पूर्व एफबीआई डायरेक्टर रॉबर्ट म्यूलर के निधन पर ट्रंप की विवादित टिप्पणी, सभी ने की आलोचना
वॉशिंगटन, 22 मार्च (आईएएनएस)। पूर्व एफबीआई निदेशक रॉबर्ट म्यूलर के निधन पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिक्रिया ने राजनीतिक हलकों में, खासकर वरिष्ठ रिपब्लिकन नेताओं के बीच, हलचल मचा दी। सभी ने ट्रंप की टिप्पणी की आलोचना की।
म्यूलर का शनिवार को निधन हो गया। म्यूलर ने एक दशक से अधिक समय तक एफबीआई का नेतृत्व किया और बाद में 2016 के चुनाव में रूसी हस्तक्षेप की जांच का नेतृत्व किया।
खबर सामने आने के तुरंत बाद ट्रंप ने पोस्ट किया, “रॉबर्ट म्यूलर अभी मर गए। अच्छा हुआ। मुझे खुशी है कि वह मर गया। अब वह निर्दोष लोगों को नुकसान नहीं पहुंचा सकता।”
ट्रंप की इन टिप्पणियों पर तुरंत प्रतिक्रिया आने लगीं। म्यूलर के लंबे सार्वजनिक सेवा रिकॉर्ड को देखते हुए आलोचकों ने ट्रंप की इन टिप्पणियों को अनुचित बताया।
एबीसी न्यूज के कार्यक्रम ‘दिस वीक विद जॉर्ज स्टेफानोपोलोस’ में बोलते हुए न्यू जर्सी के पूर्व गवर्नर क्रिस क्रिस्टी ने इस बयान की निंदा की।
क्रिस्टी ने कहा, “किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में ऐसी बात कहना बेहद निंदनीय है।
उन्होंने आगे कहा कि एक मौजूदा राष्ट्रपति की ओर से इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना और भी अधिक निंदनीय है, खासकर एक सम्मानित सैन्य दिग्गज के बारे में।
म्यूलर ने वियतनाम युद्ध में सेवा दी थी और युद्ध में घायल होने के बाद उन्हें ‘पर्पल हार्ट’ से सम्मानित किया गया था। उन्हें ‘ब्रॉन्ज स्टार’ और ‘नेवी कमेंडेशन मेडल’ सहित अन्य सम्मान भी मिले थे।
क्रिस्टी ने यूएस अटॉर्नी के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान म्यूलर के साथ काम किया था। क्रिस्टी ने कहा कि पेशेवर भूमिकाओं में मतभेद उनके प्रति सम्मान को कम नहीं करते।
उन्होंने कहा, “मैं उनके बारे में एक बात निश्चित रूप से कह सकता हूं कि जब भी उनके देश ने उन्हें सेवा के लिए बुलाया, उन्होंने कभी मना नहीं किया।”
उन्होंने ट्रंप की प्रतिक्रिया को व्यक्तिगत शिकायत से प्रेरित बताया। क्रिस्टी ने कहा, “यह उनके अपने इस भाव से आता है कि दुनिया में केवल वही मायने रखते हैं।”
कार्यक्रम में अन्य लोगों ने भी म्यूलर की विरासत को रेखांकित किया और कानून प्रवर्तन तथा राष्ट्रीय सुरक्षा में उनके दशकों के योगदान का उल्लेख किया।
म्यूलर को 2001 में एफबीआई निदेशक नियुक्त किया गया था और उन्होंने 11 सितंबर के हमलों के बाद के दौर में एजेंसी का नेतृत्व किया, उस समय महत्वपूर्ण आतंकवाद-रोधी प्रयासों की निगरानी की।
म्यूलर के नेतृत्व में रूस जांच ने 2016 के चुनाव को प्रभावित करने के लिए मॉस्को के प्रयासों और ट्रंप अभियान से संभावित संबंधों की जांच की, जिसने कई वर्षों तक अमेरिकी राजनीतिक विमर्श को प्रभावित किया।
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान युद्ध रणनीति में स्पष्टता की कमी : रिपब्लिकन सीनेटर
