केआर/
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