Responsive Scrollable Menu

West Asia संकट का Surat पर गहरा असर, LPG नहीं तो रोटी कैसे? बेबस मजदूर कर रहे पलायन

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर गुजरात के सूरत में दिखने लगा है, जहां बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर उधना रेलवे स्टेशन पर जमा हो गए हैं और एलपीजी की भारी कमी के कारण अपने पैतृक स्थानों पर लौटने की तैयारी कर रहे हैं। कई मजदूरों ने बताया कि नौकरी होने के बावजूद उन्हें अपना घर छोड़ना पड़ा, क्योंकि खाना पकाने की गैस की कमी से उनका गुजारा मुश्किल हो गया है। उन्होंने दावा किया कि एलपीजी की कीमतें बढ़कर लगभग 500 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई हैं, जिससे यह उनके लिए अफोर्डेबल नहीं रह गई है और कई लोगों को कई दिनों तक ठीक से खाना भी नहीं मिल पा रहा है।
 

इसे भी पढ़ें: Iran Attack पर Congress में रार: Sandeep Dikshit बोले- Shashi Tharoor को गंभीरता से न लें


सचिन नाम के एक मजदूर ने बताया कि उन्हें कई दिनों से गैस नहीं मिली है और फैक्ट्रियां भी बंद हो रही हैं, जिससे उनकी आमदनी रुक गई है। उन्होंने आगे बताया कि कई मजदूर अपने गांवों की ओर लौट रहे हैं और हालात सुधरने के बाद ही वापस आएंगे। एक अन्य श्रमिक सीमा देवी ने बताया कि वह लगभग दो सप्ताह से गैस प्राप्त करने का प्रयास कर रही थीं, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। पैसे और खाना पकाने के ईंधन के अभाव में, उन्होंने अपनी बेटी के साथ गांव लौटने का फैसला किया, जबकि परिवार के अन्य सदस्य वहीं रुक गए।

श्रमिकों ने यह भी बताया कि वे खाना पकाने के वैकल्पिक तरीकों का उपयोग करने में असमर्थ थे, क्योंकि मकान मालिकों ने किराए के कमरों के अंदर लकड़ी जलाने पर रोक लगा दी थी। कई श्रमिकों ने गैस आपूर्ति सामान्य होने पर लौटने की उम्मीद जताई, लेकिन उनके अचानक चले जाने से सूरत के कपड़ा उद्योग में श्रमिकों की कमी हो गई है। इस बीच, सरकार खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा सुरक्षा और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक साझेदारों के साथ बातचीत कर रही है। संघर्ष के कारण हुए व्यवधानों से प्रभावित निर्यातकों को सहायता देने के लिए 497 करोड़ रुपये के राहत पैकेज की भी घोषणा की गई है।
 

इसे भी पढ़ें: भारत से सटे इलाकों में ईसाई राज्य बनाने का अमेरिकी प्लान, RAW और KGB के धुरंधर ऑपरेशन ने कैसे CIA को दी मात


अधिकारियों ने कहा कि वैश्विक स्तर पर स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है, लेकिन आपूर्ति को स्थिर करने के प्रयास जारी हैं। गौरतलब है कि हाल ही में दो भारतीय एलपीजी वाहक जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित रूप से पार करके भारत पहुंचे, जिससे संकट के बीच कुछ राहत मिली है।

Continue reading on the app

Iran Attack पर Congress में रार: Sandeep Dikshit बोले- Shashi Tharoor को गंभीरता से न लें

कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने 20 मार्च को अपने सहयोगी शशि थरूर की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने ईरान पर अमेरिका-इजराइल के हमले की निंदा करने में मोदी सरकार के संयम का समर्थन किया था। दीक्षित ने कहा कि केरल के सांसद को गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए क्योंकि वे मुद्दों को समझे बिना ही अपनी राय रखते हैं। उन्होंने अपनी आलोचना को और तीखा करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी थरूर नेहरूवादी विदेश नीति की परंपरा का पालन करने के बजाय पेंशन और दूसरों से विनम्रतापूर्वक बात करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं। 
 

इसे भी पढ़ें: Congress से आए Pradyut Bordoloi को Dispur से टिकट, BJP के दिग्गज MLA Atul Bora का पत्ता कटा, मचा घमासान