वॉशिंगटन, 22 मार्च (आईएएनएस)। एक प्रभावशाली रिपब्लिकन सीनेटर ने ईरान संघर्ष में ट्रंप प्रशासन के उद्देश्यों की अस्पष्टता पर चिंता जताई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह रुख प्रमुख सहयोगियों के साथ संबंधों को कमजोर कर सकता है, हालांकि उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कुछ नीतियों का समर्थन भी किया।
एबीसी न्यूज के कार्यक्रम में एक साक्षात्कार के दौरान सीनेटर थॉम टिलिस ने कहा कि ईरान में अमेरिकी रणनीति अभी भी स्पष्ट नहीं है।
टिलिस ने युद्ध के उद्देश्य के बारे में पूछे जाने पर कहा, “मुझे नहीं पता और मुझे लगता है कि यह एक गंभीर समस्या है।”
उन्होंने कहा कि शुरुआती सैन्य कार्रवाई प्रभावी प्रतीत हुई। मुझे लगा कि कुछ समय पहले की गई शुरुआती बमबारी बहुत सफल रही। साथ ही यह भी जोड़ा कि सीमित फॉलो-अप अभियानों को उचित ठहराया जा सकता है।
हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि व्यापक रणनीति अभी भी अनिश्चित है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि अभी यह बहुत अस्पष्ट है। मुझे नहीं पता कि हमारे दीर्घकालिक रणनीतिक लक्ष्य क्या हैं।
ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं, जब पेंटागन युद्ध प्रयास के लिए 200 अरब डॉलर तक की संभावित मांग की तैयारी कर रहा है, जिसके लिए कांग्रेस में द्विदलीय समर्थन आवश्यक होगा।
टिलिस ने कहा कि ऐसी धनराशि को मंजूरी देने से पहले सांसदों को स्पष्टता चाहिए। हमें यह जानना होगा कि यह पैसा कैसे खर्च किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि फंडिंग के लिए राजनीतिक सहमति जरूरी होगी। डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थन की आवश्यकता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हमें यह पता लगाना होगा कि इसे कैसे हासिल किया जाए।
साथ ही, टिलिस ने क्षेत्र में अमेरिकी हस्तक्षेप के बाद अलगाववाद की ओर झुकाव के खिलाफ चेतावनी दी।
उन्होंने कहा, “हम ऐसा नहीं कर सकते कि पहले हस्तक्षेप करें और फिर अचानक अंत में अलगाववादी बन जाएं।”
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं और सहयोगी अर्थव्यवस्थाएं होर्मुज स्ट्रेट में स्थिरता पर निर्भर करती हैं। हमारे सहयोगी, हमारे साझेदार और जिन लोगों पर हम मध्य पूर्व को स्थिर करने के लिए भरोसा करते हैं... वे इसी पर निर्भर हैं।
टिलिस ने नाटो की आलोचना का भी खंडन किया, जब ट्रंप ने सहयोगियों को क्षेत्र में प्रयासों का समर्थन करने के लिए अनिच्छुक बताया।
टिलिस ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि वे कायर हैं।” उन्होंने कहा कि सैन्य कार्रवाई से पहले सहयोगियों से परामर्श नहीं किया गया था, जिससे उनकी प्रतिक्रिया प्रभावित हुई। मुझे लगता है कि वे लोग हैं जिनसे एक बड़े सैन्य अभियान पर सलाह नहीं ली गई।
उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिकी कदम दीर्घकालिक साझेदारियों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। आप दोनों तरीके नहीं अपना सकते, पहले सैन्य हस्तक्षेप करना और फिर सहयोगियों से परिणाम संभालने की उम्मीद करना।
--आईएएनएस
एवाई/एबीएम
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