दीक्षित ने एएनआई को बताया कि मेरा मानना ​​है कि उन्हें (शशि थरूर को) चीजों की ज्यादा समझ नहीं है। अगर कोई बिना समझे कोई राय रखता है, तो उसे गंभीरता से नहीं लेना चाहिए। मेरी राय में, इस मुद्दे पर थारूर की समझ और टिप्पणियां एक गंभीर व्यक्ति की सोच को नहीं दर्शाती हैं। दीक्षित ने ऐसी घटनाओं को चुपचाप स्वीकार न करने की चेतावनी देते हुए कहा कि अगर हम चुपचाप सब कुछ देखते रहेंगे, तो अपवाद भी आम बात हो जाएगी। वेनेजुएला में अमेरिका ने उसके राष्ट्रपति को देश की धरती से उठा लिया। ईरान में उन्होंने राष्ट्राध्यक्ष की हत्या कर दी। अगर हम ऐसी घटनाओं पर चुप रहेंगे तो अमेरिका को दूसरे देशों में ऐसा करने से कौन रोकेगा? किसी भी देश का यह कर्तव्य नहीं है कि वह दूसरे देश के मामलों में दखल दे, चाहे वहां लोकतंत्र हो या न हो।

कांग्रेस नेता ने आगे तर्क दिया कि कुछ परिस्थितियों में किसी देश की तटस्थता के नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि हर देश अपने हितों की रक्षा करता है। हालांकि, कुछ बड़े सिद्धांत भी मायने रखते हैं, और अगर आप कोई रुख नहीं अपनाते हैं, तो एक समय ऐसा आता है... जब हिटलर का शासन था, तब कई यूरोपीय देशों ने कुछ न कहने का फैसला किया था। लेकिन इसके परिणामों को देखिए। अगर ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं, तो ऐसी तटस्थता नुकसानदायक साबित हो सकती है।
 

इसे भी पढ़ें: Assam Assembly Election 2026: गौरव गोगोई के घर पर हुआ 'महागठबंधन' का शंखनाद, कांग्रेस और रायजोर दल आए साथ


दीक्षित ने दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास में भारत की ओर से शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर करने वाले सरकारी अधिकारी और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या पर प्रधानमंत्री की चुप्पी के बीच अंतर स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि पुस्तक पर हस्ताक्षर करना एक बात है, लेकिन ऐसी घटना पर प्रधानमंत्री का चुप रहना बिल्कुल अलग बात है। विदेश सचिव की विदेश नीति बनाने में कोई भूमिका नहीं होती। किसी देश की विदेश नीति का प्रतिबिंब प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री होते हैं। समय का विशेष महत्व होता है।

Continue reading on the app

  Sports

CSK Fans Event: सुरेश रैना-हरभजन और हेडन पहुंचे, फिर क्यों नहीं आया चेन्नई का बेस्ट बॉलर?

चेपॉक स्टेडियम में CSK की ओर से फैंस के लिए एक खास इवेंट का आयोजन किया गया था, जिसमें पूरी टीम मौजूद थी. साथ ही थे इस टीम कुछ दिग्गज खिलाड़ी, जो बीते सालों में CSK का हिस्सा थे. Sun, 22 Mar 2026 23:57:34 +0530

  Videos
See all

Final Cut: Trump की चेतावनी, ईरान पर भारी ! | Iran-Israel America War News | PM Modi | Middle East #tmktech #vivo #v29pro
2026-03-22T18:20:54+00:00

News Ki Pathshala : अमेरिका ने ईरान के लिए जाल बुने ट्रंप खुद 'मकड़जाल' में फंस गए? Top News #tmktech #vivo #v29pro
2026-03-22T18:35:00+00:00

Uttarakhand News: 12 बजते ही उत्तराखंड से आई बड़ी खबर | CM Dhami | Uttarakhand Budget 2026 | TOP #tmktech #vivo #v29pro
2026-03-22T18:30:11+00:00

West Bengal Election 2026: Mamata Banerjee पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ हुई रवाना, बैठक खत्म #shorts #tmktech #vivo #v29pro
2026-03-22T18:18:44+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers